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रांची. हरमू रोड के मारवाड़ी भवन में रविवार की रात हास्य-व्यंग्य कवियों की महफिल जमी। देशभर के नामचीन कवि अशोक चक्रधर, सुनील जोगी, गौरव चौहान, हेमंत पांडेय और अंकिता सिंह ने अपने होलियाना से फिजा में रंग घोल दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज बजाज, विनोद जैन, सुरेश चंद्र अग्रवाल, अशोक नारसरिया, अनिल अग्रवाल, ललित पोद्दार, पवन शर्मा, पुनीत पोद्दार, पुनीत अग्रवाल, अनुप अग्रवाल का योगदान रहा।
अशाेक चक्रधर
पार्क के कोने में
घास के बिछौने पर लेटे-लेटे
हम अपनी प्रेयसी से पूछ बैठे-
क्यों डियर!
डैमोक्रैसी क्या होती है?
वो बोली-
तुम्हारे वादों जैसी होती है!
इंतज़ार में बहुत तड़पाती है,
झूठ बोलती है
सताती है,
तुम तो आ भी जाते हो,
ये कभी नहीं आती है !
सुनील जोगी
सब लोग हैं उमंग में, डूबे हैं भंग में,
सारा मलाल घोल दें, होली के रंग में।
नीला, गुलाबी, लाल-सा पानी का रंग है, हर उम्र के इंसा पे जवानी का रंग है, फागों की ताल ढोल दें
होली के रंग में....
तमाम उम्र मुहब्बत की चाशनी में रहा, पुराने इश्क के जैसी कहीं मिठास नहीं..
इटावा से आए गौरव चौहान
हृदय की धड़कनों में देश का सम्मान ही होगा
सदा मस्तक पटल पर ये उच्च अभिमान ही होगा
हमारी सांस की स्याही की अंतिम बूंद से यारो
लिखा जो शब्द जाएगा, वो हिंदुस्तान ही होगा।
अंकिता सिंह
नदी खारे समंदर के लिए जज्बात से तर हैं, समंदर को पता है ये नदी का वो मुकद्दर है।
वफा और बेवफाई की मिसालें हैं यही दोनों, समंदर की कई नदियां, नदी का इक समंदर है..।
हेमंत पांडेय
प्यार से प्रेमिका गर मान जाती है तो शरमा के आंख फिर मूंद जाना तुम,
होली में गाल यदि रंगने न दे, तो पऊआ पीके घर में कूद जाना तुम,
फिर सोचेगी प्रेमिका निहाल कर दिया, होली में गाल लाल लाल कर दिया।
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