हादसा / मुरी हिंडाल्को में जमीन धंसने से 10 से 15 लोगों के मिट्टी में धंसने की आशंका

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  • रांची से राहत बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर रवाना

Apr 09, 2019, 04:18 PM IST

रांची. दोपहर 1:40 पर हादसा हुआ। दो बजे तक सभी अफसरों और मीडियाकर्मियों को भी ये सूचना मिल गई कि मुरी स्थित हिंडाल्को फैक्ट्री के कॉस्टिक तालाब की दीवार टूटने से मलबा आसपास के गांव में फैल गया। प्रारंभिक सूचना में 200 से अधिक लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना मिली। आनन फानन में अफसरों और मीडिया की टीम रवाना हो गई।

 

एडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीम खाली हाथ पहुंची
दैनिक भास्कर की रांची से टीम पहुंचने (3:40 बजे) के बाद नेशनल डिजास्टर एंड रिस्पांस टीम (एनडीआरएफ) और जिला प्रशासन की टीम पहुंची। वो भी, खाली हाथ। डीसी ने इस बात को स्वीकार भी किया कि रासायनिक मलबा होने के कारण बचाव दल अपना काम शुरू नहीं कर पाया, क्योंकि जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल ये कि राष्ट्रीय आपदा बचाव दल और पुलिस प्रशासन क्या ये अनुमान नहीं कर पाया कि कॉस्टिक तालाब का मलबा कैसा होगा? अगर एक बार चूक हो भी गई तो रांची से मुरी की दूरी सड़क मार्ग से भी महज डेढ़ घंटे में तय की जा सकती है, तो तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों ने मलबे को हाथ में उठाकर दिखाया कि किस तरह वह हाथ पर असर करता है। कुछ सेकेंड में ही वह हथेली को खुरदरा कर देता है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में अगले दिन बचाव कार्य शुरू करने के क्या मायने हैं? डीसी राय महिमापत रे और एसएसपी अनीश गुप्ता ने एक सुर में कहा कि अभी तक कोई बॉडी नहीं मिली है। सवाल ये उठता है कि जिस मलबे में हाइवा और अन्य वाहन लापता हो गए, उस मलबे को बिना हटाए किसी भी तरह से कोई तलाश कैसे संभव है? 

 

चुनाव है इसलिए आरोपों का मलबा भी निकलेगा 
लोकसभा चुनाव के बीच में हादसे की सूचना मिलते ही लगभग सभी प्रमुख नेताओं ने मुरी का रुख कर लिया। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो और सिल्ली के पूर्व झामुमो विधायक अमित महतो का घर ही वहीं है। इसलिए सबसे पहले मोर्चे पर वे थे। फिर भाजपा सांसद और वर्तमान में टिकट कटने से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे रामटहल और पीछे से कांग्रेस के प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय भी पहुंचे। सभी ने हादसे पर दुख जताया। रामटहल समेत समूचे विपक्ष ने इसके लिए सरकार को जिम्मेदार बताया। जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। 

 

घटना की सीएस जांच कराएं : सीएम
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुरी घटना पर दुःख जताते हुए मुख्य सचिव को जांच के लिए निर्देशित किया है। साथ ही राहत कार्य में तेजी लाने को कहा है। कहा है कि राहत कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाए। इधर, मुख्य सचिव डीके तिवारी ने मूरी के हिंडाल्को प्लांट का कास्टिक तालाब टूटने पर दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त शुभ्रा वर्मा को जांच करने का आदेश दिया है। कहा है कि प्रमंडलीय आयुक्त कास्टिक तालाब हादसा से जुड़े हरेक पहलुओं पर उच्चस्तरीय जांच करें। उन्होंने तुरंत जांच कर रिपोर्ट राज्य सरकार को समर्पित करने की हिदायत दी है। मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि इस हादसा से आसपास में रहने वाले आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो और जान-माल की क्षति ना हो यह सुनिश्चित किए जाएं। सीएस ने बताया कि रांची से एनडीआरएफ की टीम को घटनास्थल पर तत्काल भेजा गया है।

 

