मानसिक समस्याओं को समझने के लिए सोशल साइंटिस्ट की है जरूरत: प्रो. दिनेश

Ranchi News - समाज में बढ़ रहे मानसिक समस्याओं और क्लेश के कारण को समझने के लिए सोशल साइंटिस्ट की आवश्यकता है। चिकित्सकों और...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:11 AM IST
Kanke News - social scientist needs to understand mental problems prof dinesh
समाज में बढ़ रहे मानसिक समस्याओं और क्लेश के कारण को समझने के लिए सोशल साइंटिस्ट की आवश्यकता है। चिकित्सकों और अस्पतालों की व्यवस्था मात्र से इसका समाधान नहीं हो सकता है। यह बात रिम्स निदेशक प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने कही। वे शुक्रवार को मनचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) के 102वां स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में मानसिक स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके ठीक नहीं होने पर हमें सुख और दुःख की अनुभूति ही नहीं होगी। कहा कि यह चिंता का विषय है कि दिन-प्रतिदिन मानसिक स्वास्थ्य संबंधी तेजी से बढ़ रही हैं। सीरियल, डिजिटल लत को भी इसका एक कारण बताया। कहा कि इसपर विचार करने की आवश्यकता है कि क्या हमारे जीवनशैली में बदलाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बताया कि भूटान जैसा देश खुशी के सूचकांक में पूरे विश्व में अव्वल स्थान पर है। इसका एकमात्र कारण है कि उन्होंने अपनी परंपरा को सहेज के रखा है। झारखंड के निशक्तता आयुक्त सतीशचंद्र ने कहा कि मानसिक निशक्तों को सामाजिक स्वीकार्यता देने पर ही समग्र समाज का विकास संभव है। कहा कि मेंटल रिटार्डेशन, सेरेब्रल पाल्सी और मनोरोग निशक्तता के अंग हैं।

सीआईपी निदेशक डाॅ. डी राम ने कहा कि देश में मार्डन साइकियाट्री की शुरुआत यहीं से हुई। कहा कि देश में बढ़ती हुई मानसिक समस्या एवं मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स की कमी बड़ी चुनौती है। उन्होंने 70 फीसदी ट्रीटमेंट गैप को चिंताजनक बताया। मौके पर मुख्य अतिथि ने सीआईपी बुलेटिन और अल्युमनी न्यूजलेटर का विमोचन किया। साथ ही सीआईपी डिजिटल एकेडमी और आईएसपीएसडब्लयू के वेबसाइट को लांच किया। धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. संजय कुमार मुंडा ने किया।

टल हेल्थ विषय हुआ सीएमई: इस मौके पर डिसएबिलिटी सर्टिफिकेशन इन मेंटल हेल्थ विषय पर एक सीएमई का आयोजन किया गया। वक्ता सीआईपी के प्रो. बी दास ने फिटनेस सर्टिफिकेशन के संबंध में मनोचिकित्सकों की भूमिका की जानकारी दी। कहा कि प्रमाण पत्र की मांग होने पर कम से कम 10 दिनों तक व्यक्ति को आब्जर्वेशन में रखें। साइकोमेट्री टेस्ट के बाद गठित मेडिकल बोर्ड के सदस्यों के साथ मिलकर ही निर्णय लें। उनके अलावा प्रो. ओपी सिंह, डब्ल्यूबीएमईएस कोलकाता, डाॅ. मशरुर जहां, रिनपास और एस कार्तिकेयन, एनआईइपीएमडी, चेन्नई ने भी विस्तार से अन्य पहलुओं पर जानकारी दी।

सीआईपी बुलेटिन का विमोचन करते मुख्य अतिथि एवं अन्य।

ये किए गए पुरस्कृत

संस्थान के बेस्ट वर्कर्स को इस मौके पर पुरस्कृत किया गया। बेस्ट नर्सिंग स्टाफ का पुरस्कार नीलम प्रोमिला कुजूर को दिया गया। बेस्ट एसआर डाॅ. सुप्रियो मंडल, जेआर डाॅ. चंद्रमौली राय, स्टूडेंट रोजिना आरुल, पीउन सुखराम, वार्ड अटेंडेंट मेल सुनील कुमार राम, वार्ड अटेंडेंट फिमेल पुनम कुमारी, मजदूर सज्जाद अंसारी, ओटी स्टाॅफ मो. असीउल्लाह, सफाईवाला बसिल बारला, सफाईवाली बिरन उरांव, माली मंजूर अली, बेस्ट मेंटेंनड वार्ड का पुरस्कार क्रेपलीन वार्ड को दिया।

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