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शिक्षिका की हत्या के छठे दिन खापरसाई स्कूल में पढ़ाई शुरू, 45 में 23 बच्चे पहुंचे

सरायकेला प्रखंड के खापरसाई गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बीते 3 जुलाई को घटी शिक्षिका सुकरू हस्सा की गर्दन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 10, 2018, 04:10 AM IST

शिक्षिका की हत्या के छठे दिन खापरसाई स्कूल में पढ़ाई शुरू, 45 में 23 बच्चे पहुंचे
सरायकेला प्रखंड के खापरसाई गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बीते 3 जुलाई को घटी शिक्षिका सुकरू हस्सा की गर्दन काटकर हत्या के छठवें दिन सोमवार को पहली बार विद्यालय पठन-पाठन के लिए खुला। बच्चों की शिक्षा को लेकर गांव एवं विद्यालय में पसरा हुआ दहशत का सन्नाटा सोमवार को विद्यालय का ताला खोलते ही आंशिक रूप से खत्म होता हुआ देखा गया। विद्यालय पहुंचे बच्चे अभी भी घटना को लेकर सहमे हुए देखे गए। परंतु शिक्षा विभाग के सफल प्रयास और प्रतिनियुक्त, शिक्षकों एवं अभिभावकों के सहयोग से गांव क्षेत्र में लगभग थम सी गई शिक्षा व्यवस्था को पुनः सुचारु किया जा सका है।

कुछ ऐसा रहा नजारा

विद्यालय खुलने के पहले दिन सभी अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने आए। और कुछ देर तक रुक कर बच्चों को बीती घटना पर ध्यान नहीं देने की बात समझाते हुए देखे गए। इस दौरान विद्यालय में नामांकित कुल 45 बच्चों में से 23 बच्चे ही विद्यालय पहुंचे। सदमे में चल रहे बच्चों की मनोभावना को समझते हुए विद्यालय में प्रतिनियुक्त शिक्षक हीरालाल महतो एवं कृष्णा महतो ने कक्षा पहली से पांचवी तक के बच्चों के कक्षा का संचालन एक ही कमरे में किया। बच्चों के विद्यालय में प्रवेश के बाद भीतर की ओर से विद्यालय का प्रवेश द्वार ताला लगाकर बंद रखते हुए निजी स्तर पर सुरक्षा की व्यवस्था की गई। इस दौरान विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष डूबी बारला भी विद्यालय में उपस्थित रहे। तथा पठन पाठन के साथ मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन किया गया है। संकुल साधन सेवी राजेंद्र नंद द्वारा विद्यालय की मॉनिटरिंग की गई।

विद्यालय का ताला खोलते ही लौटी रौनक, एक ही कमरे में बैठे सभी बच्चे

खापरसाई प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के साथ प्रतिनियुक्त दोनों शिक्षक।

समिति के अध्यक्ष बोले: आरोपी का परिवार गांव आए

शिक्षिका की निर्मम हत्या करने वाले हत्यारे हरि हेंब्रम एवं उसके परिवार को ग्रामीणों द्वारा घटना के बाद बैठक कर गांव से बहिष्कृत कर दिया गया है। उक्त विषय पर विशेष पक्ष रखते हुए विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष डूबी बारला ने कहा कि बहिष्कृत परिवार गांव में आए। और घटना के संबंध में विस्तार पूर्वक ग्रामीणों के साथ वार्ता करें। दोष नहीं पाए जाने की स्थिति में पूरे परिवार का वार्ता के लिए स्वागत किया जाएगा।

भास्कर न्यूज | सरायकेला

सरायकेला प्रखंड के खापरसाई गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बीते 3 जुलाई को घटी शिक्षिका सुकरू हस्सा की गर्दन काटकर हत्या के छठवें दिन सोमवार को पहली बार विद्यालय पठन-पाठन के लिए खुला। बच्चों की शिक्षा को लेकर गांव एवं विद्यालय में पसरा हुआ दहशत का सन्नाटा सोमवार को विद्यालय का ताला खोलते ही आंशिक रूप से खत्म होता हुआ देखा गया। विद्यालय पहुंचे बच्चे अभी भी घटना को लेकर सहमे हुए देखे गए। परंतु शिक्षा विभाग के सफल प्रयास और प्रतिनियुक्त, शिक्षकों एवं अभिभावकों के सहयोग से गांव क्षेत्र में लगभग थम सी गई शिक्षा व्यवस्था को पुनः सुचारु किया जा सका है।

कुछ ऐसा रहा नजारा

विद्यालय खुलने के पहले दिन सभी अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने आए। और कुछ देर तक रुक कर बच्चों को बीती घटना पर ध्यान नहीं देने की बात समझाते हुए देखे गए। इस दौरान विद्यालय में नामांकित कुल 45 बच्चों में से 23 बच्चे ही विद्यालय पहुंचे। सदमे में चल रहे बच्चों की मनोभावना को समझते हुए विद्यालय में प्रतिनियुक्त शिक्षक हीरालाल महतो एवं कृष्णा महतो ने कक्षा पहली से पांचवी तक के बच्चों के कक्षा का संचालन एक ही कमरे में किया। बच्चों के विद्यालय में प्रवेश के बाद भीतर की ओर से विद्यालय का प्रवेश द्वार ताला लगाकर बंद रखते हुए निजी स्तर पर सुरक्षा की व्यवस्था की गई। इस दौरान विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष डूबी बारला भी विद्यालय में उपस्थित रहे। तथा पठन पाठन के साथ मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन किया गया है। संकुल साधन सेवी राजेंद्र नंद द्वारा विद्यालय की मॉनिटरिंग की गई।

ग्रामीणों ने प्रशासनिक उदासीनता की बात भी रखी

विद्यालय की शिक्षिका की हत्या जैसे दिल दहलाने वाले बड़े मामले में भी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इस संबंध में ग्रामीणों के साथ मिलने या फिर माहौल सुव्यवस्थित करने जैसे प्रयास नहीं किए जाने की बात स्थानीय ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद अब तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी या पदाधिकारी द्वारा गांव की सूध नहीं ली गई है।

जागरुकता जरुरी

दहशत भरे माहौल से ग्रामीणों, ग्रामीण अभिभावकों एवं बच्चों को उबारने के लिए हालांकि जिला शिक्षा अधीक्षक फूलमनी खलको द्वारा अपनी शिक्षा विभाग की टीम के साथ बेहतर प्रयास किए गए हैं। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति को शत प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

ग्रामीणों एवं ग्रामीण अभिभावकों तथा विद्यालय के बच्चों के साथ मिलकर शिक्षा का एक सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया गया है। आने वाले दिनों में पूरी व्यवस्था पटरी पर लौटने तक प्रयास को जारी रखा जाएगा।” फूलमनी खलको, जिला शिक्षा अधीक्षक।

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