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रांची के सभी घरों में 2020 तक सप्लाई वाटर नहीं पहुंचेगा, बोरवेल ही होगा सहारा

अम्रुत की डीपीआर को स्वीकृति नहीं, टेंडर फाइनल करने में दो माह लगेंगे, फिर बरसात शुरू हो जाएगी

Bhaskar News | Last Modified - May 18, 2018, 03:13 AM IST

रांची के सभी घरों में 2020 तक सप्लाई वाटर नहीं पहुंचेगा, बोरवेल ही होगा सहारा

रांची. राजधानी रांची पानी की किल्लत से जूझ रहा है। वाटर सप्लाई सिस्टम नहीं होने से बड़ी कॉलोनियों के अधिकतर लोग बोरवेल कराकर पानी की जरूरत पूरी कर रहे हैं, लेकिन स्लम क्षेत्रों में हाहाकार मचा है। हरमू, पिस्कामोड़, विद्यानगर,गंगा नगर, पुंदाग, जगन्नाथपुर, धुर्वा, हटिया, हिंदपीढ़ी, कर्बला चौक, बहू बाजार क्षेत्र में पानी के लिए लोगों को रतजगा करना पड़ रहा है।


नेता से लेकर अधिकारी तक किल्लत दूर करने का भरोसा दिला रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वर्ष 2020 से पहले राजधानी के सभी घरों में पानी नहीं पहुंचेगा। इसकी वजह यह है कि हर घर में सप्लाई वाटर पहुंचाने की अम्रुत योजना की डीपीआर को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलना। इस कारण टेंडर भी नहीं हो पा रहा। स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर निकालने व उसे फाइनल करने में कम से कम दो माह लगेंगे। इसके बाद बरसात शुरू हो जाएगी। प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दो साल का लक्ष्य रखा गया है। नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको ने डीपीआर तैयार कर ली है। प्रोजेक्ट में देरी के कारण लोगों को बोरवेल और टैंकर से होने वाली जलापूर्ति पर ही निर्भर रहना होगा।

#02 बड़ी वजहें, जो बन रहीं रोड़ा

1. एसबीडी में बदलाव, कैबिनेट मंजूरी के बाद नए नियम से टेंडर

तीन फेज में डीपीआर बनी है। फेज वन में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन और वाटर टॉवर बनाने के लिए करीब 145 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला गया था। प्रोजेक्ट कॉस्ट कम होने से बड़ी कंपनियां शामिल नहीं हुई। फिर दो फेज को साथ किया गया। दूसरे फेज में रूक्का से मेन लाइन आने की योजना है। उसे जोड़कर करीब 250 करोड़ की योजना बनी है, पर प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है। स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के कई नियम बदले गए हंै। कैबिनेट से मंजूरी के बाद नए नियम से टेंडर होगा।

2. जमीन का एनओसी और पुल बनाने में फंसेगा मामला

योजना के तहत कुल 23 एलिवेटेड सर्विस रिजर्व वायर (ईएसआर) बनेंगे। वाटर टावर बनाने के लिए अब तक 10 स्थानों पर जमीन का एनओसी मिला है। 13 स्थानों पर एनओसी का मामला फंसा हुआ है। वाटर टावर बनाने के लिए सभी सरकारी जमीन चिन्हित की गई है, पर एनओसी नहीं मिला है। अशोक नगर में वाटर टावर के लिए जमीन देने से वहां की सोसाइटी ने इंकार कर दिया है। इसलिए लोकेशन बदला जा रहा है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम होने में दो साल लगेंगे।

03 विकल्प अब जलसंकट दूर करने के लिए

1. निगम 60 टैंकर से फिलहाल 270 स्थानों पर पानी भेज रहा है। इसमें 35 टैंकर और बढ़ जाएंगे। छोटे वार्ड पर एक और बड़े वार्ड पर दो टैंकर देने की तैयारी है। ऐसे में अगले दो सालों तक टैंकर से ही आपूर्ति की जाएगी।

2. नगर निगम 10 हाइड्रेंट (डीप बोरवेल) से पानी आपूर्ति करने की योजना पर काम कर रहा है। हाइड्रेंट होने से वार्ड में पानी की किल्लत दूर करने में काफी मदद मिलेगी। एचवाईडीटी की भी संख्या बढ़ेगी।

3. मिनी एचवाईडीटी चार इंच की जगह पौने पांच इंच का बोरवेल करके बनाया जाएगा। क्योंकि चार इंच की बोरिंग 300 से 350 फुट तक हो रही है। ग्राउंड वाटर लेवल नीचे जाने से बोरवेल फेल हो रहे हैं। पौने पांच इंच का बोरवेल होने से 500 फुट तक की बोरिंग होगी।

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Web Title: raanchi ke sbhi gharon mein 2020 tak splaaee vaatr nahi pahunchegaaa, borvel hi hoga shaaraa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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