खेलगांव स्टेडियम की बजाए आर्मी कैंप में बिना सूचना के उतार दिया मुख्यमंत्री का चॉपर

3 वर्ष पहले
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  • सुरक्षा से खिलवाड़ आतंकी हाेने की आशंका से आर्मी कैंप में मची अफरा-तफरी   

रांची. खेलगांव थाना क्षेत्र के दीपाटोली स्थित आर्मी कैंप में शनिवार की दोपहर उस समय अफरा-तफरी का माहौल हो गया जब सीएम का चॉपर बिना कोई पूर्व सूचना के आर्मी कैंप में बने हेलीपैड पर उतर गया। हेलीपैड पर चॉपर को उतरता देख एलएमजी से लैस सेना के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। 

1) समय पर सेना के उच्च अधिकारियों ने फायरिंग करने से रोका

जवान चॉपर पर फायरिंग करने की तैयारी में थे लेकिन ऐन वक्त पर सेना के उच्च अधिकारियों ने फायरिंग करने से रोक दिया। चॉपर के पायलट को भी आर्मी कैंप के हेलीपैड पर उतरते ही एहसास हो गया कि वह गलत जगह पर लैंड किया है। पायलट ने पल भर में आर्मी के हेलीपैड से उड़ान भर दी। हेलीपैड से चॉपर के तुरंत उड़ान भरने के बाद सेना के जवानों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सेना को विश्वास हो गया कि चॉपर में आतंकी सवार हैं। इसके बाद सभी को अलर्ट कर दिया गया। पूरे कैंप में हड़कंप मच गया। पूरी सेना खेलगांव स्टेडियम की ओर जा रही चॉपर पर नजर गड़ाए रखी। दूसरी बार कैंप में चॉपर के आने पर एलएमजी से हमला करने के लिए सेना के जवान तैयार थे, लेकिन तब तक चॉपर खेलगांव स्टेडियम में बने हेलीपैड पर जाकर उतर गया। 

इधर, चॉपर को खेलगांव स्टेडियम में उतरता देख सेना के एक अधिकारी खेलगांव स्टेडियम पहुंचे और मामले की जानकारी ली। सेना के अधिकारी को जब यह जानकारी मिली कि यही चॉपर गलती से आर्मी कैंप में उतर गया था तो सभी ने राहत की सांस ली। इसके बाद सेना के अधिकारी खेलगांव स्टेडियम से अपने कैंप लौटे। 

चॉपर के पायलट की लापरवाही की वजह से बड़ी घटना होने से टल गई। जिस समय चॉपर आर्मी कैंप में उतरा, उस समय चॉपर में सिर्फ पायलट था। अगर सेना के जवान चॉपर पर फायरिंग करते तो बड़ी घटना हो सकती थी। हालांकि सेना के अधिकारियों की सूझबूझ से बड़ी घटना टल गई। मालूम हो कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से भारतीय सेना अलर्ट है। आर्मी कैंप के आस-पास से आने-जाने वाले चॉपर पर भी सेना विशेष नजर रख रही है। सुरक्षा की दृष्टि से कैंप के अंदर एलएमजी से लैस जवानों की कई स्थानों पर तैनाती की गई है। 

आर्मी कैंप के ग्राउंड में तीन हेलीपैड बनाए गए हैं। हेलीपैड समेत पूरे कैंप को बाउंड्री वाॅल से आर्मी ने अपने घेरे में ले रखा है। बिना परमिशन के किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं है। खेलगांव स्टेडियम में भी तीन हेलीपैड बनाए गए हैं। खेलगांव स्टेडियम में बने हेलीपैड का इस्तेमाल वहां हाेने वाले कार्यक्रम में आने-जाने वाले नेताओं के लिए किया जाता है। जबकि आर्मी कैंप के अंदर बने हेलीपैड का इस्तेमाल राज्य की विभिन्न जगहों पर चलने वाले नक्सली अभियान में घायल हुए जवानों को बाहर से लाने के लिए किया जाता है। आर्मी के हेलीपैड में चॉपर से घायल जवानों को लाया जाता है और वहां से सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचाया जाता है। इसके अलावा किसी विशेष परिस्थिति में भी आर्मी कैंप के अंदर बने हेलीपैड का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसके लिए पहले से ही सेना को सूचना दे दी जाती है। 

नागर विमानन के डायरेक्टर एसपी सिन्हा का कहना है कि हेलिकॉप्टर को खेलगांव में उतरना था। पायलट काे कन्फ्यूजन हो गया है। इस वजह से सेना के कैंप में उतर गया। फिर सही जगह पर हेलिकॉप्टर उतारा गया। खेलगांव में हेलिकॉप्टर के तीन हेलिपैड होने की वजह से यह कन्फ्यूजन पैदा हो गया।