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भिड़ रहीं देवरानी-जेठानी से विभिन्न मुद्दों पर सवाल, दोनों के अलग-अलग जवाब

8 महीने पहले
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  • रागिनी : झरिया मेरा परिवार है, लोगों का प्रेम और उनकी सेवा ही मेरा मकसद है
  • पूर्णिमा : झरिया को क्या मिला और क्या मिलना चाहिए, यही बताने के लिए आई हूं
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धनबाद | कोयलांचल की सबसे हॉट सीटों में झरिया में इस बार फिर एक ही परिवार के बीच सियासी जंग है। 2014 में इस सीट से भाजपा के संजीव सिंह अपने चचेरे भाई कांग्रेस के नीरज सिंह से टकरा चुके हैं, जिसमें संजीव को जीत मिली थी। इस बार दोनों की पत्नियां मैदान में हैं। भाजपा से संजीव की पत्नी रागिनी सिंह और कांग्रेस से नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा सिंह चुनावी अखाड़े में दो-दो हाथ कर रही हैं। झरिया में 16 दिसंबर को मतदान है। झरिया के मुद्दे, प्राथमिकता समेत अन्य मसलों पर रागिनी सिंह और पूर्णिमा सिंह से भास्कर के विशेष संवाददाता विकास सिंह की बातचीत के मुख्य अंश... 

सवाल : झरिया आपके परिवार को चुनती रही और उनके हिस्से प्रदूषण, भू-धंसान, विस्थापन आते रहे, पानी नहीं मिला, फिर वोट मांगा जा रहा है

रागिनी : 70 सालों में देश में कांग्रेस का राज था। राष्ट्रीयकरण के बाद खनन क्षेत्र में लूट-खसोट के कारण प्रदूषण से लेकर विस्थापन की स्थिति आई। 2005 से 2014 तक मेरी सासू मां यहां से विधायक थीं। इन 10 सालों में स्थिर सरकार झारखंड में नहीं चल रही थी। कांग्रेस और निर्दलीयों के मिलावटी गठबंधन की वजह से राजनीतिक अस्थिरता थी। इस कारण विकास नहीं हो सका। अब मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में झरिया समेत पूरे राज्य में विकास ने गति पकड़ी है।

पूर्णिमा: आप झरिया जाकर देखिए, किस परिस्थिति में लोग रह रहे हैं। हजारों विस्थापित परिवारों को आठ बाई नौ का एक कमरा दे दिया गया है। उन कोठरियों में एेसे परिवार जानवरों की तरह रह रहे हैं। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। प्रदूषण के कारण हवा जहरीली हो गई है। मैं 15 साल की अव्यवस्था को जिम्मेदार मानती हूं। इस दौरान झरिया में जो विधायक हुए, उनसे हमारा खून का रिश्ता भले हो, पर झरिया के विकास में उनकी सुस्ती का हमने पुरजोर विरोध किया और उस प्रक्रिया में अपना खून भी बहाया है। 

सवाल : राजनीति के मैदान में परिवार के बीच लड़ाई है, जनता किसका साथ दे

रागिनी : झरिया अपना परिवार रहा है। परिवार के बीच ही रहना है। झरिया ने सास कुंती सिंह और फिर पति संजीव सिंह को चुना। दोनों ही ससुर स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह के सिद्धांतों पर चले। झरिया जानती है कि उनके लिए बेहतर विकल्प क्या है।

पूर्णिमा: जिस तरीके से विस्थापितों के साथ सलूक हो रहा है, क्या उससे उनकी प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आ रही है। क्या झरिया इसी मकसद से किसी को चुनती है कि उनके हिस्से सिर्फ दर्द-संताप आए। झरिया को क्या मिला और क्या मिलना चाहिए, यही बताने आई हूं।

सवाल :आप राजनीति में नई हैं, जीतने पर बागडोर संभाले रख पाएंगी या फिर डोर दूसरे के हाथ रहेगी, झरिया के लोग आप पर क्यों विश्वास करे 

रागिनी : जीतने के बाद जनता के साथ मिलकर काम करूंगी। जो जनता कहेगी, वही करूंगी। जनता के बीच ही रहना है। झरिया हमारा परिवार है।

पूर्णिमा: राजनीति अलग चीज है और प्रशासन अलग। मैं जीती तो प्रशासन की चिंता आप न करें। उसमें इससे भी अच्छा करके दिखाऊंगी।

सवाल : झरिया की जनता आपको वोट क्यों दे, विकास का क्या विजन है

रागिनी : नरेंद्र मोदी के सबका साथ लेकर सबका विकास करने का विजन लेकर जितने कार्य किए गए, उन्हीं कामों पर जनता ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलवाया था। अब रघुवर दास सरकार के कार्यों के कारण ही जनता एक बार फिर भाजपा को एेतिहासिक जीत दिलाएगी। 

पूर्णिमा: जनता को अगर एक सक्रिय और सुलभ प्रतिनिधि चाहिए और उन्हें अपनी झरिया को उजड़ने से रोकना है तो वह खुद परिवर्तन लाएगी। झरिया भी जानती है कि वादों के बावजूद न उन्हें पानी मिला और न ही सम्मानपूर्वक रहने के लिए छत। यहां की समस्याएं देख जनता अब परिवर्तन चाह रही है।

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