हादसा / अचानक ड्राइवर चिल्लाया-ब्रेक फेल हो गया है, फिर तेज धमाका हुआ और हाेश आया ताे लाशें ही लाशें थीं



हिल भी न सके लोग, और जान चली गई...बस में बैठे लोगों को कुछ समझ में आता इससे पहले ही तेज धमाका हुआ और सरिया उनके पैरों को बेधते हुए पीछे बैठे लोगों के शरीर में जा घुसा। हिल भी न सके लोग, और जान चली गई...बस में बैठे लोगों को कुछ समझ में आता इससे पहले ही तेज धमाका हुआ और सरिया उनके पैरों को बेधते हुए पीछे बैठे लोगों के शरीर में जा घुसा।
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हिल भी न सके लोग, और जान चली गई...बस में बैठे लोगों को कुछ समझ में आता इससे पहले ही तेज धमाका हुआ और सरिया उनके पैरों को बेधते हुए पीछे बैठे लोगों के शरीर में जा घुसा।हिल भी न सके लोग, और जान चली गई...बस में बैठे लोगों को कुछ समझ में आता इससे पहले ही तेज धमाका हुआ और सरिया उनके पैरों को बेधते हुए पीछे बैठे लोगों के शरीर में जा घुसा।

  • गाड़ी चला रहे मनोज के चिल्लाने की आवाज सुन जागा पहला ड्राइवर संतन, देखा कि गाड़ी नहीं रुकेगी तो कूद गया

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2019, 12:04 PM IST

हजारीबाग(सुबोध/हरेंद्र). हजारीबाग सदर अस्पताल में भर्ती घायल मुन्ना विश्वकर्मा, कपिलदेव प्रसाद, कौशिक कुमार बस की बायीं ओर सीट नंबर 34, 35, 36 पर बैठे थे। उन्हाेंने बताया कि रात में रांची से बस चलने के बाद ईचाक के एक हाेटल में रुकी। वहां खाने के बाद बस का ड्राइवर बदल गया। पहले संतन विश्वकर्मा बस चला रहा था। ईचाक के बाद मनाेज पांडेय ड्राइविंग करने लगे। बस की स्पीड काफी थी। सभी यात्री नींद में थे। सुबह के करीब 3.30 बजे हाेंगे, अचानक ड्राइवर की केबिन से आवाज आने लगी, बस का ब्रेक फेल हाे गया है।

 

कई यात्री तड़प रहे थे
अंधेरे में हमलाेग कुछ समझ पाते कि तेज धमाका हुआ और धड़धड़ाते हुए काेई बड़ा सा चीज घुसता चला गया। वाे सरिया था, जाे हमारे दाेनाें पैराें काे बेधते हुए पीछे बैठे यात्रियाें के शरीर में घुस गया। हम हिल-डुल नहीं सकते थे। फिर बेहाेश हाे गए। हाेश आया ताे चीख-पुकार मची थी। बस में लाशें ही लाशें ही थी। खून बिखरा पड़ा था। कई यात्री तड़प रहे थे। पुलिस और स्थानीय लोग नहीं आते तो शायद हम जिंदा नहीं होते। बस के दूसरे ड्राइवर संतन विश्वकर्मा ने कहा कि मनाेज चिल्ला रहा था कि ब्रेक फेल हाे गया है। वह बार-बार पूछ रहा था कि बताओ क्या करें? लेकिन कुछ समझ में नहीं आ रहा था। बस गति में थी। जब मैंने देखा कि बस कंट्राेल नहीं हाेगी ताे छलांग लगा दी। फिर कुछ ही सेकेंड में बस ने आगे खड़े सरिया लदे ट्रेलर में टक्कर मार दी।

 

