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सरायकेला छऊ व कलाकारों के उत्थान के लिए 11 प्रस्ताव पारित, खरकई महोत्सव मनेगा

सरायकेला छऊ कला व कलाकारों के उत्थान को लेकर सरायकेला के रांची जगन्नाथ श्री मंदिर में क्षेत्र के छऊ कलाकार व कला...

Danik Bhaskar | May 14, 2018, 04:05 AM IST
सरायकेला छऊ कला व कलाकारों के उत्थान को लेकर सरायकेला के रांची जगन्नाथ श्री मंदिर में क्षेत्र के छऊ कलाकार व कला प्रेमियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। झामुमो नेता सह सरायकेला नगर पंचायत उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी के प्रयास से की गई उक्त बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ छऊ कलाकार अपनी कवि ने की। इस मौके पर उपस्थित सभी कलाकार एवं कला प्रेमियों ने एक स्वर में कहा कि विभाग की लापरवाही और उपेक्षा के कारण छऊ कलाकारों की आर्थिक स्थिति दयनीय एवं गंभीर बनी हुई है। जबकि छऊ महोत्सव कार्यक्रम के नाम से प्राप्त हो रहे भारी रकम का या तो बंदरबांट हो रहा है या फिर बाहर से सितारों के नाम से आ रहे कलाकारों तक मोटी रकम पहुंच रहा है। बैठक में कहा गया कि छऊ नृत्य को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने एवं सरायकेला का नाम रोशन करने के लिए कलाकारों की अहम भूमिका रही है। छऊ नृत्य कला एवं कलाकारों के संरक्षण के लिए वर्ष 1961 में स्थापित राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र भी छऊ कलाकारों के लिए झुनझुना साबित हो रहा है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरायकेला छऊ नृत्य कला के उत्थान के लिए दो दिवसीय खरकई महोत्सव मनाया जाएगा। इसके अलावा बैठक में कुल 11 प्रस्ताव पारित कर छऊ कला एवं कलाकारों के उत्थान तथा संरक्षण के लिए राज्यपाल एवं राष्ट्रपति से मिलने का निर्णय लिया गया। बैठक में छऊ के विभिन्न संस्थानों से आए कलाकारों में श्यामापद नंदा, शिवचरण साहू, शशांक शेखर महंती, सुनील कुमार दुबे, कामाख्या प्रसाद दुबे, कैलाश प्रताप सिंह देव, आशीष कुमार आदि ने अपने विचार रखे।

कलाकारों के उत्थान के लिए बैठक में शामिल छऊ कलाकार।

बैठक में ये प्रस्ताव हुए पारित

छऊ कलाकारों का परिचय पत्र एवं बायोडाटा बनाया जाएगा। छऊ कलाकारों की परिचय पुस्तिका बनाई जाएगी। छऊ महोत्सव के स्थान पर पारंपरिक प्रथा के अनुसार केवल चैत्र पर्व वसंत उत्सव मनाया जाएगा। छऊ नृत्य कलाकार एवं पाट भोक्ताओं को उचित मानदेय समय पर दिया जाए। छऊ नृत्य कला से जुड़े महान एवं पुराने कलाकारों का जीवन वृतांत परिचय पुस्तिका से कराने की व्यवस्था की जाए। वरीय छऊ नृत्य कलाकारों को उचित पेंशन राशि का भुगतान किया जाए। राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र मैं रिक्त पदों को यथाशीघ्र भरा जाए। छऊ महोत्सव के दौरान प्रतियोगिता में विभिन्न नृत्य मंडली के चयन के लिए निष्पक्ष एवं वरिष्ठ कलाकारों को रखा जाए।

अतनु कवि ने कहा कि छऊ नृत्य कला को देखने के लिए कभी विदेशी सैलानी सरायकेला पहुंचा करते थे। परंतु वर्तमान में बाहर से गैर छऊ कलाकारों को बुलाकर छऊ की परंपराओं को नष्ट करते हुए इसे इंटरटेनमेंट बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जो कि इसके मूल के लिए घातक है।

अहृलाद कुमार महंती ने कहा कि छऊ मंच पर सिर्फ छऊ की ही बात होनी चाहिए। परंतु बीते वर्षों में चैत्र पर्व और छऊ कला के रिचूअल के साथ मजाक किया जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ी भी इस नृत्य कला से दूर हो रही है। कॉलेज में इसकी पढ़ाई की बात शुरू कर ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

शिवचरण साहू ने कहा कि आर्थिक अभाव का दंश झेल रहे छऊ कलाकार अपने सहित आने वाली पीढ़ी को भी इससे अलग कर रहे हैं। जो छऊ नृत्य कला के संरक्षण की राह में घातक है। वही महोत्सव के नाम पर भारी राशि सितारे के रूप में बाहर से आ रहे कलाकार ले जा रहे हैं।