झारखंड / राष्ट्रपति बाेले- बेटियाें का उच्च शिक्षा में प्रदर्शन बेहतर, पर साइंस-टेक्नाेलाॅजी क्षेत्र में भागीदारी कम

दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद छात्रा को मेडल पहनाते हुए। दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद छात्रा को मेडल पहनाते हुए।
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दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद छात्रा को मेडल पहनाते हुए।दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद छात्रा को मेडल पहनाते हुए।

  • सेंट्रल यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समाराेह : राष्ट्रपति काेविंद के हाथों 11 टाॅपर्स काे मिले गाेल्ड मेडल

दैनिक भास्कर

Feb 29, 2020, 10:47 AM IST

रांची. राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद ने शुक्रवार काे सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समाराेह में 11 टाॅपर्स काे गाेल्ड मेडल दिए। उन्हाेंने कहा-अधिकतर विश्वविद्यालयाें में स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियाें में बेटियां ज्यादा हाेती हैं। यहां भी एेसा ही है। कुल 96 स्वर्ण पदक विजेताअाें में 64 बेटियां हैं ताे 32 बेटे। हमारी बेटियां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। लेकिन साइंस अाैर टेक्नाेलाॅजी के क्षेत्र में उनकी भागीदारी कम है।

उन्हाेंने कहा कि शुक्रवार काे नेशनल साइंस डे भी है। मैंने सुबह दिल्ली में एक समाराेह में हिस्सा लिया। वहां साइंस अाैर टेक्नाेलाॅजी क्षेत्र में बेटियाें की कम भागीदारी पर चर्चा हुई। भागीदारी बढ़ाने के लिए कई घाेषणाएं भी की गईं। हालांकि जिन छात्राओं को गोल्ड मेडल मिले उससे स्पष्ट है कि रांची की छात्राएं साइंस में आगे है। जिन 64 बेटियों को गोल्ड मिला उनमें अकेले साइंस की 46 छात्राएं हैं।

राष्ट्रपति बोले... स्वर्ण पदक विजेता बेटियों की संख्या बेटों से दोगुनी, ऐसे ही विकसित होगा देश
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि महिला सशक्तीकरण सामाजिक विकास के लिए जरूरी है। शिक्षा सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। हमारी बेटियां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। मैंने अधिकतर विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में यह देखा है कि स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या बेटों से अधिक होती है। आपके विश्वविद्यालय में भी विगत बैच में कुल 96 स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 64 बेटियां हैं। वहीं 32 बेटे हैं। बेटियों की संख्या बेटों से दोगुनी है। बेटियों का यह शानदार प्रदर्शन, भविष्य के विकसित भारत की सुनहरी तस्वीर प्रस्तुत करता है। प्राय: बेटों की तुलना में, हमारी बेटियों को अधिक चुनौतियों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए उनकी यह उपलब्धि और भी सराहनीय है।

नया सीखने वाला ही चुनौतियों का कर सकेगा सामना
राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व बाजार में ज्ञान ही सबसे महत्वपूर्ण पूंजी के रूप में उभरा है। परिवर्तन के इस दौर में अपने ज्ञान व कौशल को निरंतर प्रासंगिक बनाए रखना चुनौती भी है और अवसर भी। सदैव नया सीखने वाला व्यक्ति ही इन चुनौतियों का सामना कर सकेगा। आप जॉब क्रिएटर भी बन सकते हैं। आप सभी को सफलता के पथ पर हमेशा आगे बढ़ते रहने के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद देता हूं।

भविष्य में समय पर दीक्षांत आयोजित हो 
राष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह आयोजित करने में विलंब हुआ है। कोई बाधाएं रही होंगी। मेरी अपेक्षा है कि भविष्य में दीक्षांत समारोह समय पर आयोजित हों। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि उत्तर में लद्दाख से लेकर दक्षिण में केरल तक और पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश से लेकर पश्चिम में महाराष्ट्र तक, लगभग 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से आए विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि भूटान, मलेशिया और यमन के विद्यार्थी भी यहां शिक्षा पा चुके हैं। 

