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27 दिन बाद रथयात्रा, जिस मार्ग से गुजरेंगे प्रभु, वह जर्जर; अतिक्रमण भी डालेगा बाधा

जगन्नाथ धाम पुरी की तर्ज पर सरायकेला में होने वाली महान वार्षिक पर्व महाप्रभु श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर...

Dainik Bhaskar

Jun 17, 2018, 03:30 AM IST
जगन्नाथ धाम पुरी की तर्ज पर सरायकेला में होने वाली महान वार्षिक पर्व महाप्रभु श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। इसे लेकर एक और जहां रथ को तैयार करने की तैयारियां की जा रही है। वहीं दूसरी ओर रथयात्रा के संस्कारों और कार्यक्रम को लेकर लगातार बैठकों का दौर भी जारी है। लेकिन निर्धारित रथयात्रा के मार्ग की बदहाली को लेकर अभी तक कुछ भी पहल नहीं हो रही है। वहीं देखा जाए तो बीते एक वर्ष में रथ यात्रा का मार्ग जर्जर हो चुका है। इसे लेकर जगन्नाथ भक्त और रथ खींचने वाले भक्तगण भी कयास लगाने लगे हैं कि इस वर्ष महाप्रभु की रथ यात्रा काफी कठिन रहेगी। रथ के मजबूत होने के बावजूद भी बदहाल सड़क से गुजरने के क्रम में क्षति होने की संभावना जताई जाने लगी है। बहरहाल रथयात्रा के शुरू होने में मात्र 27 दिनों का समय शेष बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर रथ यात्रा मार्ग में हुए अतिक्रमण भी मार्ग को संकीर्ण किए हुए हैं। इसे भी चिंता का विषय बताया जा रहा है। जगन्नाथ सेवा समिति रविवार को बैठक करेगी। महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा मार्ग की बदहाली के निराकरण सहित अन्य सभी तैयारियों को लेकर जगन्नाथ सेवा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को जगन्नाथ श्री मंदिर के प्रांगण में की जाएगी। समिति के सचिव अंईठु कर ने इस संबंध में बताया कि रथयात्रा मार्ग को सुदृढ़ एवं सुचारु बनाए जाने के लिए बैठक में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

थाना चौक से लेकर पुराना बस स्टैंड चौक और वहां से उत्कलमणि आदर्श पाठागार तक की सड़क पूरी तरह से जर्जर है। इसमें सामान्य स्थिति में आम जनों की आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उक्त सड़क मार्ग अधिकांश जगहों पर पेयजल आपूर्ति पाइपलाइन के पार करने के कारण उखाड़ कर छोड़ दी गई है। वहीं कई स्थानों पर नालियां बनाए जाने के क्रम में उखाड़ी गई है। इसकी मरम्मति के कार्य भी एक लंबे समय से नहीं किया गया है। इसके अलावा अतिक्रमण भी रथ यात्रा मार्ग को बाधित कर रहा है।

ऐसे उखड़ी है सड़क

कार्यक्रम

28 जून- देव स्नान पूर्णिमा।

13 जुलाई- नेत्र उत्सव।

14 जुलाई- रथ यात्रा प्रारंभ।

16 जुलाई- विपदातारिणि व्रत।

18 जुलाई- हेरा पंचमी।

22 जुलाई- बाउड़ा।

23 जुलाई- हरिशयन एकादशी।


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