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गजराजों का आदर्श आश्रयस्थली गिद्दीबेड़ा वन क्षेत्र, जहां 17 हाथियों ने जमा रखा है डेरा

वन्यजीवों की वार्षिक गणना के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के तहत बीते 22 मई को वाटर सेंसस किया गया। इसके तहत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 04, 2018, 03:45 AM IST

वन्यजीवों की वार्षिक गणना के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के तहत बीते 22 मई को वाटर सेंसस किया गया। इसके तहत वन क्षेत्र अंतर्गत जलस्रोतों पर लगातार निगरानी रखी गई। 24 घंटों में पानी पीने पहुंचने वाले वन्यजीवों की गणना ऑन द स्पॉट की गई थी। वनरक्षियों की गठित टीम द्वारा सरायकेला वन क्षेत्र अंतर्गत की गई उक्त एक दिवसीय वाटर सेंसस की रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। बताया जा रहा है कि सरायकेला वन क्षेत्र वन्यजीवों के आदर्श आश्रयस्थली के रूप में विकसित हो रहा है। जहां इन दिनों जिले से सीजनल मूवमेंट करने वाले जंगली हाथी भी स्थाई तौर पर आश्रय लेते हुए देखे जा रहे हैं। बताते चलें कि इससे पूर्व मार्च में वन्यजीवों की गणना की गई थी। सीजनल मूवमेंट के तहत इस वर्ष फरवरी महीने में पहुंचे 17 जंगली हाथियों का दल गिद्दीबेड़ा जंगल में आश्रय लिए हुए है। बताया जा रहा है कि समीप से बहती हुई स्वर्णरेखा नदी का पानी और वन क्षेत्र के ऊंचे वृक्ष जंगली हाथियों के रहने के लिए अनुकूल हैं। वन सूत्रों के अनुसार जंगली हाथियों के उक्त दल का मूवमेंट गिद्दीबेड़ा सहित पालोबेड़ा, विश्रामपुर एवं सुधापुर ग्रामीण आवासीय क्षेत्र तक है। और अकारण कहीं अधिक नुकसान भी नहीं पहुंचा रहे हैं।

वन्यजीव गणना के लिए जलाशय किनारे बैठे वन विभाग के कर्मी।

एक दिवसीय वाटर सेंसस बीते 22 मई को की गई थी। वन क्षेत्र अंतर्गत जल स्रोतों में पानी पीने पहुंचने वाले वन्यजीवों की गणना की गई थी। इसकी रिपोर्ट विभाग को भेजी जा रही है। सुरेश प्रसाद, वन क्षेत्र पदाधिकारी, सरायकेला।

जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी की तबीयत बिगड़ी

जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ए एक्का की रविवार को अचानक से तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द और सांस की समस्या के बाद उन्हें टाटा मुख्य अस्पताल जमशेदपुर में भर्ती कराया गया। उनका स्वास्थ का हाल जानने पहुंचे सरायकेला वन क्षेत्र पदाधिकारी सुरेश प्रसाद ने बताया कि इलाज के बाद स्थिति सामान्य है।

भास्कर न्यूज | सरायकेला

वन्यजीवों की वार्षिक गणना के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के तहत बीते 22 मई को वाटर सेंसस किया गया। इसके तहत वन क्षेत्र अंतर्गत जलस्रोतों पर लगातार निगरानी रखी गई। 24 घंटों में पानी पीने पहुंचने वाले वन्यजीवों की गणना ऑन द स्पॉट की गई थी। वनरक्षियों की गठित टीम द्वारा सरायकेला वन क्षेत्र अंतर्गत की गई उक्त एक दिवसीय वाटर सेंसस की रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। बताया जा रहा है कि सरायकेला वन क्षेत्र वन्यजीवों के आदर्श आश्रयस्थली के रूप में विकसित हो रहा है। जहां इन दिनों जिले से सीजनल मूवमेंट करने वाले जंगली हाथी भी स्थाई तौर पर आश्रय लेते हुए देखे जा रहे हैं। बताते चलें कि इससे पूर्व मार्च में वन्यजीवों की गणना की गई थी। सीजनल मूवमेंट के तहत इस वर्ष फरवरी महीने में पहुंचे 17 जंगली हाथियों का दल गिद्दीबेड़ा जंगल में आश्रय लिए हुए है। बताया जा रहा है कि समीप से बहती हुई स्वर्णरेखा नदी का पानी और वन क्षेत्र के ऊंचे वृक्ष जंगली हाथियों के रहने के लिए अनुकूल हैं। वन सूत्रों के अनुसार जंगली हाथियों के उक्त दल का मूवमेंट गिद्दीबेड़ा सहित पालोबेड़ा, विश्रामपुर एवं सुधापुर ग्रामीण आवासीय क्षेत्र तक है। और अकारण कहीं अधिक नुकसान भी नहीं पहुंचा रहे हैं।

वन प्रबंधन एवं संरक्षण समिति के अध्यक्ष 5 जून को कार्यक्रम में भाग लेंगे

सरायकेला|
आगामी विश्व पर्यावरण दिवस के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जिले के वन प्रबंधन एवं संरक्षण समिति के सात अध्यक्ष शामिल होंगे। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ए एक्का ने बताया कि सभी अध्यक्ष उक्त राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होकर वन पर्यावरण की सुरक्षा के विषय में जागरुक होंगे। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तहत इस वर्ष बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन की थीम के साथ पूरे देश भर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। जिसका उद्देश्य है पर्यावरण के लिए खतरा बन रहे अनाशवान प्लास्टिक के उपयोग को खत्म करना है।

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