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ज्वर से पीड़ित भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के बाद जागे, भक्तों को दर्शन दिया

रथयात्रा संस्कारों के तहत बीते 28 जून को देव स्नान पूर्णिमा पर खट्टा खाकर ज्वर से पीड़ित हुए महाप्रभु श्री जगन्नाथ...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 04:00 AM IST
रथयात्रा संस्कारों के तहत बीते 28 जून को देव स्नान पूर्णिमा पर खट्टा खाकर ज्वर से पीड़ित हुए महाप्रभु श्री जगन्नाथ के पौराणिक इलाज का शुक्रवार को समापन किया गया। इस अवसर पर अपने बीमार अवस्था में इलाज की दूसरी खुराक दशमूलारिष्ट का सेवन कर महाप्रभु शुक्रवार को स्वस्थ हुए। और नेत्र उत्सव पर नवयौवन रूप में 15 दिनों बाद अपने भक्तों को दर्शन दिए। इस अवसर पर पूजा परंपराओं के आयोजन को लेकर श्री मंदिर के पुजारी पंडित ब्रह्मानंद महापात्र एवं श्री जगन्नाथ सेवा समिति द्वारा कार्यक्रम किए गए। शनिवार को रथ यात्रा प्रारंभ होने के पश्चात गोपबंधु स्थल पर रथ के विश्राम के अवसर पर जगन्नाथ सेवा समिति द्वारा भजन संध्या के कार्यक्रम किए जाएंगे।

विनती कर भगवान को शयन से जगाया

खरसावां | सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में रथयात्रा को लेकर तैयारी जोरों पर है। सरायकेला-खरसावां स्थित जगन्नाथ मंदिरों में भगवान के रथ का रंग रोगन किया जा रहा है। मंदिर में 15 दिनों के शयन के बाद शुक्रवार को भगवान जागृत हुए। इस अवसर पर जगन्नाथ मंदिरों में नेत्र उत्सव का आयोजन किया गया। नेत्र उत्सव पर आरजू-विनती कर भगवान को शयन से जागाया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, मधु और पवित्र जल से भगवान को अभिषेक किया गया।

ऐसे करेंगे रथ यात्रा

14 जुलाई - श्री मंदिर से प्रस्थान, रथ यात्रा प्रारंभ।

15 जुलाई - गुंडिचा मंदिर मौसी बाड़ी आगमन एवं प्रवास।

16 जुलाई- विपदा तारणी व्रत।

18 जुलाई- हेरा पंचमी, रथ भांगिनी।

22 जुलाई- बाउड़ा रथ यात्रा, गुंडिचा मंदिर से प्रस्थान।

23 जुलाई- श्री मंदिर आगमन, हरिशयनी एकादशी के साथ श्री मंदिर का कपाट बंद।

14 जुलाई - श्री मंदिर से प्रस्थान, रथ यात्रा प्रारंभ।

15 जुलाई - गुंडिचा मंदिर मौसी बाड़ी आगमन एवं प्रवास।

16 जुलाई- विपदा तारणी व्रत।

18 जुलाई- हेरा पंचमी, रथ भांगिनी।

22 जुलाई- बाउड़ा रथ यात्रा, गुंडिचा मंदिर से प्रस्थान।

23 जुलाई- श्री मंदिर आगमन, हरिशयनी एकादशी के साथ श्री मंदिर का कपाट बंद।