रांची / पहली बार टूटेगी परंपरा, सरहुल पूजा में नहीं निकलेगी शोभायात्रा; 27 मार्च पूजा में कोरोना मुक्त देश की कामना होगी

सरहुल पूजा को लेकर सिरम टोली सरना स्थल में बैठक करते आदिवासी संगठन के लोग। सरहुल पूजा को लेकर सिरम टोली सरना स्थल में बैठक करते आदिवासी संगठन के लोग।
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सरहुल पूजा को लेकर सिरम टोली सरना स्थल में बैठक करते आदिवासी संगठन के लोग।सरहुल पूजा को लेकर सिरम टोली सरना स्थल में बैठक करते आदिवासी संगठन के लोग।

  • सभी सरना एवं आदिवासी संगठनों ने किया अपील, सरहुल की पूजा में कोरोना मुक्त देश की कामना करें
  • मुख्य सरहुल की पूजा हातमा में होगी, इस बार कैसे होगी बारिश इसकी की जाएगी भविष्यवाणी

दैनिक भास्कर

Mar 24, 2020, 03:45 PM IST

रांची.  काेरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए करीब 52 साल के इतिहास में पहली बार सरहुल की शोभायात्रा नहीं निकाली जाएगी। इसको लेकर सभी सरना एवं आदिवासी संगठन निर्णय ले चुके हैं। 27 मार्च को कहीं पर भी कोई सामुहिक कार्यक्रम नहीं होगा और न ही कहीं पर सामुहिक नृत्य एवं संगीत होगा। मगर 27 मार्च को रांची के सभी सरना स्थल, अखरा में सरहुल की पूजा-अर्चना पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ होगी। इस दौरान इसका ध्यान रखा जाएगा कि लोगों की भीड़ ना जुटे।

सरहुल की मुख्य पूजा अर्चना हातमा सरना स्थल में होगी। इसको लेकर मुख्य पाहन जगलाल ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 26 की शाम को घड़ा में पानी रखा जाएगा। 27 की सरहुल की पूजा के दौरान घड़े में रखे पानी को देखकर यह भविष्यवाणी की जाएगी कि इस वर्ष बारिश की स्थिति कैसी रहेगी।

सरहुल में साल व सखुआ वृक्ष की विशेष तौर पर पूजा की जाती है

आदिवासियों की प्रकृति प्रेम के प्रतीक के रूप में सरहुल पर्व पूरे राज्य में मनाया जाता है। यह आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। चूंकि यह पर्व रबी की फसल कटने के साथ ही आरंभ होता है। इसलिए इसे नए वर्ष के आगमन के रूप में भी मनाया जाता है। इस पर्व में साल व सखुआ वृक्ष की विशेष तौर पर पूजा की जाती है। साथ ही यह भविष्वाणी की जाती है कि इस साल बारिश की स्थिति कैसी रहेगी।

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