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शर्मनाक : यह है सरकारी अस्पताल

4 वर्ष पहले
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आधी रात के बाद नजर नहीं आते वार्ड अटेंडेंट : वार्डमें अटेंडेंट की भी ड्यूटी होती है। लेकिन, आधी रात बाद कोई नजर नहीं आता। कई बार भगाने की कोशिश करने वालों पर कुत्तों का झुंड हमला कर देता है। सर्जरी बर्न मामलों से संबंधित मरीजों को सर्जिकल वार्ड में रखा जाता है। ऐसे में संक्रमण एक बड़ी समस्या है। बेड पर कुत्तों का होना मरीजों के लिए जोखिम भरा है।

सर्जिकल वार्ड रात में अावारा कुत्तों का सर्किट हाउस

1400 मरीजकुत्ते काटने के हर माह आते हैं

40 बेडहैं अस्पताल में 10 पर कुत्तों का कब्जा

काटने के डर से मरीज के परिजन भी रहते हैं खामोश

आवारा कुत्तों से रैबीज का खतरा रहता है। यह ‘साइलेंट किलर’ की तरह है। रैबीज वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। इंसानों में इसके लक्षण कुछ दिनों से लेकर महीनों तक में दिखाई देते हैं। सदर अस्पताल में औसतन हर दिन 60 मरीज कुत्ते के काटने वाले आते हैं।

मुजफ्फरपुर| यहहै सदर अस्पताल का सर्जिकल वार्ड। अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों के लिए कैसी व्यवस्था कर रखी है, यह तस्वीर बयां कर रही है। बेड पर मरीज की जगह कुत्ते आराम फरमा रहे हैं। हालांकि, वार्ड में मरीज भी भर्ती हैं। लेकिन, रात होते ही दर्जन भर से अधिक कुत्ते वार्ड में घुस कर बेड पर चढ़ जाते हैं। काटने के डर से मरीज या उनके परिजन कुत्तों को भगाने की भी हिम्मत नहीं दिखा पाते। परिजनों को रात में जाग कर मरीजों की सुरक्षा करनी पड़ती है। ठंड लगने पर कई बार तो कुत्ते बेड पर सोए मरीजों के बिछावन में जाकर घुस जाते हैं। फोटो: तुषार राय

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