पहल / जनवरी-जून तक 3000 से ज्यादा शादियां, मेहमान जूठा नहीं छोड़ें तो 2.70 लाख लोगों का भरेगा पेट

इंदौर में श्री माहेश्वरी समाज ने 2018 में अन्नकूट पर जूठन न फेंकने का अभियान चलाया। 1300 लोगों का ही भोजन बना, जो 1500 के काम आ गया। (सिम्बॉलिक इमेज) इंदौर में श्री माहेश्वरी समाज ने 2018 में अन्नकूट पर जूठन न फेंकने का अभियान चलाया। 1300 लोगों का ही भोजन बना, जो 1500 के काम आ गया। (सिम्बॉलिक इमेज)
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इंदौर में श्री माहेश्वरी समाज ने 2018 में अन्नकूट पर जूठन न फेंकने का अभियान चलाया। 1300 लोगों का ही भोजन बना, जो 1500 के काम आ गया। (सिम्बॉलिक इमेज)इंदौर में श्री माहेश्वरी समाज ने 2018 में अन्नकूट पर जूठन न फेंकने का अभियान चलाया। 1300 लोगों का ही भोजन बना, जो 1500 के काम आ गया। (सिम्बॉलिक इमेज)

  • जनवरी से जून तक 45 मुहूर्त, एक मुहूर्त में रांची में लगभग 45 शादियां, इस लिहाज से शहर में हो सकती है 3375 शादी
  • एक शादी में बुलाए जाते हैं औसतन 400 मेहमान, 50 ग्राम जूठे के लिहाज से 67500 केजी खाना होगा बर्बाद
  • डायटीशियन और कैटरिंग संचालक से बातचीत के आधार पर लगाया गया अनुमान, खाना बर्बादी रोकने के लिए तीन समाज की शादियों का उदाहरण

दैनिक भास्कर

Jan 22, 2020, 11:36 AM IST

रांची. शादियों का मौसम है और हर तरफ बैंड, बाजा और बारातियों की धूम है। जश्न का दौर चल रहा है तो इस जश्न-ए-शादी में खाने की बर्बादी भी हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक, जनवरी से जून तक शहर में तीन हजार से अधिक शादियां हो सकती है। इन शादियों में अगर मेहमान जूठा नहीं छोड़े तो 2.70 लाख लोगों का पेट भर सकता है। कैटरिंग संचालकों और डायटिशियनों से बातचीत के आधार पर दैनिक भास्कर की विशेष रिपोर्ट में ये बातें सामने आई है।

अनुमान है कि शादियों में हर दूसरा व्यक्ति औसत 50-100 ग्राम खाना जूठा छोड़ देता है। शहर में 15 से ज्यादा बड़े होटल, रेस्त्रां में रोज इतना खाना बच जाता है कि 500 लोग खा सकें। कई बार शहर में यह पहल भी की गई कि बचा भोजन भूखों तक पहुंचे, पर यह नियमित नहीं हो पाई। कुछ जगहों पर खाना रखने के लिए फ्रिज भी रखे गए, पर यह योजना ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी। 


मकर संक्रांति के बाद शुरू हुईं शादियां, फरवरी में सबसे ज्यादा विवाह के 13 मुहूर्त, मई में 10 
शादी-विवाह का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी से शुरू हो गया। 2020 में महज जनवरी से जून के बीच कुल 45 शुभ विवाह मुहूर्त बन रहे हैं। जनवरी 15 से 31 तारीख के बीच 16 दिन में 10 शुभ मुहूर्त हैं। फरवरी में सबसे अधिक 13 मुहूर्त हैं। मार्च और जून में केवल 6 मुहूर्त हैं, जबकि मई में 10 मुहूर्त हैं। 

20 हजार रुपए का खाना 400 लोगों की पार्टी में होता है बर्बाद 
कैटरिंग संचालक शंखनाद बनर्जी के मुताबिक, लोग मेहमानों की सही संख्या नहीं बता पाते। इसलिए अमूमन एक शादी में 50 से 75 लोगों का खाना बचना सामान्य बात है। एक प्लेट भोजन 400 से 2000 रु. के बीच पड़ता है। न्यूनतम भी मानें तो हर शादी में 20 हजार रु. से ज्यादा का खाना बर्बाद होता है। हिसाब गड़बड़ाने पर 100 से ज्यादा लोगों का खाना भी बचता है। 

एक पार्टी में लगभग 20 केजी खाना औसतन हो रहा बर्बाद 
अगर एक प्लेट में 50 ग्राम जूठा भी छोड़ा जाए तो एक पार्टी में लगभग 20 केजी खाना बर्बाद होता है। क्योंकि एक शादी में औसतन 400 मेहमान बुलाए जाते हैं। जनवरी से जून तक 45 मुहूर्त हैं तो इस लिहाज से शहर में 3375 शादियां हो सकती हैं। क्योंकि मुहूर्त में एक दिन शहर में लगभग 75 शादियां होती हैं। ये आंकड़ा 100 भी पार कर जाता है।

कैसे हो रहा इतना खाना बर्बाद... 
छह माह में 3375 शादियां और इसमें 400 मेहमान आएं तो 50 ग्राम जूठे के लिहाज से 67500 केजी खाना बर्बाद होगा। डायटीशियनों के अनुसार एक आदमी का डायट 250 ग्राम है तो लगभग 2.70 लाख लोगों का पेट भर सकता है। इसलिए कहीं पार्टी में जाएं तो अपने प्लेट में जूठा नहीं छोड़ें। 

3 उदाहरणों से समझिए...हम भी शादी-पार्टियों में खाना बर्बाद होने से कैसे रोक सकते हैं... 
इंदौर में 3 समाज ने आइटम ही तय किए, 400 शादियां ऐसी हुईं
बोहरा समाज:
छह आइटम का नियम। ऐसी 300 शादियां हुई। प्रत्येक में दो-तीन लाख रुपए बचे।
वैश्य समाज: 21 आइटम का ही संकल्प। दिन में शादी का नियम। 80 शादियां इसी तरह हुई।
माहेश्वरी समाज: 15 शादियों में इसका पालन हुआ। अन्य वैश्य समाज भी ऐसी व्यवस्था करेंगे।

भंडारे में दो लाख लोग शामिल, पर जूठन एक बाल्टी भी नहीं बची 
इंदौर में श्री माहेश्वरी समाज ने 2018 में अन्नकूट पर जूठन न फेंकने का अभियान चलाया। 1300 लोगों का ही भोजन बना, जो 1500 के काम आ गया।
एक ही जगह के भंडारे में बुजुर्गों ने जूठा नहीं छोड़ने की अपील की। तीन दिन में दो लाख लोगों ने खाना खाया, पर रोज एक बाल्टी जूठा भी नहीं निकला। 

रोज बचा खाना इकट्‌ठा कर रहे 
कई संस्थाएं भी खाना एकत्र करती हैं। उनके मोबाइल व फोन पर कॉल कर सकते हैं आप। 
प्रशासन ने आहार एप बनाया है। इसमें पता,फोन नंबर डाल दें। उनकी टीम आकर भोजन ले जाएगी।

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