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सम्मान / श्याम बेसरा को संथाली भाषा के पहले उपन्यास ‘माड़ोम’ के लिए मिलेगा साहित्य अकादमी पुरस्कार



Shyam Besora gets Sahitya Academy award
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Shyam Besora gets Sahitya Academy award

  • देश के 24 लेखकों को वर्ष 2018 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया
  • अबतक सौ से भी अधिक कविता, कहानियां एवं लेख हिंदी एवं संथाली में लिख चुके

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2018, 07:14 AM IST

कुंदन कुमार चौधरी (रांची). देश के 24 लेखकों को वर्ष 2018 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। गोड्‌डा के तांबाजोड़ निवासी संथाली के प्रसिद्ध कथाकार, गीतकार व उपन्यासकार श्याम बेसरा ‘जिवीरारेच’ को उनके उपन्यास ‘माड़ोम’ के लिए यह पुरस्कार मिलेगा।

 

‘माड़ोम’ का मतलब है मचान। यह उपन्यास संथाल परगना की पृष्ठभूमि पर आदिवासी जीवन और संस्कृति पर आधारित है। नई दिल्ली में 29 जनवरी को एक समारोह में हर विजेता को एक लाख रु., प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न दिया जाएगा। श्याम बेसरा आसनसोल में रेलवे के चीफ टिकट इंस्पेक्टर हैं।

 

श्याम बेसरा कहते हैं -जब सातवीं में पढ़ता था, उसी समय से कहानियां और संथाली गीत लिखने लगा। रेलवे में नौकरी करते हुए भी अपनी लेखनी के बल पर आदिवासियों की सच्ची और प्रामाणिक तस्वीर प्रस्तुत करने की कोशिश की। अबतक सौ से भी अधिक कविता, कहानियां एवं लेख हिंदी एवं संथाली में लिखे हैं। कई रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हो चुकी हैं। छह किताबें प्रकाशित हुई हैं, जिसमें कहानी संग्रह और गीत की किताबें हैं। ‘माड़ोम’ पहला उपन्यास था, जिस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। वर्षों तक मैंने ‘एभेन आड़ांग’ प्रथम संथाली मासिक कविता पत्र का संपादन किया। 

 

सिदो-कान्हू, आरयू के कोर्स में किताबें-कहानियां शामिल

श्याम बेसरा की दो किताबें ‘दुलाड़ खातिर’ और  ‘दामिन रेयाक जुडासी काहनी को’ सिदो-कान्हू विश्वविद्यालय के संथाली पाठ्यक्रम में शामिल हैं। रांची यूनिवर्सिटी में भी उनकी कहानी पढ़ाई जाती है। उन्हें 1992 में डॉ. अांबेडकर फेलोशिप सम्मान और 1997 में भारतीय दलित साहित्यकार अकादमी नई दिल्ली द्वारा सम्मानित किया गया है। ऑल इंडिया संथाली फिल्म एसोसिएशन, दुमका, ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन बिशाखापत्तनम में भी सम्मान मिल चुका है।

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