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राज्य में 148 उड़िया स्कूल संचालित 100 नए खुलेंगे, बोर्ड में प्रस्ताव पास

उड़िया भाषा के संरक्षण के उद्देश्य से ओडिशा सरकार की उत्कल सम्मेलनी द्वारा 100 उड़िया स्कूल खोले जाएंगे। यह सभी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 12, 2018, 04:05 AM IST

राज्य में 148 उड़िया स्कूल संचालित 100 नए खुलेंगे, बोर्ड में प्रस्ताव पास
उड़िया भाषा के संरक्षण के उद्देश्य से ओडिशा सरकार की उत्कल सम्मेलनी द्वारा 100 उड़िया स्कूल खोले जाएंगे। यह सभी स्कूल पूर्व की तरह झारखंड सरकार के स्कूलों में संचालित होंगे। इसमें शिक्षक-शिक्षिकाएं व उड़िया भाषा की पाठ्यपुस्तक की व्यवस्था उत्कल सम्मेलनी द्वारा किया जाएगा। पूरे झारखंड में पहले से 148 उड़िया स्कूल संचालित हैं (सरायकेला-खरसावां जिले में 48) इसमें उत्कल सम्मेलनी द्वारा उड़िया भाषा के शिक्षक दिए गए हैं। पठन-पाठन की सामग्री ओडिशा सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। भुवनेश्वर के कृषि विश्वविद्यालय में उत्कल सम्मेलन की बोर्ड की बैठक में इस पर चर्चा की गई। इसमें पूर्वी सिंहभूम जिले से प्रतिनिधि के रूप में रवि मिश्रा, पश्चिमी सिंहभूम जिले से सरोज प्रधान व पीके नंदा, सरायकेला-खरसांवा जिले से सुशील सारंगी एवं अतनु कवि भी शामिल हुए। उक्त बैठक में झारखंड से प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों ने 100 नए स्कूल संचालन का प्रस्ताव को रखा। इस पर बोर्ड की बैठक ने सहमति जताई।

उत्कल सम्मेलनी के बोर्ड की बैठक में शामिल चेयरमैन व अन्य।

मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने का लिया निर्णय

सभी स्कूलों के दो-दो मेधावी छात्रों को प्रत्येक वर्ष उड़ीसा के उत्कल सम्मेलनी द्वारा छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसके लिए पूर्व से मेधावी छात्रों का चयन होगा। ओड़िया पाठ्यपुस्तकों को जल्द ही ओडिशा सरकार द्वारा उपलब्ध करा दिया जाएगा। झारखंड एवं अन्य क्षेत्र में उत्कल सम्मेलनी द्वारा चलाए जा रहे हैं ओड़िया स्कूलों पठन पाठन का निरीक्षण केंद्रीय टीम द्वारा किया जाएगा।

शिक्षकों को मात्र तीन हजार मानदेय, असंतोष

उत्कल सम्मेलनी द्वारा संचालित सरायकेला-खरसावां जिले के 48 स्कूलों में उपलब्ध कराए गए हैं। शिक्षक-शिक्षिकाओं को प्रत्येक माह मात्र 3000 रुपए मानदेय मिलता है। साल में कुल मिलाकर तीस हजार (2 माह को छोड़कर) भुगतान किया जाता है। जिससे शिक्षक -शिक्षिकाओं में असंतोष है। प्रतिनिधियों द्वारा कई बार मानदेय बढ़ाने को लेकर केंद्रीय कमेटी से बातचीत की है। लेकिन शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानजनक मानदेय नहीं मिल सका है।

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