बयान / आदिवासी ही आदिवासी की जमीन खरीद नहीं सकता पर गैर आदिवासी खरीद सकता है, यह कैसा न्याय: हेमंत सोरेन

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  • केंद्रीय सरना समिति सहित अन्य आदिवासी संगठनों की शोभायात्रा में शामिल हुए हेमंत, बंधु एवं अरूण उरांव

दैनिक भास्कर

Aug 09, 2019, 07:53 PM IST

रांची. झारखंड के लोगों को समझना होगा। राज्य का एक आदिवासी दूसरे आदिवासी की जमीन नहीं खरीद सकता है। जबकि गैर आदिवासी जमीन खरीद सकते है। यह कैसा न्याय है? यह बातें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही। वे शुक्रवार को समस्त आदिवासी संगठनों के द्वारा हुई विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में बोल रहे थे।

 

उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसा कानून बनाया जाता है कि आदिवासी ही जमीन लेने से महरूम हो जाते हैं। आदिवासी दिवस के दिन यह संकल्प लेने की जरूरत है। ताकि हम सही और गलत चीजों को समझ सके और पहचाने। बिना संघर्ष के भी अपना हक-अधिकार नहीं मिल सकता है। तब तक राज्य में आदिवासियों को उनका हक नहीं मिल जाता है। तब तक राज्य का सपना पूरा नहीं होगा।

 

हेमंत सोरेन ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में विश्व आदिवासी दिवस में छुट्टी दी जाती है। परंतु दुर्भाग्य की बात है कि आदिवासी बहुल राज्य होने के बाद भी यहां छुट्टी तक नहीं दी गई। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं झाविमो केंद्रीय महासचिव बंधु तिर्की, कांग्रेस नेता डाॅ. अरूण उरांव, केंद्रीय सरना समिति अध्यक्ष अजय तिर्की, महासचिव संतोष तिर्की सहित कई ने अपने विचार रखें।

 

इससे पूर्व एक शोभायात्रा केंद्रीय सरना समिति के बैनर तले सैनिक मार्केट से जुलूस निकाला गया जो मेन रोड, कचहरी रोड होते हुए दीक्षांत मंडप मोरहाबादी पहुंचा जहां पर सभा हुई। जुलस में प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन सहित कई शामिल हुए। कार्यक्रम में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, आदिवासी छात्र संघ, आदिवासी युवा मोर्चा, बारह पड़हा दुबलिया, बारहा पड़हा, राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा, अमर शहीद वीर बुधु भगत टुंडी के प्रतिनिधि शामिल हुए।

 

कार्यक्रम के माध्यम से कई मांगे सरकार के समक्ष रखी गई

  • विश्व आदिवासी दिवस पर अन्य राज्य की तरह सरकारी अवकाश घोषित हो।
  • सरना धर्म कोड लागू हो।
  • अनुच्छेद 19, 5 के तहत बहारी लोगों के प्रवेश एवं निवास पर रोक लगे।
  • आदिवासियों की जमीन के लिए थाना क्षेत्र की बाध्यता समाप्त हो।
  • क्षतिग्रस्त खतियान के कारण जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है, दूसरी प्रति कोषागार से संकलित किया जाए।
  • आदिवासियों के उनके भूूमि पर दखल दहानी सुनिश्चित हो।
  • पेसा कानून को सख्ती से लागू किया जाए।
  • लैंड बैंक को समाप्त किया जाए।
  • भूमि अधिग्रहण में सोशल इंपैक्ट को हु-ब हु लागू किया जाए।

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