यूएसआर के लिए सक्रिय रहे विवि
राष्ट्रपति ने कहा कि जून 2018 में नईदि‍ल्ली में आयोजित गवर्नर कांफ्रेंस में मैंने यह विचार दिया था कि सीएसआर की तरह विश्वविद्यालयों को यूएसआर के लिए सक्रिय होना चाहिए। इसके तहत विद्यार्थी नजदीक के गांवों में लोगों के बीच जाएं। उनकी समस्याओं के समाधान में हाथ बंटाएं। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि आपके विश्वविद्यालय ने आस-पास के पांच गांवों को गोद लेने के लिए पहल की है।

राष्ट्र के साथ आत्म निर्माण जरूरी
समाज सेवा के महत्व को समझना और उसमें सक्रिय होना राष्ट्र-निर्माण के साथ-साथ आत्म निर्माण के लिए भी जरूरी है। मातृ ऋण, पितृ ऋण, आचार्य ऋण आदि ऋणों के साथ-साथ समाज-ऋण को चुकाने के लिए पूरी निष्ठा से तत्पर रहना चाहिए। किसी विश्वविद्यालय की स्थापना और संचालन में पूरे समाज का योगदान होता है। इसलिए, विवि भी समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। आपके विश्वविद्यालय का ध्येय वाक्य ‘ज्ञानात् हि बुद्धि कौशलम्’ अर्थात ज्ञान से ही बुद्धि और कौशल को प्राप्त किया जा सकता है। नैतिकता तथा अन्य चारित्रिक गुणों को आत्मसात करना भी शिक्षा का अनिवार्य अंग है। जो अच्छा इंसान होगा, वही कर्मठ भी होगा।

विकास भारती, रामकृष्ण मिशन से लें प्रेरणा
राष्ट्रपति ने कहा-प्यारे विद्यार्थियों, राज्य की लगभग 26% आबादी जनजातीय है। हमारी युवा पीढ़ी को अपने आदिवासी भाई-बहनों के समग्र विकास के लिए संवेदनशील होकर योगदान देना है। इसके लिए आप सब विकास भारती व रामकृष्ण मिशन जैसे संस्थानों से प्रेरणा ले सकते हैं। 

वीसी और चांसलर ने कहा...
रिसर्च व इनोवेशन पर फोकस अधिक : वीसी

वीसी प्रो. नंद कुमार यादव इंदु ने कहा कि हमारा फोकस रिसर्च, इनोवेशन, स्पोर्ट्स एक्टिविटी पर अधिक है। इसके अलावा दूसरे यूनिवर्सिटीज से कोलाबरेशन कर छात्र-छात्राओं के ओवरऑल डेवलपमेंट ध्यान दिया जा रहा है। विवि में शिक्षक व शिक्षिकाओं के 80 प्रतिशत पद भरे हुए हैं। विवि में 50 प्रतिशत छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं।

बड़े लक्ष्य के लिए तैयार रहें स्टूडेंट्स : चांसलर
सीयूजे के चांसलर जस्टिस (रिटायर्ड) वीएन खरे ने विद्यार्थियों से कहा कि कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए आप तैयार रहें। अब सीयूजे का स्थायी कैंपस हो गया है। लगातार विकास की ओर अग्रसर है। छात्र-छात्राओं को और बेहतर माहौल मिलेगा। सभी स्टूडेंट्स को शुभकामनाएं।

सिर्फ 10 को मेडल देने पर छात्रों का हंगामा
दीक्षांत समारोह में 96 टॉपरों को गोल्ड मेडल दिया जाना था। लेकिन सिर्फ 10 टॉपरों को राष्ट्रपति द्वारा गोल्ड मेडल दिया गया। इसके बाद मुख्य समारोह के समापन की घोषणा कर दी गई। राष्ट्रपति समेत अतिथियों के जाने के बाद समारोह में गोल्ड मेडल लेने पहुंचे टॉपरों ने हंगामा किया। कहा कि राष्ट्रपति से गोल्ड मेडल लेने के लिए ही हम लोग विभिन्न राज्यों से आए हैं। हालांकि बाद में इन टॉपरों को वीसी और डीन द्वारा गोल्ड मेडल दिया गया।

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