रांची / केंद्र ने रिम्स से पूछा- कैंसर इंस्टीट्यूट बना? तो कहा- कुछ नहीं हुआ, सब प्रक्रिया में है



Ranchi News rims cancer institute news and update
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Ranchi News rims cancer institute news and update

  • रिम्स ने कहा था मार्च 2019 तक बन जाएगा कैंसर इंस्टीट्यूट 
  • राज्य के कैंसर मरीज इलाज के लिए महानगरों में जाने को हैं मजबूर 
  • 38.25 करोड़ सालभर से रिम्स के खाते में पड़ा है 

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 10:58 AM IST

रांची. स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, रिम्स के डेवलपमेंट और यहां इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य से मिले 38.25 करोड़ रुपए का पिछले एक साल से कोई इस्तेमाल नहीं हुआ है। इस रकम से कैंसर विभाग के लिए नए और आधुनिक उपकरणों की खरीद की जानी थी। विशेषज्ञ डॉक्टरों और कर्मचारियों की भी नियुक्ति करनी थी, लेकिन ये रुपए आज भी रिम्स के खाते में पड़े हुए हैं। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मार्च 2018 में दिए गए 38.25 करोड़ रुपए का हिसाब मांगा है। पूछा है कि इन पैसों का क्या किया गया। जवाब में रिम्स निदेशक की ओर से बताया गया कि अभी कैंसर विभाग के लिए मशीन की खरीद प्रकिया में है। साथ ही, डॉक्टरों की नियुक्ति का भी प्रयास किया जा रहा है।

तत्कालीन निदेशक ने दिया था लिखित आश्वासन

  1. जून 2018 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ हुई बैठक में तत्कालीन निदेशक डॉ. आरके श्रीवास्तव ने लिखित आश्वासन दिया था कि मार्च 2019 तक स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट चालू हो जाएगा। बताते चलें कि राज्य के कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है। रिम्स कैंसर इंस्टीट्यूट की बेहतरी की आस मरीजों को है, ताकि वे अपने घर और राज्य में इलाज करा सकें। 

  2. केंद्र व राज्य सरकार ने 2018 में दे दिया था 38.25 करोड़

    रिम्स में एनपीसीडीएस (नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल आफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवेस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक) प्रोग्राम के तहत स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए 29 मार्च 2018 को 38.25 करोड़ रुपए दिए गए। इसमें केद्रांश के रूप में 22.95 करोड़ तथा राज्यांश के रूप में 15.30 करोड़ मिले। मशीन के लिए रिम्स प्रबंधन ने 31 जुलाई 2018 को टेंडर निकाला गया। कंपनियों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। बाद में सिंगल टेंडर होने के कारण 18 अप्रैल 2019 को हुई तकनीकी समिति की बैठक में टेंडर रद्द करने का फैसला लिया गया। फिर 30 अप्रैल को टेंडर निकाला गया है। 

  3. एक डॉक्टर के भरोसे हर माह करीब 400 मरीज की ओपीडी

    कैंसर विशेषज्ञों की मानें तो कैंसर कोई एक अंग की बीमारी नहीं है। यह मल्टीपल आर्गन डिजीज है। यह शरीर के किसी भी या कई हिस्सों को एकसाथ अपनी चपेट में ले सकती है। जैसे स्तन, बच्चेदानी, कोलन, लीवर, बोन, किडनी, ओरल, ब्लड या लंग। राज्य में सभी तरह के कैंसर मरीजों की संख्या अधिक है। सभी इलाज के लिए भटक रहे हैं। लेकिन, रिम्स के इस सेंटर में एक-दो कैंसर का ही इलाज हो पाता है। सेंटर में सिर्फ एक डॉक्टर हैं जो कि रेडियोथेरेपिस्ट हैं। इन्हीं के जिम्मे सेंटर पिछले तीन साल से चल रहा है। जबकि हर माह करीब 400 से अधिक ओपीडी मरीज यहां आ रहे हैं। दूसरी ओर, हर साल राज्य के लोग कैंसर के इलाज के लिए करीब 25 करोड़ दूसरे राज्यों के अस्पतालों में खर्च कर देते हैं। 

  4. इन मशीनों की होनी है खरीद

    कैंसर विभाग के लिए पांच प्रमुख मशीनों की खरीद की जानी है। इसमें हाई एनर्जी लिनियर एक्सीलेटर, सीटी सिमुलेटर, ब्रेशे थेरेपी, रेडियोथैरेपी डेसोमेट्री फिजिक्स इक्यूपमेंट और सी-अार्म मशीन शामिल है। राज्य में प्रतिवर्ष करीब 6,000 नए कैंसर के मरीज मिल रहे हैं। अधिकतर मुंबई, दिल्ली या वेल्लौर जाते हैं। 

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