--Advertisement--

नपेंगे अब मिलावटी खाद्य विक्रेता

खाद्य सुरक्षा एवं संरक्षा अधिनियम 2006 के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट करना एक घोर अपराध है। इस पर नियंत्रण को लेकर...

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 03:50 AM IST
खाद्य सुरक्षा एवं संरक्षा अधिनियम 2006 के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट करना एक घोर अपराध है। इस पर नियंत्रण को लेकर राज्य सरकार जल्द ही जिला को एक मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी वाहन उपलब्ध कराने जा रही है। यह गाड़ी जिले में घूमते हुए खाद्य भंडारों से खाद्य पदार्थों का सैंपल लेकर ऑन द स्पॉट मिलावट के नतीजे देगी। सरकार की इस योजना से मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यवसायियों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। बताते चलें कि वर्तमान में खाद्य सुरक्षा एवं संरक्षा टीम द्वारा विभिन्न खाद्य भंडारों से सैंपल लेकर जांच के लिए रांची के नाम कूम स्थित प्रयोगशाला भेजा जाता है। इसमें सैंपल के भेजे जाने, जांच होने और रिपोर्ट के आने में महीनों गुजर जाते हैं। बताया जा रहा है कि उक्त वाहन के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को लेकर अन्य गतिविधियां भी संचालित हो सकेंगी। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा विभाग को निर्देश प्राप्त हो चुका है।

वाहन में क्या होगा खास

1. ऑन द स्पॉट खाद्य सैंपल में मिलावट की जांच हो सकेगी।

जिले में नहीं है एक भी वधशाला- जिले के कुल 120 मांस एवम मछली के व्यापारियों का निबंधन किया गया है। जिले में वृहद रूप से संचालित एक भी वधशाला नहीं होने के कारण वधशाला का लाइसेंस नहीं दिया गया है। बताते चलें कि जिले में मांस एवं मछली बेचे जाने का अनियमित कारोबार है। प्रत्येक गांव और सड़क मार्गो के किनारे ऐसे सैकड़ों मांस और मछली के विक्रेता कारोबार करते देखे जा सकते हैं। विभाग के निबंधन का आंकड़ा इसके परीपेक्ष्य में शून्य बताया जा रहा है।


2. इसके माध्यम से आम जनता को खाद्य पदार्थों में अपमिश्रण एवं मिलावट के प्रति जागरूक किया जाएगा।

3. इसके माध्यम से खाद्य सुरक्षा के लिए कारोबारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।