झारखंड विधानसभा / सोहराय भवन पर बोले हेमंत सोरेन, एसआईटी जांच रिपोर्ट सदन में रखे सरकार, गलत हुआ तो खुद बुलडोजर चलवा दूंगा

सदन की कार्रवाही में बैठे नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन। सदन की कार्रवाही में बैठे नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन।
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सदन की कार्रवाही में बैठे नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन।सदन की कार्रवाही में बैठे नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन।

दैनिक भास्कर

Jul 23, 2019, 07:25 PM IST

रांची.  विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत हंगामेदार रही। नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री घूस लेते हैं। सत्ता पक्ष के विधायक अफसरों को पीटते हैं। अगर विपक्ष के लोग ऐसा करें तो सदस्यता चली जाती है, जबकि ये लोग मंत्री बने रहते हैं। स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के 15 हजार रुपए कमीशन मांगने का वीडियो वायरल हुआ है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। भाजपा विधायक ने अधिकारी को पीटा पर उनके खिलाफ भी कुछ नहीं हुआ। इन मसलों पर सदन के नेता को जवाब देना चाहिए।

 

झामुमो नेता स्टीफन मरांडी ने कहा कि किसी भी मंत्री पर आरोप लगे, तो इससे पूरे मंत्रिमंडल और झारखंड की बदनामी होती है। सत्ता पक्ष के विधायकों ने झामुमो के इन आरोपों का विरोध किया। भाजपा के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जब तक प्रमाण न हो, सदन के अंदर आरोप नहीं लगा सकते। मंत्री से वक्तव्य नहीं मांग सकते। किशोर ने हेमंत सोरेन को कहा कि आप पर भी एसटी जमीन हड़पने का आरोप है। आपको भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। प्रतिवाद करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि मेरे खिलाफ एसआईटी गठित की गई थी। बाद में उसे भंग भी कर दिया गया। सोहराई भवन की ओर संकेत करते हुए हेमंत ने कहा कि एसआईटी ने जो रिपोर्ट दी है, उसे सदन में सरकार रखे। अगर मेरे खिलाफ कुछ भी गलत साबित हुआ तो खुद बुलडोजर चलवा दूंगा। पर, अपने मंत्री और विधायकों के बारे में मुख्यमंत्री को भी सदन में वक्तव्य देना चाहिए।

 

आरोप प्रमाणित हो गया तो त्यागपत्र दे दूंगा: स्वस्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि उन पर 15 हजार कमीशन लेने का जो आरोप लगाया जा रहा है, अगर वह प्रमाणित हो गया तो वे अपने पद से त्यागपत्र दे देंगे। विपक्ष के नेता ने जो बात उठाई है, वह अशोभनीय है। मंत्री ने कहा कि वे एक गांव में एक करोड़ की योजना का शिलान्यास करने गए थे। गांव के लोगों ने कहा कि वे चंदा कर एक चबूतरा बना रहे हैं, जिसमें करीब 50 हजार रुपए खर्च होंगे। इस पर उन्होंने अपने बॉडी गार्ड से 15 हजार रुपए लेकर गांव वालों को दे दिया और कहा कि जब उनके पास पैसे हो जाएं तो वे 35 हजार रख लेंगे ओर 15 हजार उन्हें दे देंगे। बाकी मामले को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। चंद्रवंशी ने कटाक्ष किया कि उन्होंने तो गांव वालों की मदद की, झारखंड को दिल्ली में नहीं बेचा। इस दौरान हंगामा करते हुए झामुमो के विधायक वेल में आ गए। वे इस विषय में मुख्यमंत्री से वक्तव्य देने की मांग कर रहे थे।

 

जनता विकास के साथ, विस चुनाव में 70 से ज्यादा सीटों पार करेंगे : नीलकंठ सिंह मुंडा
वहीं, विपक्ष के बहिष्कार के बीच मंगलवार को 3908.68 करोड़ का प्रथम अनुपूरक बजट सदन से ध्वनि मत के साथ पास हो गया। इससे पूर्व झामुमो विधायक रवींद्र नाथ महतो द्वारा पेश कटौती प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि विपक्ष केवल विरोध की राजनीति करना जानता है। सीधी-सादी जनता को बरगलाने का काम कर रहा है। पर जनता विकास के साथ चलना जानती है। सरकार ने जो काम किया, उसका परिणाम लोकसभा चुनाव में सामने भी आया।

 

