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13 साल में घरवालों से लड़कर अपनी शादी रोकी, गांव की लड़कियों को मिलाकर फुटबॉल टीम बनाई, अब ताने के बदले तारीफ मिलती है

फुटबॉल आज सिर्फ एक सपना होता, अगर 3 साल पहले उसने परिवार, समाज के सामने हिम्मत न दिखाई होती।

Bhaskar News | Last Modified - May 18, 2018, 08:06 AM IST

  • 13 साल में घरवालों से लड़कर अपनी शादी रोकी, गांव की लड़कियों को मिलाकर फुटबॉल टीम बनाई, अब ताने के बदले तारीफ मिलती है
    डेमो फोटो

    रांची.पलामू की लक्ष्मी कुमारी 16 साल की हैं। महिला फुटबॉल टीम की सदस्य हैं। हाल में बिहार की टीम को हरा कर आई हैं। जिसके बाद उनके गांव में भी उनका स्वागत हुआ। लेकिन लक्ष्मी के लिए फुटबॉल आज सिर्फ एक सपना होता, अगर 3 साल पहले उसने परिवार, समाज के सामने हिम्मत न दिखाई होती। लक्ष्मी बताती हैं, '3 साल पहले घरवाले मेरी शादी करवा रहे थे। तब सिर्फ 13 साल की थी। सबसे लड़ कर मैंने शादी रोकी। फिर गांव में ही लड़कियों की फुटबॉल टीम बनाई। तब चुप रह जाती तो आज पढ़ भी नहीं पाती, फुटबॉल तो दूर की बात है। तब जो ताने देते थे, आज वही तारीफ करते हैं।' वहीं दुमका के कमाचक गांव की फूल कुमारी आज इंटर की पढ़ाई कर रही है। सोचा था पहले जिंदगी में कुछ बनूंगी...

    बताती हैं, '12 साल की उम्र में घरवालों ने शादी करानी चाही। तब मुझे बाल विवाह जैसी किसी प्रथा के बारे में पता नहीं था। लेकिन इतना जानती थी कि शादी की मेरी उम्र नहीं है। मुझे पढ़ना था। मैंने विरोध किया। गांव वाले तो जितनी खरी-खोटी सुनाते थे, वो अलग, घरवाले भी बात नहीं करते थे। ऐसा लगता था मैंने कोई अपराध कर दिया हो। लेकिन यह सब बर्दाश्त किया। बाद में घरवाले मान गए और मुझे पढ़ाने का फैसला लिया। अब पहले जिंदगी में कुछ बनूंगी, फिर शादी के बारे में सोचूंगी।


    गुरुवार को ऐसी और कई सच्ची कहानियां झारखंड के विभिन्न जिलों से आई बच्चियां सुना रही थीं। रांची के होटन बीएनआर चाणक्या में। मौका था चाइल्ड फंड इंडिया और चेतना विकास द्वारा बाल विवाह की रोकथाम पर आयोजित कार्यक्रम का। कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर और इन बच्चियों ने दीप जलाकर किया। इस कार्यक्रम में चेतना विकास के सचिव कुमार रंजन सहित अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि भावानंद, चन्द्र शेखर, अनूप होड़े, हिमांशु सिंह, एके सिंह, संजय उपाध्याय और तनुश्री सरकार भी उपस्थित थे।

    बाल विवाह खत्म करने में सिर्फ कानून नहीं, युवाओं की मदद जरूरी

    कार्यशाला में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की सदस्य कविता झा ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए कई कानून बने हैं। लेकिन अब सिर्फ कानून काफी नहीं। इसे खत्म करने के लिए हमें युवाओं की मदद की जरूरत है। एक यूथ कैडर बनाना चाहिए जो समाज के ऐसे मसलों को सरकारी तंत्र तक पहुंचाए।

    बताए बाल विवाह के ये नुकसान

    - 15 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों में प्रसव के दौरान मरने की संभावना पांच गुना अधिक होती है।
    - कम उम्र की मांओं के बच्चों में कुपोषण और म़ृत्यू की आशंका अधिक होती है।
    - एक घर नहीं, पूरे देश को शिक्षा, स्वास्थ्य व आर्थिक मायनों में पीछे करता है।
    - यह दंडनीय अपराध है, दो साल की सजा या एक लाख रुपए जुर्माना हो सकता है।
    - अगर बाल विवाह हो रहा है तो आप तुरंत ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास शिकायत करें।
    - विवाह हो चुका है तो 24 घंटे में नजदीकी बाल कल्याण समिति के सामने पेश करें।

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