रांची / दो मेयर कठघरे में, कौन करेगा कार्रवाई तय नहीं



Two Mayor in the Courthouse
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Two Mayor in the Courthouse

  • नगर विकास विभाग और राज्य चुनाव आयोग के एक्ट व नियमावली से उलझन
  • कोडरमा नगर पंचायत अध्यक्ष आदित्यपुर व चास मेयर पर गलत शपथ पत्र देने का आरोप

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 06:34 AM IST

रांची (जीतेंद्र कुमार). नगर निकायों के जनप्रतिनिधि को अयोग्य करार देने के लिए नगर विकास विभाग और राज्य चुनाव आयोग में कई शिकायतें हैं। पर ऐसी शिकायतों का सात वर्षों से निबटारा नहीं हो रहा है। क्योंकि यह तय नहीं है कि कार्रवाई कौन करेगा, विभाग या आयोग। एक्ट और नियमावली में प्रावधानों से मामला उलझा है। चास मेयर भोलू पासवान पर गलत जानकारी देने की शिकायत है। आदित्यपुर मेयर विनोद श्रीवास्तव और वार्ड 27 पार्षद पांडी मुखी के खिलाफ भी संपत्ति की गलत जानकारी देने का आरोप है।

 

एक्ट और नियमावली में विरोधाभास

झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 में नगर निकाय के प्रतिनिधियों के निर्वाचन संबंधी आपराधिक मामलों में कार्रवाई की शक्ति नगर विकास विभाग की है।नियमावली की धारा 112 में निर्वाचन में गलत शपथ पत्र, गलत प्रमाण पत्र और अन्य गड़बडिय़ों के मामले में कार्रवाई की शक्ति राज्य चुनाव आयोग की है।एक्ट में चुनाव संबंधी गड़बड़ी व शिकायतों के खिलाफ एक महीने में किसी व्यक्ति के सक्षम न्यायालय में जाने का प्रावधान है। इसके लिए मुंसिफ कोर्ट है। 

 

कोडरमा नगर पंचायत का दिलचस्प मामला

कोडरमा नगर पंचायत के अध्यक्ष के निर्वाचन को नगर विकास विभाग और चुनाव आयोग, दोनों जगह चुनौती दी गई है। आयोग ने इसकी सुनवाई भी की। सुनवाई में अध्यक्ष के निर्वाचन को गलत करार दिया गया। लेकिन आयोग ने कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग को अनुशंसा की। विभाग ने नियमावली की धारा 112 को उद्धृत करते हुए फिर से अंतिम निर्णय के लिए आयोग को फाइल लौटा दी। 2015 से लंबित चास मेयर के मामले में विभाग ने आयोग से ही कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। वहीं, आदित्यपुर मेयर के मामले में विभाग ने आरोप कर्ता को मुंसिफ कोर्ट जाने का सुझाव दिया है। निर्वाचन पूरा होने के एक महीने में ही विभाग में मेयर के गलत निर्वाचित होने की शिकायत की गई थी। 

 

निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य चुनाव आयोग को ही फैसला लेना है। नियमावली में संशोधन हो गया है। आयोग को सुनवाई का अधिकार मिल गया है। -अजय कुमार सिंह, सचिव, नगर विकास

 

पहले सुनवाई और फैसले का अधिकार नगर विकास विभाग के पास था। अगर नियमावली संशोधित हो गई है, तो नोटिफिकेशन मिलते ही आयोग सुनवाई व फैसला करेगा। -एनएन पांडेय, राज्य चुनाव आयोग

 

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