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ओड़िया भाषी शिक्षकों का हिन्दी स्कूलों में स्थानांतरण किए जाने का किया विरोध

रविवार को उत्कलमणि विद्या मंदिर उच्च विद्यालय कुसुमकुंज में उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव मनाया गया। पंडित...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 03:20 AM IST
ओड़िया भाषी शिक्षकों का हिन्दी स्कूलों में स्थानांतरण किए जाने का किया विरोध
रविवार को उत्कलमणि विद्या मंदिर उच्च विद्यालय कुसुमकुंज में उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव मनाया गया। पंडित गोपबंधु दास, गोदावरी मिश्र तथा मधु बाबू की प्रतिमा पर अतिथियों ने माल्यापर्ण किया। मौके पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष अशोक षाड़ंगी और समाजसेवी डॉ लक्ष्मीकांत महांती ने किया। मौके पर श्री षाड़ंगी ने कहा कि भाषा को लेकर शिक्षा जरूरी है। लेकिन यहां जाति और भाषा में बंट जा रहे हैं। हमें एकजुट होने की जरूरत है। ओड़िसा सरकार के मानदेय पर कार्यरत उड़िया शिक्षकों के मानदेय बढ़ाने को लेकर सरकार और राज्यपाल को पत्र लिखे हैं। वहीं झारखंड को उड़िया किताब मिले, उसके लिए सिलेबस को ओड़िसा सरकार को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि प्रखंड के चैनपुर गांव का उड़िया स्कूल आजादी से पहले से है, उसे बेसिक स्कूल बनाने का प्लान किया गया है, लेकिन डीएसई को उस पर विचार करने को कहा गया है। साफ तरीके से कहा गया कि भाषायी विद्यालय को बदलने का कोशिश नहीं करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी उड़िया भाषी शिक्षकों से सोतैला व्यवहार करते हैं, उन्हें हिन्दी स्कूल में स्थानांतरण किया जाता है। इस सभी चीजों को लेकर सरकार से संघर्ष किये जा रहे हैं। सरायकेला-खरसावां जिला में वर्ष 2004 को 46 विद्यालय थे। अब अधिकारियों ने सरकार को भेजे रिपोर्ट में शून्य कर दिया है। इन चीजों के लिए एकजुट होने की जरुरत है।

प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करते अतिथि।

उत्कल दिवस सह वार्षिकोत्सव में उपस्थित उड़िया भाषी।

भास्कर न्यूज | चक्रधरपुर

रविवार को उत्कलमणि विद्या मंदिर उच्च विद्यालय कुसुमकुंज में उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव मनाया गया। पंडित गोपबंधु दास, गोदावरी मिश्र तथा मधु बाबू की प्रतिमा पर अतिथियों ने माल्यापर्ण किया। मौके पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष अशोक षाड़ंगी और समाजसेवी डॉ लक्ष्मीकांत महांती ने किया। मौके पर श्री षाड़ंगी ने कहा कि भाषा को लेकर शिक्षा जरूरी है। लेकिन यहां जाति और भाषा में बंट जा रहे हैं। हमें एकजुट होने की जरूरत है। ओड़िसा सरकार के मानदेय पर कार्यरत उड़िया शिक्षकों के मानदेय बढ़ाने को लेकर सरकार और राज्यपाल को पत्र लिखे हैं। वहीं झारखंड को उड़िया किताब मिले, उसके लिए सिलेबस को ओड़िसा सरकार को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि प्रखंड के चैनपुर गांव का उड़िया स्कूल आजादी से पहले से है, उसे बेसिक स्कूल बनाने का प्लान किया गया है, लेकिन डीएसई को उस पर विचार करने को कहा गया है। साफ तरीके से कहा गया कि भाषायी विद्यालय को बदलने का कोशिश नहीं करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी उड़िया भाषी शिक्षकों से सोतैला व्यवहार करते हैं, उन्हें हिन्दी स्कूल में स्थानांतरण किया जाता है। इस सभी चीजों को लेकर सरकार से संघर्ष किये जा रहे हैं। सरायकेला-खरसावां जिला में वर्ष 2004 को 46 विद्यालय थे। अब अधिकारियों ने सरकार को भेजे रिपोर्ट में शून्य कर दिया है। इन चीजों के लिए एकजुट होने की जरुरत है।

मेधावी विद्यार्थी हुए सम्मानित

वार्षिकोत्सव के दौरान शैक्षणिक सत्र 2016-17 के मेधावी विद्यार्थी तथा वार्षिक खेलकूद के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। मेधावी विद्यार्थी में कक्षा दस माध्यमिक परीक्षा में आदित्य जयसवाल, श्याम बोदरा, नुपुर मुखी, कक्षा नवम में बिरु गोप, आयुष जयसवाल, कृष्णा प्रधान, कक्षा आठ में राज लोहार, सोनम परवीन, नीलिमा नायक, कक्षा सप्तम में बसंत साहु, कुमकुम मुखी, रेशमी प्रमाणिक, षष्टम में सावित्री टुडू, सुमित्रा सोय, सुनील नायक के अलावे खेलकूद में विजेताओं को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

सुबह निकाली प्रभातफेरी

स्कूली विद्यार्थियों द्वारा उत्कल दिवस के उपलक्ष्य में प्रभात फेरी निकाले गये। विभिन्न क्षेत्र में भ्रमण कर उत्कल दिवस की जानकारी दी गई। जिसमें उत्कल मणि विद्या मंदिर उवि के शिक्षक और शिक्षिका भी शामिल थे। मौके पर कुसुम मंजरी दास, अंबिका चरण दिक्षीत, प्रदीप्त कुमार दास, प्रधानाध्यापक गोकुल चंद्र महतो, सरोज कुमार प्रधान, अनिल देहुरी, बलराम प्रधान, श्रावणी महतो, पीके नंदा, सुशांत महांती, बसंत प्रधान, सुभद्रा मिस्त्री, अनिता महतो, गायत्री प्रधान, बासंती महतो, यशोदा महतो, कुनी बारिक समेत काफी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी मौजूद थे।

उड़िया भाषी झारखंड में सम्मान के साथ रहिए: डॉ महांती

उत्कल दिवस पर विशिष्ट अतिथि डॉ लक्ष्मीकांत महांती ने कहा कि झारखंड में उड़िया भाषा-भाषी अंचलों में जितना विकास होना चाहिए, नहीं हो रहा है। हमारे उड़िया भाषा अपने परिचय को भूल रहे हैं। वे अपने मातृभाषा का सम्मान करें। उड़िया भाषी झारखंड में सम्मान के साथ रहिये। उड़िया पर्व त्योहार का पालन करें। वहीं आयोग के उपाध्यक्ष श्री षाड़ंगी से उड़िया भाषा को लेकर कुछ बेहतर करने का अनुरोध किया। उत्कल दिवस सह वार्षिकोत्सव समारोह में स्कूल के छात्राओं ने उड़िया गीतों पर नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। कक्षा छह के नंदनी ग्रुप तथा आर्यन ग्रुप द्वारा नृत्य प्रस्तुत किये गये। वहीं मनीषा कुमार, निकिता ग्रुप ने भी नृत्य प्रस्तुत किये।

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