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गलत तरीके से स्कूल का हुआ विलय, दूसरे टोले में पढ़ने नहीं जाएंगे बच्चे

गलत तरीके से हुए विद्यालय विलय को लेकर विलय के करीब दो महीने बाद भी ग्रामीणों में समान रूप से असंतोष फैला हुआ है।...

Dainik Bhaskar

Jul 17, 2018, 04:15 AM IST
गलत तरीके से स्कूल का हुआ विलय, दूसरे टोले में पढ़ने नहीं जाएंगे बच्चे
गलत तरीके से हुए विद्यालय विलय को लेकर विलय के करीब दो महीने बाद भी ग्रामीणों में समान रूप से असंतोष फैला हुआ है। गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बड़ा काकड़ा पंचायत के धातकीडीह गांव के ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर सोमवार को बैठक की। गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में हुई उक्त बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान जोगाय महतो ने की। सभी ग्रामीण अभिभावकों ने एक स्वर में कहा कि विलय किए गए विद्यालय में इस विद्यालय के बच्चे नहीं जाएंगे। उन्होंने विद्यालय विलय को पूरी तरह से गलत बताया। कहा, विद्यालय को लेकर उबड़-खाबड़ रास्ते और गड्ढे होने की जो कमियां बताई गई थीं, उसे ग्रामीण जन सहयोग से पूरा कर लिया गया है। ऐसी स्थिति में विद्यालय विलय के आदेश को तत्काल रद्द करते हुए मूल विद्यालय के संचालन शुरू किए जाने की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई। बैठक को मुख्य रूप से गांव के नील महतो, निमाय महतो, कौशल मंडल, सूरज महतो, फेंकू सरदार, अधीन महतो एवं संतोष महतो ने संबोधित किया।

धातकीडीह गांव के ही टोला करकटाडीह के नव प्राथमिक विद्यालय में स्कूल का विलय, लोगों में रोष

विरोध जताते ग्रामीण और उपस्थित छात्र।

विभागीय आदेशानुसार विलय के बाद बंद कर दिया गए प्राथमिक विद्यालय धातकीडीह के बच्चे बाहर बरामदे में ही बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित होता देख गांव के ही दो शिक्षित युवक सूरज महतो एवं कौशल मंडल द्वारा बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

बरामदे में शिक्षा ले रहे बच्चे

क्या है मामला: लगभग 70 साल पूर्व स्थापित प्राथमिक विद्यालय धातकीडीह का विलय विभागीय आदेशानुसार नजदीक के धातकीडीह गांव के ही टोला करकटाडीह के नव प्राथमिक विद्यालय में कर दिया गया है। इतना ही नहीं प्राथमिक विद्यालय धातकीडीह में कुल 48 बच्चे नामांकित हैं। जबकि विलय किए गए विद्यालय नव प्राथमिक विद्यालय करकटाडीह में मात्र 14 बच्चे ही नामांकित हैं। ग्रामीण अभिभावकों का मानना है कि धातकीडीह स्थित प्राथमिक विद्यालय गांव के बीचो-बीच होने के कारण बच्चों के विद्यालय आवागमन के लिए सुरक्षित है। जबकि करकटाडीह स्थित विद्यालय जाने के लिए बच्चों को मुख्य सड़क से होकर जाना होगा।

ग्रामीणों की परेशानियों को देखे बिना गलत तरीके से अधिक छात्र संख्या वाले गांव के पुराने स्कूल का किया विलय


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