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ओपीडी बंद, इमरजेंसी में हुआ इलाज

आईएमए और झासा के संयुक्त तत्वाधान घोषित चिकित्सकों की राज्य स्तरीय हड़ताल का प्रभाव जिले में देखा गया। इसके तहत...

Danik Bhaskar | Feb 27, 2018, 03:35 AM IST
आईएमए और झासा के संयुक्त तत्वाधान घोषित चिकित्सकों की राज्य स्तरीय हड़ताल का प्रभाव जिले में देखा गया। इसके तहत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और निजी अस्पतालों के डॉक्टर भी हड़ताल पर रहे। हालांकि इस दौरान ओपीडी सेवा को छोड़कर सभी सेवाएं जैसे इमरजेंसी, पोस्टमार्टम और विभागीय बैठकें जारी रही। सीजनल आधारित बीमारियों के प्रभाव से ग्रसित सामान्य मरीजों की संख्या अधिक होने और ओपीडी संचालित नहीं होने के कारण ऐसे मरीज और उनके परिजन परेशान देखे गए। वहीं नर्सें इस दौरान मरीजों की समस्याओं को लेकर काफी सक्रिय भी दिखीं। इसके साथ ही ऐसे मरीजों का इलाज भी इमरजेंसी के तौर पर होते हुए देखा गया।

डॉक्टरों ने दोषियों को की गिरफ्तार करने की मांग

नर्सों और कंपाउंडरों ने संभाला मोर्चा

इसे लेकर सरायकेला स्थित सदर अस्पताल में झासा के जिलाध्यक्ष सिविल सर्जन डॉ ए पी सिन्हा की अध्यक्षता में चिकित्सकों ने बैठक कर मांगों पर चर्चा की। बैठक में जामताड़ा सिविल सर्जन डॉक्टर शाहा और डॉक्टर जयंत के साथ वह मारपीट की घटना और उन्हें जान से मारने की धमकी देने के दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की गई, साथ ही मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करते हुए कार्यस्थल पर चिकित्सकों के सुरक्षा की मांग की गई।

इमरजेंसी में देखे गए पेशेंट

91 सदर अस्पताल सरायकेला

10 मगध सम्राट हॉस्पिटल नवाडीह

महिला और पुरुष ओपीडी में खाली कुर्सियां और बंद पड़ा डॉक्टर का रूम।

प्रभावित हुए मरीज

सीजन के सर्दी खांसी, सामान्य बुखार, अपच, सिर दर्द एवं बदन दर्द जैसी सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर प्रतिदिन औसतन सदर अस्पताल के ओपीडी में देखे जाने वाले तकरीबन 150 मरीज भी सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल के कारण प्रभावित देखे गए, जबकि क्षेत्रांतर्गत सरकारी एवं निजी अस्पतालों में भी इसका प्रभाव करीब 200 से 250 मरीजों के बीच बताया गया।

ओपीडी छाेड़कर सभी सेवा जारी रखी गई