झारखंड / बजट सत्र का दूसरा दिन, विपक्ष के हंगामे के बीच पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण व श्वेत पत्र

बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने की मांग पर सदन के बाहर भाजपा विधायकों ने किया प्रदर्शन। बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने की मांग पर सदन के बाहर भाजपा विधायकों ने किया प्रदर्शन।
भाजपा विधायकों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही शुरू की गई। भाजपा विधायकों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही शुरू की गई।
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बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने की मांग पर सदन के बाहर भाजपा विधायकों ने किया प्रदर्शन।बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने की मांग पर सदन के बाहर भाजपा विधायकों ने किया प्रदर्शन।
भाजपा विधायकों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही शुरू की गई।भाजपा विधायकों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही शुरू की गई।

  • बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देने की मांग पर भाजपा विधायकों का हंगामा
  • विपक्ष के भारी हंगामे के बीच 1216.91 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पास

दैनिक भास्कर

Mar 02, 2020, 06:00 PM IST

रांची. पांचवीं झारखंड विधानसभा के पहले बजट सत्र में लगातार दूसरे दिन सोमवार को भी विपक्ष ने हंगामा और शाेरगुल किया। विपक्ष के भारी हंगामे के बीच बगैर चर्चा के 1216.91 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट बिना चर्चा के ही पास कर दिया गया। इसके साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, श्वेत पत्र व राज्य अल्पसंख्यक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन सदन में पेश किया गया। इसके बाद स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने सदन की कार्यवाही 3 मार्च दिन के 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

वेल में भी घुसे और जमकर नारेबाजी की

बाबूलाल मरांडी को प्रतिपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग काे लेकर पहले भाजपा विधायकों ने सदन के बाहर धरना दिया। इसके बाद सदन के अंदर खूब हंगामा किया। वे वेल में भी घुसे और जमकर नारेबाजी की। इस दाैरान सत्ता पक्ष के भी कुछ विधायक उनका विराेध करते हुए वेल तक पहुंच गए। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई तो स्पीकर ने करीब 75 मिनट तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद जब फिर से कार्यवाही शुरू हुई तो इसके साथ ही विपक्ष का हंगामा भी फिर चालू हो गया। हंगामे की वजह से प्रश्नकाल नहीं हो सका।

सदन पहले सत्र में मात्र 22 मिनट ही चल पाया

सदन की कार्यवाही दिन के 11.07 बजे शुरू होते ही भाजपा विधायक पोस्टर लेकर वेल में घुस गये और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच स्पीकर ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा कि काफी महत्वपूर्ण प्रश्न आने हैं। इसलिए सभी सदस्य अपनी सीट पर चले जायें। लेकिन विपक्ष नहीं माना और लोकतंत्र की हत्या बंद करो, प्रतिपक्ष के नेता को सीट देना होगा, आदिवासी विरोधी सरकार हाय-हाय और आदिवासी विरोधी सरकार होश में आओ जैसे नारे लगाए। कुल मिलाकर सदन पहले सत्र में मात्र 22 मिनट ही चल पाया।

विधानसभा सचिव के सामने रखी टेबुल को भी पीटना शुरू कर दिया

विपक्ष के विधायकाें ने हूटिंग भी की। उन्हाेंने जयश्री राम, भाजपा जिंदाबाद के नारे भी लगाए। स्पीकर ने कहा कि न्याय होगा पर इसके लिए दबाव देने पर काम नहीं होगा। एक प्रक्रिया के तहत ही सारा काम होता है। वह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसलिए सदस्य अपनी सीट पर जाकर बात रखें तो बेहतर होगा। लेकिन विपक्षी विधायक नहीं माने। हंगामा और नारा लगातार जारी रखा। इसके बाद विपक्षी सदस्याें ने विधानसभा सचिव के सामने रखी टेबुल को भी पीटना शुरू कर दिया। हंगामे की वजह से स्पीकर ने 11.17 बजे कार्यवाही 12.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सत्ता पक्ष के भी कई सदस्य वेल में आए

दूसरी बार 12.33 बजे कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा विधायकों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के बीच ही स्पीकर ने शून्यकाल शुरू कर दिया। कई विधायकों ने अपने सवाल भी उठाये लेकिन शोर की वजह से कुछ भी नहीं सुनाई पड़ रहा था था। इस दौरान भी विपक्ष वेल में ही रहकर हंगामा करता रहा। उनका विरोध करने के लिए सत्ता पक्ष के भी कई सदस्य वेल में आए। इसी बीच स्पीकर ने सुदेश महतो को आजसू विधायक दल का नेता के रूप में मान्यता दिए जाने की घोषणा की। 12.46 बजे सदन की कार्यवाही दूसरी पाली के दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।


कटौती प्रस्ताव पर विचार नहीं रख सके सरयू राय, अनुपूरक पर चर्चा भी नहीं हुई
इधर, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच बगैर चर्चा के 1216.91 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश पास कर दिया गया। भोजनावकाश के बाद जैसे ही तृतीय अनुपूरक पर चर्चा के लिए सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्य बाबूलाल मरांडी को प्रतिपक्ष का नेता घोषित करने की मांग को लेकर बेल में आ गए। जमकर नारेबाजी करने लगे। कुछ बेल में बैठ गए तो कुछ सो गए। इसी क्रम में स्पीकर ने तृतीय अनुपूरक बजट पर पेश किए गए कटौती प्रस्ताव पर सरयू राय से अपनी बात रखने का आग्रह किया। सरयू राय ने यह कहते हुए अपनी बात रखने से मना कर दिया कि पहले सदन को व्यवस्थित किया जाए। लेकिन सदन न तो व्यवस्थित हुआ और विपक्ष के हंगामे के बीच ही तृतीय अनुपूरक ध्वनि मत से पारित हो गया।

सदन की कार्यवाही 3 मार्च दिन के 11 बजे तक के लिए स्थगित कर

हंगामे के बीच ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी बात रखने की कोशिश की। लेकिन उनके द्वारा विपक्षी सदस्यों के विरोध को असंवैधानिक बताए जाने के साथ ही विपक्ष की नारेबाजी और हंगामा और बढ़ गया। बीच-बीच में संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम भी कुछ बोलने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात सुनी नहीं जा सकी। स्पीकर रवींद्र नाथ महतो बार-बार विपक्षी सदस्यों से यह कहते रहे कि आपका काम हो रहा है। लेकिन स्पीकर की बात को विपक्ष गंभीरता से लेने के ही मूड में नहीं था। अंतत: स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 3 मार्च दिन के 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

तृतीय अनुपूरक में कुछ प्रमुख विभागों को मिली राशि
गृह विभाग का गृह प्रभाग - 141 कराेड़
उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग- 131 कराेड़
स्कूली शिक्षा अाैर साक्षरता -21 कराेड़
कृषि विभाग - 85 कराेड़
राजस्व निबंधन अाैर भूमि सुधार-27 कराेड़
वन पर्यावरण -21 कराेड़
वित्त विभाग पेंशन मद - 50 कराेड़

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