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रांची. पंछी बनूं उड़ती चलूं आज गगन में....जब रांची लोहरदगा टोरी पैसेंजर की पायलट सीट पर दीपाली अमृता बैठीं, ताे उनके मन ने यह फिल्मी गीत बरबस गुनगुनाया। उमंग से सहयोगी रोजी सिन्हा कैसे अछूती रहतीं, वो भी मुस्कुरा उठीं। ऐसी विश्वस्त मुस्कान से रविवार सुबह रांची रेलवे स्टेशन रोशन था। बात ही ऐसी रही। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रांची मंडल में रांची लोहरदगा टोरी पैसेंजर (ट्रेन नंबर 68037/68038) की जिम्मेदारी एक दिन के लिए महिलाओं को सौंप दी थी।
महिलाओं ने इसे बखूबी निभाकर बता दिया कि किसी भी मामले में वे किसी से कम नहीं हैं। काउंटर पर पूजा कुमारी समय से पहले पहुंच गई थीं। यात्रियों में भी उत्साह कम न था। सीनियर डीओएम नीरज कुमार स्वयं प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे और निगरानी करते रहे। पांच टीटीई में उर्सिला टोप्पो, मसिरा सुरीन, मुन्नी भेंगरा, लॉरेंसिया केरकेट्टा और बिनिता खेस शामिल रहीं। गार्ड अनुपम लता को जैसे ही हरी झंडी मिली स्त्री शक्ति के बल पर पटरी पर रेल सुबह 9 बजे दौड़ पड़ी। 12 बोगी वाली ट्रेन 109.9 किमी दूर टोरी पहुंची व वापस रांची लौटी।
दूसरी बार महिलाओं ने निभाई जिम्मेवारी
रांची मंडल के इतिहास में यह दूसरा मौका था जब किसी ट्रेन में पूरा स्टॉफ महिला कर्मचारियों का था। लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गार्ड से लेकर चेकिंग स्टॉफ और यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा भी आरपीएफ महिला जवानों के हाथ में रहा। इसमें एएसआई सुशीला बडाइक की अगुवाई में सरोज तिर्की, सबिता, एम कुजूर, सी कच्छप और सुमन मिंज ने सुरक्षा की कमान संभाली।
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