दहशत / जंगलों से घिरे गांवों में रतजगा कर रहे ग्रामीण, मौत बनकर घूम रहे हाथी



ranchi news wild elephants moving towards human populated areas
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  • जंगल वीरान होने के बाद दिन-रात गांव में हाथी आने की दहशत
  • ताबेरखुर्द, देवगांव, लतरातु, सकरपुर समेत विभिन्न गांव में पेड़ों की कटाई निरंतर जारी

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2019, 03:52 PM IST

रांची. लापुंग, सोनाहातू, राहे, तमाड़, कर्रा थाना क्षेत्र के जंगलवर्ती गांवों के ग्रामीण जंगली हाथियों के खौफ और दहशत के साए में जीने को विवश हैं। शनिवार को हाथी ने चार लोगों को कुचलकर मार डाला। इस घटना के बाद ग्रामीणों की माने तो लोगों की जिंदगी और उनकी सुरक्षा बिल्कुल भगवान भरोसे है। कब किधर से जंगली हाथी आ जाए और सामने वाले को कुचल डाले, इसी डर के साए में लोग जीने को मजबूर हैं। इधर, लापुंग में जंगली हाथी के वास्तविक घर जंगल में पेड़ों की कटाई से वनों का घनत्व विरल हो गया है।
 
जोश में आकर होश खोने की जरूरत नहीं
एक जून को हाथी द्वारा कुचलकर चार लोगों की मौत के बाद रविवार की सुबह से जंगली हाथी आने के अफवाहें गांवों में उड़ती रही। कभी तेतरा तो कभी तिगरा, कभी पोला तो कभी तिलई में। अफवाहों के कारण सकरपुर, तिलई, पोला, सरनाटोली और सेमरटोली समेत अन्य गांव से सैकड़ों लोग जंगल में घुसकर जंगली हाथी की तलाश करने में जुट गए। कोई कहता उधर से आ रहा है तो कोई कहता किसी और को मार दिया। जितनी मुंह उतनी बातें। लोगों के अफवाहों से आम लोग के साथ वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिनभर परेशान रहे। देवगांव पंचायत के पूर्व मुखिया संतोष तिर्की ने जंगल में जाकर लोगों को दिन भर समझाते रहे की अफवाह के पीछे नहीं भागना है। उन्होंने कहा कि जोश में आकर होश खोने की जरूरत नहीं है। संतोष तिर्की ने पोला, सकरपुर और तिलई जाकर लोगों को शांत कराया और वापस घर भेजा।

 

पटाखे और मशाल का वितरण
लापुंग और कर्रा के सीमावर्ती इलाकों में कैंप कर रहे बेड़ो के रेंजर रामाशीष सिंह सहित अन्य लोगों को रांची के डीएफओ ने लापुंग पहुंचकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। उन्होंने वन विभाग द्वारा जंगली हाथी को भगाने के लिए बुलाए गए मजदूर और एक्सपर्ट को शाम होते ही जंगली हाथी को भगाने के लिए अभियान शुरू करने का निर्देश दिया। इधर, सूत्रों के अनुसार जंगली हाथी कर्रा थाना क्षेत्र के कसीरा और पलसा जंगल की ओर कूच कर गया है। वन विभाग ने लोगों के बीच केरोसिन तेल, पटाखे और मशाल का वितरण किया।

 

हाथियों ने दर्जनों लोगों को निशाना बनाया
जंगली हथियों द्बारा अभी तक प्रखंड में रघु महतो तेतला, श्रवण महतो बांसटांड़, निरंजन महतो जाड़ेया, नेपाल महतो कोकाडीह, महवीर मछुवा दुलमी, गणेश प्रमाणिक मानकीडीह, रुपा कुमारी कोकाडीह, मंगल सिंह मुंडा जाड़ेया, संजय मछुवा, रूड़ी सिंह मुंडा कोकाडीह, गोपेश्वर लोहरा सोनाहातू, जगनोहन मुंडा कुदाडीह, जामुदाग, हेसाडीह और लांदुपडीह गांव में भी लोगों को जंगली हाथी ने मारा है।

 

ग्रामीणों का मुख्य पेशा जंगल काटकर बाजार में लकड़ी बेचना
शाहेदा, सरसा, ताबेरखुर्द, देवगांव, लतरातु, सकरपुर समेत विभिन्न गांव में जलावन के लिए सखुआ के पेड़ों की कटाई निरंतर जारी है। तिगरा और तेतरा गांव की ग्रामीण महिलाएं चार से पांच किलोमीटर दूर सरसा जंगल जाकर पैदल सिर पर ढोकर कटे हुए सखुआ के पेड़ ले जाते अक्सर देखे जा सकते हैं। वहीं, शाहेदा गांव में ग्रामीण लकड़ी के व्यवसाय पर ही पूरी तरह आश्रित हैं। यहां खेती की जमीन नहीं होने के कारण लोगों का मुख्य पेशा जलावन के लिए लकड़ी काटकर बाजारों में बेचना मुख्य पेशा बन गया है। धीरे-धीरे जंगल साफ होते जा रहे हैं। जंगल इतने घने थे कि कभी जंगलों में पेड़ के नीचे तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंची थी और अब हालात यह है कि अब जंगल के आर-पार भी देखा जा सकता है। लोग पेड़ नहीं लगा रहे और प्रतिदिन पेड़ को काट रहे हैं। इससे पर्यावरण को भी काफी क्षति पहुंच रही है। गांव स्तर पर बने वन प्रबंधन समिति अब निष्क्रिय हो गई है। जंगलों के कटने से जंगली हाथियों का घर उजड़ रहा है।

 

जंगली हाथियों का मानव से टकराव की स्थिति
जंगल में जंगली हाथियों के खाने के लिए मुख्य रूप से वटवृक्ष और पीपल के पेड़ मुख्य आहार माने जाते हैं। लेकिन जंगलों में अब ऐसे पेड़ इक्के दुक्के दिखाई देते हैं। यही कारण है कि जंगली हाथी अपने घरों से निकलकर अपने भोजन की तलाश के लिए इंसानों के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं। जंगली हाथियों के मानव से टकराव की स्थिति बन जाती है। लोग जंगली हाथी को देखते ही पत्थर फेंककर मारने लगते हैं तब जाकर जंगली हाथी उग्र हो जाते हैं और हिंसक रूप लेकर लोगों की जान तक ले लेते हैं।


राजस्व गांवों में वन समिति का गठन
जंगली हाथियों से गांव को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग भी प्रयासरत है। बुंडू रेंजर रणबीर सिंह के अनुसार हाथियों से गांव को सुरक्षित रखने के लिए हर राजस्व ग्राम में वन समिति का गठन किया गया है। राहे में 15, सोनाहातू पश्चिम में 20, सोनाहातू पूर्वी में पांच वन समिति है। समिति को हाथी भगाने के लिए 3000 हजार रुपए दिए जाते हैं। इस राशि से संशाधनों की खरीदारी किया जाता है। सदस्यों को हाथी भागने के लिए ट्रेनिंग दिया जाता है।

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