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कार्यशाला / राजनेताओं ने माना, वन अधिकार कानून का पालन होने पर सशक्त होंगे आदिवासी



वन अधिकार कानून के अनुपालन में राजनीतिक दलों की भूमिका पर आयोजित कार्यशाला वन अधिकार कानून के अनुपालन में राजनीतिक दलों की भूमिका पर आयोजित कार्यशाला
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वन अधिकार कानून के अनुपालन में राजनीतिक दलों की भूमिका पर आयोजित कार्यशालावन अधिकार कानून के अनुपालन में राजनीतिक दलों की भूमिका पर आयोजित कार्यशाला

वन अधिकार कानून के अनुपालन में राजनीतिक दलों की भूमिका पर कार्यशाला

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 06:34 AM IST

रांची. राज्य के अधिकतर राजनीतिक दलों के नेताओं का मानना है कि वन अधिकार कानून का पालन होने पर आदिवासी और जंगल पर निर्भर रहनेवाले लोग सशक्त हाेंगे। झारखंड वन अधिकार मंच के तत्वावधान में मंगलवार को प्रेस क्लब में वन अधिकार कानून के अनुपालन में राजनीतिक दलों की भूमिका पर आयोजित कार्यशाला में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस, आजसू, राजद, सीपीएम, भाकपा माले, आप आदि पार्टियों के नेताओं ने कहा कि आदिवासियों और कमजोर तबके के लोगों के सशक्तीकरण के लिए वनाधिकार कानून का हर हाल में पालन किया जाना जरूरी है।

 

आयोजकों ने बताया कि राज्य के 14750 गांव की कुल 18.5 लाख हेक्टेयर वन भूमि पर आदिवासियों और गैर आदिवासियों का अधिकार वन कानून के तहत बनता है। 12 साल बाद भी राज्य में वन अधिकार कानून के अनुपालन की स्थिति बेहतर नहीं है। लगभग सभी राजनीतिक दलों ने माना कि इस कानून के सतत अनुश्रवण के लिए जरूरी है कि वन अधिकार अथॉरिटी बने और इसके लिए एक स्वतंत्र लोकपाल हो।

 

यह अथॉरिटी वन अधिकार कानून के अनुपालन का लगातार मूल्यांकन करे तथा राज्य सरकार पर दबाव बनाए रखे। पार्टी प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि उनकी पार्टी आदिवासियों और कमजोर लोगों को इस कानून के माध्यम से दिए जानेवाले अधिकार की वकालत करेंगे। कांग्रेस के जेपी गुप्ता और सुंदरी तिर्की ने कहा कि वनाधिकार कानून के बेहतर अनुपालन के लिए पार्टी हमेशा सजग है। उन्होंने सिविल सोसाइटी को इस मामले में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।

 

कार्यक्रम के प्रारंभ में संजय बसु मल्लिक ने वन अधिकार कानून के महत्व पर प्रकाश डाला। जॉर्ज मोनीपल्ली ने वन अधिकार कानून के अनुपालन में बाधक तत्वों की चर्चा की। सुधीर पाल ने राजनीतिक दलों की भूमिका एवं उनसे सिविल सोसाइटी की अपेक्षा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वनाधिकार मंच के विभिन्न जिलों के सहयोगी, संयोजक मंडली की सदस्य सुनीता, बनारसी सिंह,  कामिनी, स्निग्ध अग्रवाल आदि थे। 

 

जंगल का सवाल हमेशा सर्वोपरि : झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के बगैर झारखंड की कल्पना नहीं की जा सकती है। आश्चर्य है कि इस कानून के लागू होने के बाद भी आदिवासियों को वन विभाग परेशान कर रहा है। जेएमएम के लिए जंगल का सवाल हमेशा से सर्वोपरि रहा है।

 

वनक्षेत्र के लोगों के अधिकार के प्रति प्रतिबद्ध :  भाजपा विधायक गंगोत्री कुजूर ने कहा कि कार्यशाला की अनुशंसाओं के आलोक में वह सरकार से बात करेंगी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि वनक्षेत्र में रहनेवाले लोगों के अधिकार के प्रति भाजपा प्रतिबद्ध है। सीएम रघुवर दास ने वनाधिकार कानून को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।  

 

समग्रता में आंदोलन छेड़ने की जरूरत : राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व अध्यक्ष गौतम सागर राणा और प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जमीन और जंगल के सवाल पर सजग रहने की जरूरत है। कॉरपोरेट और सरकार के गठजोड़ का आरोप लगाते हुए राणा ने कहा कि वनाधिकार कानून के साथ अन्य कानून को लेकर समग्रता में आंदोलन छेड़ने की जरूरत है।

 

इस कानून को लागू करने में रहे अगली कतार में : सीपीएम के राज्य सचिव जेडी बक्सी ने कहा कि माकपा इस कानून को लाने में सबसे अगली कतार में रही है। आजसू के जयंतो घोष ने ग्रामसभा को जागरूक करने और वन लोकपाल को इस कानून के लिए जरूरी बताया। आम आदमी पार्टी के राजन ने सरकार की इच्छा शक्ति को इस कानून के अनुपालन में सबसे बड़ा बाधक माना।

 

 

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