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छऊ कोर्स में सरायकेला-मानभूम शैली की होगी पढ़ाई

इसी चालू सत्र से कोल्हान विश्वविद्यालय अंतर्गत एकमात्र काशी साहू महाविद्यालय(केएस कॉलेज) में बैचलर इन छऊ डांस का...

Dainik Bhaskar

Jul 09, 2018, 04:00 AM IST
छऊ कोर्स में सरायकेला-मानभूम शैली की होगी पढ़ाई
इसी चालू सत्र से कोल्हान विश्वविद्यालय अंतर्गत एकमात्र काशी साहू महाविद्यालय(केएस कॉलेज) में बैचलर इन छऊ डांस का डिप्लोमा कोर्स शुरू होने जा रहा है। कोल्हान विश्वविद्यालय के सिंडिकेट की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार छऊ नृत्य कला जगत के लिए बहुप्रतीक्षित उक्त शिक्षा के शुभारंभ के लिए काशी साहू महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा कवायद शुरू कर दी गई है। फैकल्टी ऑफ म्यूजिक एंड फाइन आर्ट्स के अंतर्गत दी जाने वाली गुप्त पाठ्यक्रम शिक्षा को लेकर जल्द ही विश्वविद्यालय की एक टीम काशी साहू महाविद्यालय का निरीक्षण कर आवश्यक संसाधनों की स्थिति जानेगा। बहरहाल महाविद्यालय स्तर पर उक्त पाठ्यक्रम की तैयारी को लेकर विभिन्न छऊ नृत्य कला की आवश्यक सामग्रियों को मंगाया जा रहा है। उपलब्ध कराए गए पाठ्यक्रम पर छऊ नृत्य कला के विशेषज्ञों की सहमति ली जा रही है। जिसके तहत महाविद्यालय में दो शैली सरायकेला छऊ नृत्य कला एवं मानभूम छऊ नृत्य कला की शिक्षा दी जाएगी। जिसमें 3 वर्षों के कोर्स में दोनों छऊ नृत्य कला के लिए बेसिक पाठ्यक्रम समान रहेंगे। जबकि प्रायोगिक के लिए शिक्षार्थियों को अपने अपने पसंदीदा छऊ नृत्य कला का चुनाव करना होगा।

केएस कॉलेज में पहुंचा मानभूम शैली छऊ के मास्क।

छऊ साबित होगा मील का पत्थर वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के प्रथम पहल पर शुरू किए गए छऊ नृत्य कला की शिक्षा को वर्तमान में अंजाम मिलने जा रहा है। इससे वर्तमान तक प्रमाणिक इतिहास का बाट जोह रहे छऊ नृत्य कला को प्रमाणिकता मिल सकेगी। अब तक छऊ कलाकार होने की भावना जता रहे कलाकारों को डिप्लोमा प्रमाण पत्र के माध्यम से वास्तविक ज्ञान का प्रमाण मिल सकेगा। जो छऊ नृत्य कला के क्षेत्र में रोजगार एवं नौकरी तक देने में सक्षम होगा।


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