गीत-संगीत की सुबह-शाम 5 माह से बंद, शहर के कलाकारों मंे रोष

Ranchi News - कला-संस्कृति व्यक्ति को जिम्मेदार और सभ्य नागरिक बनाती है। इन दोनों कार्यक्रम का बंद होना सही नहीं है। कलाकारों...

Bhaskar News Network

Aug 20, 2019, 10:00 AM IST
Ranchi News - song and music closed for 5 months in the morning fury among artists of the city
कला-संस्कृति व्यक्ति को जिम्मेदार और सभ्य नागरिक बनाती है। इन दोनों कार्यक्रम का बंद होना सही नहीं है। कलाकारों को उचित मानदेय भी नहीं मिलता था। फंड की कमी से संभव है बंद किया गया हो। सरकार को जल्द आरंभ करना चाहिए।

-अजय मलकानी, वरिष्ठ रंगकर्मी


कल्चरल रिपोर्टर | रांची

पांच साल से झारखंड के हर जिला मुख्यालय की सुबह शास्त्रीय संगीत के सुर-ताल से शुरू होती थी, तो छह वर्ष से हर शाम गीत-संगीत और नृत्य के साथ सुरमई हुआ करती थी। लेकिन करीब पांच माह से ऐसी महफिलें सजनी बंद हो गई हैं। बात कला-संस्कृति विभाग के सप्ताहिक सांस्कृतिक आयोजन सुबह-सवेरे और सनि परब की है। प्रत्येक शनिवार को सुबह-सवेरे सनि परब शाम में आयोजित होता था। शुरुआत रांची से हुई थी, लेकिन बाद में सरकार ने इसे हर जिला मुख्यालय में करने का निर्णय लिया। रांची में गांधी प्रतिमा के पास बापू के भजन से भोर होती थी, उसके बाद शास्त्रीय संगत का आनंद मॉर्निंग वाक करने वाले उठाया करते थे।

वहीं रांची के ऑड्रे हाउस में गीत-संगीत, नृत्य और नाटक का लुत्फ कामकाजी लोग वीकेंड पर लेना नहीं छोड़ते थे। इसमें स्थानीय फनकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता था। विभाग से मिले पारिश्रमिक उनकी आय थी। पर, लोकसभा चुनाव के समय आचार संहिता के बहाने विभाग ने इसे मार्च-अप्रैल में बंद करा दिया। इसका प्रभाव सूबे के हजारों कलाकारों पर पड़ा। केके बोस, अनिल सिकदर, दीपक लोहार, संजय लाल, अमरनाथ, चंद्रदेव सिंह, ऋषिकेश, विनोद जायसवाल, राजीव थेपड़ा, सूरज खन्ना, रीना सहाय, जय दीप, मो. निजाम और एस मृदुला आदि कलाकारों ने सरकार से जल्द दोनों प्रोग्राम शुरू करने की मांग की है।

क्या कहते हैं कलाकार

संस्कृति बनाती है जिम्मेदार

आर्टिस्ट को आर्थिक संकट

झारखंड के कलाकारों को कई सालों से विभाग से कोई काम नहीं मिल रहा है। जिस वजह से वो लगातार आर्थिक संकट में हैं। सुबह-सवेरे और सनि परब के होने से सप्ताह में जो अवसर उन्हें मिलते थे। अब वो भी महीनों से बंद है।

-मोनिता शर्मा, कलाकार

युवाओं को मिलता था बेहतर अवसर

राज्य के युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता था। इससे नई प्रतिभाएं सामने आती थीं। अब वो मंच भी उपलब्ध नहीं है। संस्कृति मंत्रालय, झारखंड सरकार को अपनी सोच को विस्तार देने की जरूरत है। इससे हम कलाकारों का मान बढ़ेगा।-शंकर पाठक, युवा नाटककार

संबंधित विभाग गंभीर नहीं

कला और कलाकारों को लेकर विभाग गंभीर नहीं है। महीनों से दोनों कार्यक्रम बंद हैं। वही इसके शुरू होने में छह माह और लगेंगे। इस तरह साल भर राज्य के कलाकार मानदेय से वंचित रहेंगे। इस विश्व संगीत दिवस पर भी कोई कार्यक्रम विभाग ने नहीं किया। -मृणालिनी अखौरी, गजल सिंगर

नए कलेवर में पेश करेंगे

कार्यक्रम का स्तर गिर रहा था। उसे नए कलेवर में प्रस्तुत करने की कार्य योजना बन रही है। जल्द ही नए परिवेश में आगाज होगा। साथ ही कलाकारों के ग्रेजुएशन पर भी काम चल रहा है। सितंबर महीने में यह पूरा हो जाएगा। कलाकारों का मानदेय भी बढ़ाया जाएगा। --दीपक शाही, निदेशक

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