झारखंड / रामेश्वर उरांव बोले- गांधीजी मंदिर नहीं जाते थे, क्योंकि वहां गंदगी रहती है



Rameshwar Oraon in controversy over statement on Mahatma Gandhi
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Rameshwar Oraon in controversy over statement on Mahatma Gandhi

  • गांधी जयंती पर मंदिरों में गंदगी का बयान देकर विवादों में घिर गए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर
  • गांधीविद बोले- बापू ने ऐसा न कहा और न ही लिखा, वह तो छुआछूत के खिलाफ थे

Dainik Bhaskar

Oct 03, 2019, 05:26 AM IST

रांची. गांधी जयंती पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रमों के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव के एक बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी। दरअसल, गांधी जयंती पर कांग्रेस की प्रदेश इकाई की ओर से पदयात्रा का आयोजन किया गया था। इसी के समापन पर मोरहाबादी मैदान में आयोजित सभा में भाषण देते हुए उरांव का एक वीडियो सोशल मीडया पर वायरल हो गया है।

 

अपने संबोधन में उरांव कहते दिख रहे हैं कि एक बार गांधी जी से पूछा गया कि आप रोज रघुपति राघव राजा राम गाते हैं, प्रार्थना करते हैं मगर मंदिर नहीं जाते हैं, क्यों? तब गांधी जी ने कहा था कि मंदिरों में भगवान नहीं, क्योंकि वहां सफाई नहीं होती है, मंदिरों में गंदगी रहती है। कूड़ा-कचरा रहता है। इसलिए वे मंदिर नहीं जाते हैं। ये वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष गांधीजी की गलत छवि पेश कर रहे हैं। भास्कर टीम ने इस मामले में गांधीवादी विद्वानों से बात की तो उनका भी यही कहना था कि गांधीजी ने कभी ऐसी कोई बात कही या लिखी नहीं थी।

 

भास्कर सवाल : गांधीजी पर जो आपने कहा, वह कहां पढ़ा?

रामेश्वर उरांव : बहुत पहले की बात है...मुझे अब किताब का नाम याद नहीं, मगर मैंने ऐसा पढ़ा है

भाजपा के जिस व्यक्ति ने भी इस पर आपत्ति जताई है, उनका इस पर कोई अध्ययन नहीं है। मैंने पटना यूनिवर्सिटी से एमए किया है और लगातार दो साल तक गांधीवाद और मार्क्स पर किताबें पढ़ी हैं। उन्हीं किताबों में गांधीजी के इन कथन का उल्लेख था। यह बात काफी पुरानी हो गई है। मुझे संबंधित किताब का नाम याद नहीं है। लेकिन मेरे दिमाग में सारी बातें अब भी अंकित हैं। गांधीजी स्वच्छता पर काफी ध्यान रखते थे और हर समय स्वच्छ वातावरण में भी रहना पसंद करते थे।

 

गांधीवादी विद्वानों ने कहा

  • गांधीजी को किसी के मंदिर जाने पर कोई आपत्ति नहीं थी। वे मानते थे कि समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति को सुख देने से बड़ी कोई उपासना नहीं है। वे स्वयं मंदिर नहीं जाते थे, उनके स्थापित आश्रमों में भी कहीं कोई मूर्ति या मंदिर नहीं है। गंदगी की वजह से मंदिर न जाते हों ऐसा उन्होंने कहा या लिखा नहीं है। - डॉ. सुगन बड़नाथ, सेवाग्राम से जुड़ी संस्था नई तालीम के अध्यक्ष
  • ^गांधीजी मंदिरों में दलितों को प्रवेश न दिए जाने और छुआछूत के सख्त खिलाफ थे। इसीलिए मंदिर के भीतर नहीं जाते थे। ओडिशा यात्रा के दौरान उनकी पत्नी कस्तूरबा और निजी सचिव महादेव भाई बिना बताए जगन्नाथ मंदिर गए थे तो उन्होंने डांटा भी था। हालांकि मंदिरों के आसपास सफाई रखने पर जरूर उनका जोर था। - अरविंद अंजुम, संयाेजक, गांधी शांति प्रतिष्ठान जमशेदपुर
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