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गांव के स्कूल में पढ़कर वैज्ञानिक बनी अलका

मन में सच्ची लगन तथा कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो सरकारी स्कूल में पढ़कर भी अपना जीवन संवार सकते हैं। इसे सच कर...

Danik Bhaskar | Feb 28, 2018, 03:45 AM IST
मन में सच्ची लगन तथा कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो सरकारी स्कूल में पढ़कर भी अपना जीवन संवार सकते हैं। इसे सच कर दिखाया है अलका भारती। धालभूमगढ़ प्रखंड की मौदाशोली पंचायत के सोनाखून निवासी अलका भारती (25) ने गांव के भादुवा स्कूल से प्राइमरी शिक्षा प्राप्त की हैं। उन्होंने एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस एग्जामिनेशन (कृषि अनुसंधान सेवा परीक्षा) मे पास कर वैज्ञानिक बनकर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र का नाम रोशन की हैंl कृषि वैज्ञानिक बनने के बाद उनके माता-पिता काफी प्रसन्न हैं। वर्तमान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में वैज्ञानिक के तौर पर योगदान दी हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारत सरकार के कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा विभाग के तहत एक स्वायत्तशासी संस्था है। अलका भारती ने प्राइमरी शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राप्त की है। मैट्रिक तथा इंटर की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय सरायकेला से की थी। विश्व भारती विवि पश्चिम बंगाल से एग्रीकल्चर की शिक्षा ग्रहण की। वहीं एमएससी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान न्यू दिल्ली से की है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान न्यू दिल्ली से हाल ही में पीएचडी की भी उसने उपाधि ले चुकी है।

धालभूमगढ़ प्रखंड की मौदाशोली पंचायत के सोनाखून निवासी है अलका, भादुवा स्कूल से ग्रहण की है प्राथमिक शिक्षा

बहुमुखी प्रतिभा की धनी है अलका भारती : रविदास

अलका के पिता अजीत रविदास एक व्यापारी हैं तथा मां गृहिणी हैं। असका की बड़ी बहन दीपिका की शादी हो चुकी है। वहीं छोटा भाई अभिषेक कुमार बीटेक की पढ़ाई कर प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ाई करने के बाद कृषि वैज्ञानिक बनना एक गर्व का विषय है। पिता अजीत रविदास ने जानकारी देते हुए बताया कि अलका भारती बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थी। वह बहुमुखी प्रतिभा की धनी थी। उसका अधिकतर समय पढ़ाई में ही बीतता था। वह जितनी भी परीक्षा दी है, उसमें आज तक कभी फेल नहीं हुई है।