प्रतिक्रिया / विपक्षी दलों की बैठक को भाजपा ने बताया नौटंकी पार्ट-2, कहा- 65 प्लस के लक्ष्य को पार करेंगे हम



प्रतुल शाहदेव। (फाइल फोटो) प्रतुल शाहदेव। (फाइल फोटो)
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प्रतुल शाहदेव। (फाइल फोटो)प्रतुल शाहदेव। (फाइल फोटो)

  • भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा- विपक्षी गठबंधन जनता द्वारा खारिज नेताओं व दलों का समूह

Dainik Bhaskar

Jul 10, 2019, 04:47 PM IST

रांची. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बुधवार को हेमंत सोरेन के आवास पर विपक्षी दलों की हुई बैठक को नौटंकी पार्ट 2 करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के एक होकर लड़ने से भी भाजपा को फर्क नहीं पड़ता है। भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ 65 प्लस सीटों के लक्ष्य को पार करके रहेगी।

 

शिबू के हार के बाद झामुमो के लिए कुछ नहीं बचता
प्रतुल ने कहा कि अब विपक्ष को गठबंधन से 'महा' शब्द हटा लेना चाहिए क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में जनता ने झारखंड में इनका सूपड़ा ही साफ कर दिया था। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन हताश और निराश व जनता के द्वारा खारिज किए गए नेताओं और दलों का समूह है। उन्होंने कहा कि जब इस गठबंधन के प्रमुख घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन ही चुनाव हार गए तो झामुमो के पास आगे कुछ कहने को नहीं बचता। झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी लगातार पांचवीं बार चुनाव हारे। राजद टुकड़ों में बंट कर अस्तित्वविहीन हो गया है। कांग्रेस झारखंड में पूरे तरीके से अप्रासंगिक हो चुकी है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सात सीटों पर लड़ी और छह सीटों पर बड़े मार्जिन से हारी। ऐसे भी लोकसभा चुनाव हारने के तुरंत बाद कांग्रेस और झामुमो ने एक दूसरे पर वोट ट्रांसफर नहीं करवा पाने का सीधा आरोप लगाया था। इसके बाद भी फिर से ये दल साथ चुनाव लड़ने की कवायद का नाटक कर रहे हैं।

 

अजय और बाबूलाल के बैठक में न पहुंचने पर साधा निशाना
प्रतुल ने कहा कि वैसे हेमन्त सोरेन के इस बैठक को गठबंधन के नेताओं ने हल्के में लिया। बैठक में न तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अजय कुमार पहुंचे और ना ही बाबूलाल मरांडी ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के एक होकर लड़ने से भी भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रतुल ने कहा कि हेमंत का ये कहना हास्यास्पद है कि भाजपा जमीन के मुद्दे पर बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। प्रतुल ने कहा कि पूरे प्रदेश में सोरेन परिवार ने 33 डीड के जरिए जब सीएनटी/एसपीटी कानून का मजाक बनाते हुए गरीब आदिवासियों की करोड़ों की संपत्ति को कौड़ियों के मोल लिखवा लिया था तो उस समय उन्हें ये क्यों नहीं याद आया था कि एक न एक दिन कानून के हाथ उन तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को दोहरे मापदंड नहीं अपनाना चाहिए।

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