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दुगनी में 3 करोड़ से बने तीरंदाजी ग्राउंड का मंत्री लुइस मरांडी ने किया उदघाटन

तीरंदाजों को अपने भविष्य पर तीर लगाना अब और भी आसान हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का तीरंदाजी ग्राउंड बनकर तैयार...

Danik Bhaskar | Feb 17, 2018, 03:30 AM IST
तीरंदाजों को अपने भविष्य पर तीर लगाना अब और भी आसान हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का तीरंदाजी ग्राउंड बनकर तैयार है। यहां तीरंदाजों को ऐसी हर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के तीरंदाजी एकेडमी में मिलती है। उक्त बातें कल्याण मंत्री डॉक्टर लुइस मरांडी ने शुक्रवार को तीरंदाजी अकादमी दुगनी में तीन करोड़ से निर्मित अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्राउंड का उदघाटन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि तीरंदाज इन सभी सुविधाओं का लाभ उठाएं। सभी तीरंदाजों से उन्होंने कहा कि समाज में अपने को एक आदर्श के रूप में स्थापित करें, ताकि आने वाले समय में नए तीरंदाज उनका अनुसरण कर आगे बढ़ें। उन्होंने सबसे पहले 42 लाख रुपए के इक्यूपमेंट तीरंदाजों के बीच बांटे। कार्यक्रम में आईटीडी के परियोजना डायरेक्टर वाल्टर सांगा ,जिला खेल पदाधिकारी बाल किशोर महतो, कोच वीएस राव, हिमांशु भाजपा जिला अध्यक्ष उदय प्रताप सिंहदेव, प्रदीप सिंहदेव, विजय महतो आदि उपस्थित रहे। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्राउंड, तीरंदाजी अकादमी पोडियम, एसटीपी गैलरी, आर्चरी सेड, बाउंड्री वॉल, पीसीसी व स्ट्रीट लाइट का उदघाटन किया गया। यह सभी व्यवस्था दो करोड़ 60 लाख की है।

टारगेट पर निशाना लगातीं मंत्री लुइस मरांडी व तीरंदाजों के बीच खेल उपकरण का वितरण करतीं मंत्री।

छात्र संघ ने कल्याण मंत्री को ज्ञापन सौंप बस

काशी साहू महाविद्यालय सरायकेला छात्र संघ द्वारा झारखंड सरकार कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास मंत्री लुईस मरांडी को ज्ञापन सौंपकर महाविद्यालय के लिए बस सेवा प्रबंध किए जाने की मांग की है। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि किरीटी भूषण प्रमाणिक, अध्यक्ष प्रकाश महतो, उपाध्यक्ष लक्ष्मण महतो, पूर्व अध्यक्ष अभिषेक आचार्य व पूर्व कोल्हान विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष कृष्णा चंद्र राणा ने उक्त ज्ञापन देते हुए बताया है कि जिला मुख्यालय के एकमात्र महाविद्यालय में सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों खूंटपानी, कुचाई, खरसावां, राजनगर, सरायकेला, कांड्रा, गम्हरिया, चांडिल और ईचागढ़ जैसे क्षेत्रों से प्रतिदिन छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए आते हैं। कई गरीब छात्र छात्राओं को बस का प्रतिदिन का खर्चा उठाना कठिन होता है।