एक सीट पर बैठे थे गया निवासी पिता-पुत्र, दोनों की हुई मौत
गया के कोतवाली थाना क्षेत्र के किरण टॉकिज रोड निवासी उपेंद्र कुमार अपने 12 वर्षीय पुत्र आदित्य कुमार राज के साथ रांची से जा रहे थे। दोनों की मौत हो गई। उनका शरीर सरिया से छलनी हाे गया। गया के रहने वाले रामकृष्ण प्रसाद की पत्नी भारती देवी रांची से अकेली गया जा रही थीं। वे गंंभीर रूप से घायल हुई थीं। हजारीबाग सदर अस्पताल ले जाने के क्रम में उन्हाेंने दम तोड़ दिया। भारती का पूरा परिवार हरमू रांची में रहता है। उनके बेटे रामाशीष कुमार रामगढ़ काेर्ट में काम करते हैं।

 

सदर अस्पताल में दिनभर रही अफरातफरी
चौपारण थाना क्षेत्र के दनुआ-भनुआ घाटी में भीषण वाहन दुर्घटना की सूचना जिला प्रशासन को मिली, हजारीबाग सदर अस्पताल को अलर्ट कर दिया गया। आन कॉल रहे डाॅ. अभिषेक, डाॅ. तापस, डाॅ. सीपी चौधरी सहित सारे डाक्टर पहुंच गए। घायलों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ तो लोगों की भीड़ भी उमड़ने लगी। सभी घायलों की हालत गंभीर बनी हुई थी। उपायुक्त रविशंकर शुक्ला व एसपी मयूर पटेल ने अस्पताल की व्यवस्था का जायजा लिया, फिर सभी घायलों से उनकी स्थिति की जानकारी ली।

 

स्वेच्छा से 17 लोगों ने किया रक्तदान
घायलों की हालत नाजुक होती जा रही थी। यह देख काफी संख्या में लोग आगे आए और रक्तदान किया। सद्भावना समिति, रेड क्रॉस, सन राइज ग्रुप के 17 लोगों ने तत्काल खून दिया। रक्तदाताओं में निर्मल जैन, सत्यदेव अग्रवाल, इम्तेयाज अहमद, कैलाश प्रसाद मेहता, मनोज गोयल, आनन्द देव, इरफान अहमद काजू, अनूप कुमार, मुकेश कुमार, भरत कुमार, मंदीप यादव, शिव कुमार तुरी, संतोष कुमार, निकेश कुमार, अमीत कुमार, तारकेश्वर पांडेय और सत्यजीत कुमार ने रक्तदान घायलों के लिए किया।

 

ब्रेक फेल होने से हुई दुर्घटना : उपायुक्त
उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने कहा कि बस दुर्घटना में रोड का कोई लेना-देना नहीं है। यह घटना बस के ब्रेक फेल होने से घटी है। कहा कि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि चालक की डेथ हुई है। अब तक की संभावना में चालक एलाइव है। कहा कि रोड में गड़बड़ी के सुधार पर 20 दिन पहले से काम शुरू है। इस घटना के बाद से एनएचआई ने सोमवार से काम में तेजी लाया है। महीने के अंत तक रोड बिलकुल ठीक हो जाएगा। मृतक के शव भी उनके पैतृक गांव भिजवाए गए। घटना दुखद, हृदयविदारक है।

 

जिला प्रशासन ने निभाई बेहतर जिम्मेदारी
घटना के बाद से हजारीबाग जिला प्रशसन ने बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाई। सदर एसडीपीओ, थाना प्रभारी सहित दर्जन भर पुलिस अधिकारी शवों की पहचान कराने, उनका पोस्टमार्टम कराने और उनके शव को पैतृक गांव तक भिजवाने में लगे रहे, वहीं घायलों का माकूल इलाज हो इस पर भी पुलिस गंभीर रही। घटना स्थल पर जहां चोरदाहा चेकपोस्ट प्रभारी एएसआई दयानंद सरस्वती पुलिस बल के साथ घटना स्थल पहुंच गए। तत्काल थाना प्रभारी नितिन सिंह, अलाउद्दीन खान, सुबोध सिंह, बीडीओ अमित कुमार, सीओ नितिन गुप्ता तथा एसडीओ राजेश्वरनाथ पहुंचे हुए थे।

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