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बागान में बारहमासी नारियल और आम सहित अन्य फलदार व छायादार पौधे लगाए, स्थानीय लोग भी हाे रहे प्रेरित

बाजारों में या सड़कों पर भटक रही गायों को पानी पिलाकर और अनाज खिलाकर गौ सेवा की जाने की बात कहीं जाए तो यह सामान्य...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 03:55 AM IST

बागान में बारहमासी नारियल और आम सहित अन्य फलदार व छायादार पौधे लगाए, स्थानीय लोग भी हाे रहे प्रेरित
बाजारों में या सड़कों पर भटक रही गायों को पानी पिलाकर और अनाज खिलाकर गौ सेवा की जाने की बात कहीं जाए तो यह सामान्य सा लगने वाली घटना लगेगी। लेकिन गौ माता को दो समय कृत्रिम बारिश में नहलाकर, ग्लूकोज और कैलोरी युक्त प्रोटीन डाइट खिलाकर पंखे व कूलर की ठंडी हवा के साथ पालन करना कुछ विशेष गौ सेवा कही जा सकती है। गौ सेवा का उद्देश्य यदि मानव सेवा के साथ जुड़ जाएं तो इसे परम सेवा कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगी। कुछ ऐसा ही एक उदाहरण सरायकेला नगर पंचायत क्षेत्र में समाज सेवी राजेश कुमार साहू द्वारा किए जा रहे प्रयासों को कहा जा सकता है। मां की प्रेरणा से वर्ष 1997 में राजेश द्वारा मात्र 3 गायों के साथ शुरू की गई गौ सेवा का एक छोटा सा प्रयास आज 6.5 एकड़ जमीन पर एक छोटी सी संपन्न दुनिया का रूप ले चुकी है।

बाजारों में या सड़कों पर भटक रही गायों की करते हैं सेवा

कौन हैं राजेश कुमार साहू

माता स्वर्गीय जामवंती देवी की प्रेरणा से सरायकेला के थाना चौक निवासी राजेश को बचपन से ही गौ सेवा की ललक रही थी। इंद्रटांडी में अपनी जमीन पर वर्ष 1997 में तीन गायों के साथ उन्होंने फार्मिंग शुरू की। सफरनामा में कई जरूरतमंद परिवार इससे जुड़ते चले गए। वर्ष 2011-12 में तत्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा द्वारा उन्हें दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर प्रयास के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया था। उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों को जानने और समझने के लिए कृषि, पशुपालन व मत्स्य विभाग द्वारा भी फार्म का दौरा किया जाता है।

साल 1997 में 3 गायों से राजेश ने शुरू किया डेयरी फार्म, अब 55 गाय, 65 परिवार को मिल रहा रोजगार

डेयरी फार्म

फार्म का एकमात्र उद्देश्य गौ सेवा के साथ मानव सेवा के प्रयास के रूप में किया जा रहा है। जिसे सभी आवश्यकताओं को एक छोटे से भूमि भाग में जोड़ते हुए विकसित करने का प्रयास है। -राजेश कुमार साहू, फार्म प्रमुख।

जानें....क्या है खास यहां

मानव जीवन के सभी सुविधाओं के अनुरूप यहां 55 गायों का पालन किया जा रहा है।

जमीन के एक बड़े भाग पर आधुनिक तरीके से धान की खेती की जा रही है।

तालाब में मछली पालन के साथ उन्नत किस्म की बकरी पालन, मुर्गी पालन और बत्तक पालन के अलावा एक दर्शनीय सांड व एक घोड़ा भी फार्म की रौनक है।

फार्म में विकसित किए गए बागान में बारहमासी नारियल फलदार व छायादार वृक्ष हैं।

कृषि संबंधी सभी कार्यों के लिए गाय के गोबरों से जैविक खाद तैयार किया जाता है।

प्रतिदिन फार्म से 300 लीटर शुद्ध दूध का उत्पादन किया जाता है। जिसकी बिक्री फार्म में ही ऑन स्पॉट की जाती है।

फार्म से होने वाली आमदनी के लिए फार्म में ही एक बैंक विकसित किया गया है। जिसका लाभ फार्म में सेवा दे रहे 65 परिवारों के बीच समान रूप से बांट लिया जाता है।

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