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माया वंदन को मिला पहला स्थान

राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव पर ग्रामीण छऊ नृत्य कला को लेकर शुक्रवार को खरसावां शैली के छऊ नृत्य प्रतियोगिता...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 07, 2018, 02:55 AM IST

माया वंदन को मिला पहला स्थान
राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव पर ग्रामीण छऊ नृत्य कला को लेकर शुक्रवार को खरसावां शैली के छऊ नृत्य प्रतियोगिता की गई। जिला प्रशासन के तत्वाधान राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के ऑडिटोरियम में की गई उक्त प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों से आए कुल 7 दलों ने प्रदर्शन किया। जिनमें केंद्र के निदेशक गुरु तपन कुमार पटनायक की देखरेख में निर्णायक दल के पंडित गोपाल प्रसाद दुबे, गुरु नाथू महतो एवं गुरु सुशांत कुमार महापात्र 3 श्रेष्ठ दलों का चयन किया गया।

बताया गया कि चयनित दल आगामी 11 अप्रैल से शुरू हो रहे राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव के अवसर पर छऊ मंच से अपने नृत्य की प्रस्तुति करेंगे। जिन्हें 13 अप्रैल को छऊ मंच से पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जाएगा। प्रथम- छऊ नृत्य कला केंद्र खरसावां ( प्रस्तुति- मायावंदन)।, द्वितीय- भवेश नृत्य कला केंद्र देहुरीडीह खरसावां प्रस्तुति- द्वापर मिलन)। एवं तृतीय- आदिवासी नवयुवक संघ रांगाडीह (प्रस्तुति- अभिमन्यु वध को मिला।

राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के ऑडिटोरियम में कलाकारों ने दी नृत्य की प्रस्तुति

नृत्य पेश करते खरसावां के कलाकार

खरसावां के द्वापर लीला नृत्य को दूसरा स्थान मिला

भास्कर न्यूज | खरसावां

सरायकेला में आयोजित चैत्रपर्व छऊ महोत्सव सह स्वदेशी मेला 2018 में खरसावां शैली ग्रामीण छऊ नृत्य प्रतियोगिता में छऊ नृत्य कला केन्द्र खरसावां द्वारा प्रस्तुत नृत्य माया वंदन को जहां प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। वहीं भवेश छऊ नृत्य दल देहरूडीह खरसावां द्वारा प्रस्तुत नृत्य द्वापर लीला को द्वितीय स्थान मिला है। जबकि आदिवासी नव युवक रगाडीह के द्वारा प्र्रस्तुत नृत्य अभिमन्यु वध को तीसरा स्थान मिला। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले माया-बंधन मानिनी राधा को यह गुमान है कि वह सांसारिक मोह माया से दूर है। उसे संसार की कोई ताकत अपने बंधन में नहीं बांध सकती। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी नहीं...। राधा के इस भ्रम को श्रीकृष्ण तोड़ना चाहते हैं। इस बात पर वाद-विवाद में अपनी सहेलियों के साथ उलझी राधा के इस गुमान को तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ घने जंगल में पहुंचते हैं। भला श्याम की बंसी की आवाज किसे नहीं भाती। श्रीकृष्ण की बांसुरी की आवाज ज्योंही राधा के कानों में गूंजती है, वह व्याकुल हो जाती है। बावरी राधा अपने सभी मान को भूल बांसुरी की दिशा में दौड़ पड़ती है..।

इन्होंने भी किया प्रदर्शन

छऊ नृत्य कला केंद्र कुम्हार टोला कुचाई, छऊ नृत्य कला समिति भुरकुंडा, मां मनसा छऊ नृत्य कला केंद्र देहुरीडीह खरसावां, हर हर महादेव छऊ नृत्य कला केंद्र चिलगु।

नृत्य पेश करते खरसांवा के कलाकार।

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