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दर्शन देख जीवां गुर तेरा, पूरण करम होये प्रभ मेरा...

गुरु नानक सत्संग सभा की ओर से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश गुरुपर्व मनाया गया। कृष्णा नगर कॉलोनी...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 03:41 AM IST
गुरु नानक सत्संग सभा की ओर से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश गुरुपर्व मनाया गया। कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा में विशेष दीवान सजा। दीवान की शुरुआत स्त्री सत्संग सभा की गीता कटारिया और शीतल मुंजाल द्वारा आसा दी वार कीर्तन से हुई। उसके बाद उन्होंने दर्शन देख जीवां गुर तेरा, पूरण करम होये प्रभ मेरा... और गुरु ग्रंथ जी मानयो प्रगट गुरां की देह...शबद गायन कर संगत को गुरवाणी से जोड़ा। गुरुद्वारा के मुख्यग्रंथी ज्ञानी जीवेंदर सिंह ने संगत को बताया कि श्री गुरुग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश 1604 में हरमंदिर साहिब अमृतसर में हुआ था, जिसका संपादन पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव ने किया था और बाबा बुढा जी को पहला ग्रंथी बनाया गया था। गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी में मुल्तानी, हिंदी, पंजाबी, सिंधी, मराठी, गुजराती, व्रज, अरबी और फारसी भाषाओं का समावेश है। ग्रंथ की महत्ता का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब ज्ञान और विज्ञान का अथाह सागर है। इसमें इंसान के विचरने से लेकर मोक्ष की प्राप्ति तक के सफर का संदेश समाहित है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब और सिख धर्म के सिद्धांत समूची मानवता के लिए मार्गदर्शन करते हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब से न केवल हमें जीने का मार्गदर्शन होता है बल्कि नैतिकता की भी जानकारी मिलती है।