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अधिवक्ता केसी दास नहीं रहे बहरागोड़ा में हुआ अंतिम संस्कार

सरायकेला में उड़िया भाषा के सभ्यता एवं संस्कृति की बात हो या फिर महाप्रभु श्री जगन्नाथ की सेवा की या धर्म अथवा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 01, 2018, 04:01 AM IST

अधिवक्ता केसी दास नहीं रहे बहरागोड़ा में हुआ अंतिम संस्कार
सरायकेला में उड़िया भाषा के सभ्यता एवं संस्कृति की बात हो या फिर महाप्रभु श्री जगन्नाथ की सेवा की या धर्म अथवा संस्कृति से जुड़ा कोई भी मामला हो तो सबसे पहले ध्यान में आने वाला नाम अधिवक्ता कृष्ण चंद्र दास थे। बीते सोमवार की रात्रि 10:10 बजे पर उन्होंने गोपबंधु चौक स्थित अपने आवास पर आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही रात से ही स्थानीय लोगों का उनके आवास पर पहुंचना प्रारंभ हो गया। मंगलवार की सुबह उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया गया, जहां उना अंतिम सस्कार हुआ। 70 के दशक में जमशेदपुर बार से अपनी वकालत जीवन का प्रारंभ करते हुए 1973 में सरायकेला न्यायालय पहुंचकर प्रैक्टिस शुरू की थी। मातृभाषा उड़िया से अत्यधिक प्रेम के कारण उन्होंने इसके संरक्षण और उत्थान के लिए उड़िया भाषा में वर्ण बोध लिखे। कोल्हान प्रमंडल में उक्त वर्ण बोध का विशेष स्थान आज भी है। सरायकेला की प्रसिद्ध रथयात्रा के विषम दिनों में उन्होंने मात्र 13 लोगों के साथ मिलकर पारंपरिक रथयात्रा में प्राण फूंक दिए। इसका परिणाम है कि आज नियमित रूप से हर्षोल्लास पूर्वक प्रतिवर्ष रथ यात्रा किया जा रहा है।

जिला अधिवक्ता संघ ने की शोक सभा

वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण चंद्र दास के आकस्मिक निधन पर जिला अधिवक्ता संघ द्वारा बार भवन में शोक सभा की गई। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन प्रेसिडेंट विश्वनाथ रथ की अध्यक्षता में की गई उक्त शोकसभा में 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर संघ के देवाशीष ज्योतिषी, के पी दुबे, मधुसूदन महापात्र, असित सारंगी, आशीष पात्र, एम एल चौधरी, जे एन पंडा, जीबी पति आदि मौजूद थे।

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