उन्होंने कहा- तीन महीने बाद विधानसभा चुनाव में हम 65 नहीं 70 सीटें पार करेंगे। क्योंकि हमने गरीबी-अमीरी के बीच की खाई की मिटाने का काम किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना हो, उज्ज्वला योजना हो, पारा शिक्षकों का मुद्दा हो या फिर कोई अन्य विकासोन्मुख योजनाएं। सड़क निर्माण के क्षेत्र में भी सरकार ने अप्रत्याशित उपलब्धि हासिल की है। इस वित्तीय वर्ष 1653 किलोमीटर सड़कों का सुदृढ़ीकरण और मजबूतीकरण किया जा रहा है। कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों द्वारा लगाये गये आरोपों को भी उन्होंने सिरे से खारिज किया। मुंडा ने कहा कि सुझाव देने के बदले विपक्ष ने केवल राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की।

 

झारखंड गठन का उद्देश्य विखर रहा : स्टीफन मरांडी
कटौती प्रस्ताव पेश करते हुए रवींद्र नाथ महतो ने आरोप लगाया कि पेंशन योजना, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना का अपेक्षित लाभ गरीबों को नहीं मिल रहा है। सुखाड़ को सभी स्वीकार कर रहे हैं पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो रही है। िशक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति काफी खराब है। अनुपूरक बजट में ली जा रही राशि का उपयोग केवल वोट बैंक के लिए किया जायेगा। झामुमो के ही स्टीफन मरांडी ने भी आरोप लगाया कि जेसीएफ से वेतन मद में इतनी बड़ी निकासी से सरकार के मूल बजट पर सवाल खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि जनादेश का सदुपयोग नहीं, दुरुपयोग हुआ है। सीएनटी-एसपीटी, भूमि सुधार सहित अन्य सभी कानूनों की मूल आत्मा को मार दिया गया है। इससे झारखंड अलग राज्य के गठन का उद्देश्य बिखर गया है। संथालपरगना में दान पत्र की जमीन पर पीएम आवास बनने लगे हैं। सवाल है कि दान पत्र पर किसको जमीन, बिहार या छत्तीसगढ़ के लोगों को। हर साल सदन में सुखाड़ पर चर्चा होती है लेकिन लंबे समय तक सरकार में रहने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं ढूंढा जा सका। चर्चा में भाग लेते हुए आलमगीर आलम, सुखदेव भगत और राजकुमार यादव ने भी सरकार की योजनाओं के हस्र की चर्चा की।

 

विकास बोल रहा है, दिख रहा है : सत्ता पक्ष
कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार बजट में ली जानेवाली राशि का सदुपयोग कर रही है। 2017-18 में बजट का 100 फीसदी, 2018-19 में 82.21 फीसदी राशि खर्च हुई। सरकार ने केवल बजट नहीं बनाया, उसे खर्च भी किया। इसका लाभ भी दिख रहा है। 2011-12 जहां प्रति व्यक्ति अाय 45318 रुपये थे आज यह बढ़ कर 76806 रुपये हो गये हैं। पांच साल में खाद्यान्न उत्पादन 57.5 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 70.70 लाख मीट्रिक टन हो गया। दूध उत्पादन 17.34 लाख मीट्रिक टन से 20 लाख मीट्रिक टन हो गया। हर क्षेत्र में विकास दिख रहा है। उन्होंने चुटकी भी ली। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को कोट करते हुए कहा कि डॉ अजय कुमार ने पार्टी कार्यकर्ता को भाजपा से संस्कार सीखने की सलाह दी। झाविमो तो अब पोस्टकार्ड और लिफाफा बन गया है जिस पर कोई एड्रेस ही नहीं है। हालांकि अनुपूरक बजट के औचित्य को सत्ता पक्ष की ओर से अनंत ओझा, शिवशंकर उरांव, राम कुमार पाहन और मनीष जायसवाल ने सही ठहराया।

 

जल संसाधन व कृषि मंत्री की अनुपस्थिति पर स्पीकर नाराज हुए
अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान विधायक सुखाड़, पेजयल व सिंचाई संबंधी विषयों पर अपनी बात रख रहे थे। राज्य के हालात बता रहे थे। लेकिन उस समय सदन में न तो कृषि मंत्री थे और न ही जल संसाधन व पेयजल मंत्री। स्पीकर ने कहा कि दोनों मंत्रियों को थोड़ा तो संवेदनशील होना चाहिए। खुद सोचना चाहिए। हालांकि कुछ ही देर में कृषि मंत्री सदन में अा गये पर जल संसाधन मंत्री गायब ही रहे।

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