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दिल्ली-नोएडा के बाद रांची के सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे बुजुर्ग

एक वर्ष पहले
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ट्रेनिंग सेशन में जेसीईआरटी की स्टेट रिसोर्स पर्सन निरुपमा कुमारी।
  • देशभर में रांची तीसरा शहर जहां बुजुर्गों को स्वस्थ रखने की पहल
  • 100 सेवानिवृत्त शिक्षित सीनियर सिटीजन को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य
  • शुरुआत पांच स्कूलों से होगी, सबकुछ ठीक चला तो 15 सितंबर से छठी से आठवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को पढ़ाने लगेंगे
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रांची. नोएडा और दिल्ली के बाद अब रांची में भी रिटायर्ड पर्सन सरकारी स्कूलों के बच्चों के टीचर बनेंगे। रिटायर्ड पर्सन की सक्रियता बढ़ाने और मानसिक रूप से फिट रखने के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से हेल्दी एजिंग इंडिया संस्था ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू हाे चुका है। डीईओ कार्यालय परिसर स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र में इसके लिए इंटर-जेनरेशन लर्निंग सेंटर (आईजीएलसी) बनाया गया है।
 

100 बुजुर्गों को ट्रेनिंग देने का रखा लक्ष्य
झारखंड शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) की स्टेट रिसोर्स पर्सन निरुपमा कुमारी ने 40 बुजुर्गाें को ट्रेनिंग सेशन में बताया कि बच्चों को कैसे पढ़ा सकते हैं। 100 बुजुर्गों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। शहर के 20 स्कूलों में कक्षा छठी से अाठवीं तक के बच्चों को ट्रेनिंग के बाद ये बुजुर्ग पढ़ाएंगे। शुरुआत पांच स्कूलों में 15 सितंबर से करने की तैयारी चल रही है। बाकी बचे स्कूलों में एक साथ पढ़ाई शुरू कराने की बजाय दो महीने में पांच-पांच स्कूलों में यह व्यवस्था की जाएगी। 

बुजुर्गों को अकेलेपन से दूर करने की कवायद 
हेल्दी एजिंग इंडिया संस्था बुजुर्गाें को अकेलेपन से दूर करने लिए उन्हें शिक्षा से जोड़ रही है। सितंबर 2017 में सबसे पहले इसकी शुरुआत नोएडा के जूनियर स्कूल से हुई। इस शैक्षणिक सत्र अप्रैल में दिल्ली के पांच स्कूलों में भी यह शुरू हुआ। न्यू दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के 41 स्कूलों के बच्चों को बुजुर्ग पढ़ाएंगे। जबकि, आईजीएलसी परियोजना के लिए रांची जिला प्रशासन के साथ संस्था ने 30 मई को एमओयू किया है। 
 

शहर के बुजुर्ग भी जुड़ सकते हैं योजना से 
वैसे रिटायर्ड पर्सन जो शिक्षित हों, अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए परियोजना से जुड़ने को इच्छुक हों, उन्हीं का चयन इसमें होगा। ट्रेनिंग के बाद उनका डेमोस्ट्रेशन होगा। हेल्थ चेकअप भी उनका किया जाएगा कि वे कितने फिट हैं। अगर अधिक देर खड़े नहीं रह सकते तो उन्हें वैसे बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी जो पढ़ने में कमजोर हैं। 
 

क्या कहते हैं बुजुर्ग 

  • रक्षा लेखा विभाग से पर्यवेक्षक के पद से रिटायर हुए कृष्णा कुमार सहाय कहते हैं कि समाज निर्माण का जज्बा है, इसलिए इस परियोजना से जुड़े हैं।
  • बैंक के रिटायर्ड मैनेजर वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि यह पहल सोसाइटी के लिए बहुत उपयोगी होगी।
  • शिक्षिका रही उषा सिंह का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद घर में रहना अच्छा नहीं लग रहा था।
  • टाटा स्टील में इंजीनियर रहे आरपी सिंह कहते हैं इस योजना से नीचे तबके के बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी। हम भी पूरी तरह से एंगेज हो जाएंगे।

   

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