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राहुल देव मिश्रा | खूंटी

राहुल देव मिश्रा | खूंटी छोटे राज्यों और छोटे जिलों के निर्माण के पीछे मकसद था इनके समग्र विकास का। इन जिलों के...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 03:47 AM IST
राहुल देव मिश्रा | खूंटी

छोटे राज्यों और छोटे जिलों के निर्माण के पीछे मकसद था इनके समग्र विकास का। इन जिलों के वासियों को हर वह सुविधाएं मिले, जो महानगरों की जनता को मिलती हैं। विकास की यात्रा में खूंटी जिला भी अपने टीन एज (किशोर काल) में प्रवेश कर गया है। रांची जिले से कटकर 12 सितंबर 2007 को खूंटी जिला की स्थापना की गई थी।

जिस समय खूंटी एक जिला के रूप में अस्तित्व में आया, उस वक्त जिलेवासियों के जेहन में यह बात थी कि खूंटी में भी रांची की तर्ज पर सुविधाएं मिलने लगेंगी। स्थानीय सांसद कड़िया मुंडा, विधायक सह झारखंड सरकार के मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा और जिला प्रशासन ने अथक प्रयास कर विकास की गाड़ी में ऊर्जा संचालित कर समय-समय विकास की यात्रा प्रारंभ की। खूंटी को 100 वर्षों का सफर तय करना पड़ा जिला बनने के लिए। उस समय सभी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी। जिले में सबसे बड़ी समस्या सड़कों की थी। जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन ने सबसे पहले सड़कों का जाल बिछाना शुरू किया। आज जिले में कई बड़ी-बड़ी सड़कों का निर्माण हो रहा है। जिससे सैकड़ों गांव, मुख्यालय से जुड़ गए हैं। खूंटी जिले में कई बड़े पुल-पुलियों का निर्माण कर गांव से शहर की दूरी कम कर दी गई है। तुपुदाना से अंगराबारी, अड़की से कोचांग होते बंदगांव एवं खूंटी-तमाड़ रोड, खूंटी-कोलेबिरा तथा भूत से नगड़ी तक सड़क के चौड़ीकरण के कार्य ने खूंटी को और भी सुंदर बना दिया है। सुंदरीकरण की दृष्टि से खूंटी शहर का पिछड़ापन साफ झलक रहा है। परंतु आनेवाले दिनों में प्रशासन द्वारा कई और कार्यक्रम चलाए जाने की योजना है। शहर में इंडियन ऑयल का टर्मिनल भी प्रारंभ हो गया है। यहां से झारखंड के 14 जिलों में तेल की सप्लाई की जाती है।