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अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौनाचार के आरोपी पति को मिली आठ साल की सजा

तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज द्वितीय गुलाम हैदर ने सत्रवाद संख्या 209/13 में प|ी को प्रताड़ित करने वाले...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 04:00 AM IST

तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज द्वितीय गुलाम हैदर ने सत्रवाद संख्या 209/13 में प|ी को प्रताड़ित करने वाले पेटरवार थाना क्षेत्र निवासी सुभाष टुडू को अपराध की धारा 377 एवं 323 भादवि (अप्राकृतिक यौनाचार व गाली गलौज) का दोषी पाते हुए आठ वर्ष की सजा और 10000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि नहीं देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा सुनाई। वहीं अन्य अारोपी सुभाष टुडू के पिता रामजीत मांझी, माता सुकरमुनि देवी एवं चचेरे भाई पूरन मांझी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

सुभाष की प|ी ने अपने पति सहित रामजीत मांझी, सुकरमुनि देवी, पूरन मांझी तथा अन्य के विरुद्ध दहेज में तीस हजार रुपए एवं बाइक की मांग करने का आरोप जड़ा था। साथ ही बताया कि पति उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार व गाली गलौज करते थे। जिसे लेकर सुभाष टुडू की प|ी ने एक परिवाद पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। जिसे जांच के लिए पेटरवार थाने भेजा गया। आरोप पत्र समर्पित होने के बाद मामला स्थानांतरित होकर हैदर के न्यायालय में आया। न्यायालय में उपलब्ध गवाह एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद हैदर ने रामजीत मांझी, सुकरमुनि देवी एवं पूरन मांझी के विरुद्ध गवाह की कमी पाते हुए बरी कर दिया। वहीं सुभाष टुडू को दोषी पाया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपरलोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बहस की।

विवाहिता को केरोसिन छिड़ककर मार डाला था, तीन दोषी करार

बोकारो | अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम रंजीत कुमार की अदालत ने सत्र वाद संख्या 180/11 की सुनवाई करते हुए विवाहिता नीलम देवी को जलाकर मार डालने के तीन आरोपियों मुनीम चंद्र गुप्ता, दशरथ गुप्ता और मिनी देवी को भादवि की धारा 302 का दोषी पाया है। चास थाना कांड संख्या 257/10 में दर्ज प्राथमिकी में पति गणेश कुमार गुप्ता, ससुर हरिनारायण गुप्ता, भैंसुर मुनीम चंद्र गुप्ता व दशरथ गुप्ता, देवर मोहन गुप्ता, गोतनी मिनी देवी, सीता देवी एवं सास शकुंतला देवी पर दहेज की मांग को लेकर केरोसिन छिड़कर जला कर हत्या करने का आरोप था।

घटना सात दिसंबर 2010 की है। गंभीर रूप से जली विवाहित नीलम देवी को बीजीएच में भर्ती कराया गया था। जहां तात्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी निर्मल टोप्पो ने उसका बयान लिया, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। बयान में राणा प्रताप नगर निवासी नीलम देवी ने कहा था कि उसकी शादी 24 मई 2001 को गणेश कुमार गुप्ता के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही उसका पति 50 हजार रुपए की मांग को लेकर प्रताड़ित किया करता था। इसको लेकर पंचायती भी हुई थी। 7 दिसंबर 2010 को रात में वह अपने कमरे में सो रही थी। उसी वक्त आरोपी कमरे में आए और उसे पकड़कर केरोसिन छिड़कर आग लगा दी। वह आग से बचने के लिए घर के कुएं में कूद गई। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग वहां जुटे और उसे कुएं से निकालकर इलाज के लिए बीजीएच में भर्ती कराए। इलाज के क्रम में 27 जनवरी 2011 को उसकी मौत हो गई।

भास्कर न्यूज | तेनुघाट

तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज द्वितीय गुलाम हैदर ने सत्रवाद संख्या 209/13 में प|ी को प्रताड़ित करने वाले पेटरवार थाना क्षेत्र निवासी सुभाष टुडू को अपराध की धारा 377 एवं 323 भादवि (अप्राकृतिक यौनाचार व गाली गलौज) का दोषी पाते हुए आठ वर्ष की सजा और 10000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि नहीं देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा सुनाई। वहीं अन्य अारोपी सुभाष टुडू के पिता रामजीत मांझी, माता सुकरमुनि देवी एवं चचेरे भाई पूरन मांझी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

सुभाष की प|ी ने अपने पति सहित रामजीत मांझी, सुकरमुनि देवी, पूरन मांझी तथा अन्य के विरुद्ध दहेज में तीस हजार रुपए एवं बाइक की मांग करने का आरोप जड़ा था। साथ ही बताया कि पति उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार व गाली गलौज करते थे। जिसे लेकर सुभाष टुडू की प|ी ने एक परिवाद पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। जिसे जांच के लिए पेटरवार थाने भेजा गया। आरोप पत्र समर्पित होने के बाद मामला स्थानांतरित होकर हैदर के न्यायालय में आया। न्यायालय में उपलब्ध गवाह एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद हैदर ने रामजीत मांझी, सुकरमुनि देवी एवं पूरन मांझी के विरुद्ध गवाह की कमी पाते हुए बरी कर दिया। वहीं सुभाष टुडू को दोषी पाया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपरलोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बहस की।

दो आरोपियों सास व ससुर की हाे चुकी है मौत

इस मामले को लेकर पति गणेश के खिलाफ पूर्व में ही सुनवाई हो पूरी हो चुकी है। जबकि, दो आरोपी सास शकुंतला देवी और ससुर हरिनारायण गुप्ता की मौत हो चुकी है। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने मुनीम चंद्र गुप्ता, दशरथ गुप्ता और मिनी देवी को भादवि की धारा 302 का दोषी पाया। वहीं, मोहन और सीता को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक आरके राय ने बहस की।

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