मांग / रिम्स के जूनियर और रेजीडेंट डॉक्टर ने की आंदोलन की घोषणा, दो दिन अोपीडी का बहिष्कार



रिम्स। (फाइल) रिम्स। (फाइल)
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रिम्स। (फाइल)रिम्स। (फाइल)

  • शुक्रवार कीको शाम और शनिवार को दिनभर ओपीडी में नहीं करेंगे कार्य
  • डॉक्टर्स की रविवार को भूख हड़ताल, सातवां वेतनमान लागू करने की मांगी

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 07:43 PM IST

रांची.  रिम्स के जूनियर और रेजीडेंट डॉक्टरों ने सातवें वेतनमान को शीघ्र लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार से आंदोलन की घोषणा की है। ये डॉक्टर शुक्रवार की शाम की ओपीडी का बहिष्कार करेंगे। शनिवार को दिनभर ओपीडी में बैठेंगे। अगले दिन रविवार को भूख हड़ताल करेंगे। आंदोलन में रिम्स के करीब 600  पीजी डॉक्टर, सीनियर और जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर शामिल होंगे। यह निर्णय बुधवार को जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की बैठक में लिया गया। एनाटॅामी लेक्चर थिएटर में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में जूनियर और रेजीडेंट डॉक्टर शामिल हुए।

 

तीन जून 2018 को ही हुई थी सातवां वेतनमान देने की सहमति
इस संबंध में जेडीए अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार ने कहा कि पिछले साल 3 जून 2018 को ही स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और मुख्यसचिव की उपस्थिति में रेजीडेंट डॉक्टरों को सातवां वेतनमान देने पर सहमति हुई थी। जिसमें कहा गया था कि 15 दिनों में सातवां वेतनमान देने की कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। 12 जुलाई 2018 को हुई जीबी की बैठक में भी इसपर सहमति दे दी गई। हालांकि बीते सात महीने में इसपर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब वे लोग वित्त विभाग में जानकारी लेने पहुंचे तो वहां भी टालमटोल किया गया। इस बीच दो और जीबी की बैठक हो गई। जीबी की बैठक में सातवां वेतनमान देने की घोषणा तो हो जाती है लेकिन उसपर कार्रवाई नहीं होती। एक माह पहले भी डॉक्टरों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया था। उसके बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

 

जीबी की बैठक में नहीं बुलाया गया
डॉ. अजीत ने कहा कि उनलोगों की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है, इसके लिए जीबी की बैठक में जेडीए प्रतिनिधि को बुलाने की बात हुई थी। लेकिन 12 फरवरी को हुई जीबी की बैठक में जेडीए के प्रतिनिधि को नहीं बुलाया गया।

 

हड़ताल का क्या पड़ेगा असर
पीजी डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कारण है कि ओपीडी में मरीजों का दवाब काफी होता है। सिर्फ सीनियर डॉक्टर इतनी संख्या में मरीजों को नहीं देख पाएंगे। ऐसे में मरीजों को ओपीडी में लंबी लाइन में लगना पड़ेगा।

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