ग्रामीण ने बीच में टोका-गलत कह रहे हैं साहब, 60 लोग मेरे जानने वाले दबे 
मौके पर पहुंचे रांची डीसी राय महिमापत रे घटना के बाद हिंडाल्को के एक अधिकारी से जानकारी ले रहे थे। अधिकारी उन्हें बता रहा था कि जिस पॉन्ड की दीवार टूटी उससे रेलवे लाइन या आस-पास के गांवों को खतरा नहीं है। इसी बीच लगाम गांव के उमेश महतो ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा कि आप गलत कह रहे हैं। उमेश महतो ने कहा कि जब पॉन्ड की दीवार टूटी तो मलबे के बहाव क्षेत्र में खाना खाने बैठे करीब 60 लोग लापता हैं। इनमें उसके चाचा भी हैं। इसके अलावा पटना निवासी 26 वर्षीय अमरेन्द्र कुमार जो यार्ड में बुलडोजर चला रहे थे उनकी भी मौत की सूचना है। यार्ड से भागने के क्रम में तथा बाद में बहाव की चपेट में आने से लगभग तीन सौ लोग मलबे में दब गए हैं। महतो ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन की लापरवाही से लोगों की जान गई है। उन्होंने डीसी से कहा कि मौके पर देखिए तो आपको हकीकत पता चलेगी। बाद में भास्कर से बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि जानबूझकर लाइट काटी गई। ग्रामीणों को घटनास्थल की तरफ नहीं जाने दिया जा रहा। 

 

हादसे के लिए प्रबंधन और सरकार जिम्मेवार : सुबोधकांत 
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने हादसे के लिए प्रबंधन और सरकार को जिम्मेवार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि रेस्क्यू टीम शाम छह बजे तक वहां नहीं पहुंची थी, जबकि यह घटना दोपहर 12 बजे की है। कास्टिक तालाब की खतरनाक परिस्थितियों के बारे में प्रबंधन और प्रशासन को स्थानीय लोगों ने जानकारी दी थी, बावजूद जिम्मेवार लोगों ने नोटिस नहीं लिया। 

 

बचाव किसका? ग्रामीणों का आरोप-अफसर कंपनी की ही सुन रहे 
नाराज ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अफसर और नेता कंपनी की पैरवी कर रहे। वे उनका ही पक्ष सुन और समझ रहे हैं। जानबूझकर बचाव कार्य अगले दिन पर टाल दिया ताकि सारे सबूत खत्म हो जाएं। हमारी बातों को तो कोई सुनना ही नहीं चाहता। घटनास्थल पर अधिकतर काम करने वाले बाहर के लोग हैं। ऐसे में अब बुधवार सुबह ही पता चलेगा कि कितने लोग लापता हैं। 

 

दिसंबर-18 में ही केंद्रीय मंत्री से की थी शिकायत : अमित 
सिल्ली के पूर्व झामुमो विधायक अमित महतो ने कहा है कि दिसंबर 2018 में ही उन्होंने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री डाॅ. हर्षवर्धन और राज्य सरकार को पत्र लिख कर दुर्घटना की अाशंका जताई थी। लेकिन न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने कोई संज्ञान लिया। उन्होंने अविलंब दोषियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज करने के साथ ही बचाव कार्य शुरू करने की मांग की। 

 

प्रदूषण बोर्ड काे हिंडाल्को की गलती नहीं दिखती : रामटहल 
सांसद रामटहल चौधरी ने कहा कि इस घटना के लिए हिंडाल्को प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद अाैर राज्य सरकार जिम्मेवार है। हिंडाल्को के शीर्ष पदाधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्हें पता था कि कभी भी ऐसी घटना हो सकती है, लेकिन बचाव का कोई उपाय नहीं किया। उल्टे बाहरी लोगों को वहां ड्यूटी पर लगा दिया, ताकि घटना होने पर उनका अता-पता ही नहीं चले। 

 

सरकार मामले में आवश्यक कार्रवाई कर रही है : सुदेश 
आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा है कि हिंडालको में हुए हादसे की उच्च स्तरीय जांच के लिए राज्य सरकार ने आदेश दे दिया है। सरकार इस मामले में आवश्यक कार्रवाई कर रही है। हादसे में देर शाम तक हताहतों की सूचना नहीं है। जो भी जांच में दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 

 

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