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नर्रा में पुलिस पर हमला करने वाले 19 लोगों को मिली सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा

तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज द्वितीय गुलाम हैदर ने नर्रा में पुलिस पर हमला करने के मामले में 19 लोगों को सात...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 04:05 AM IST

तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज द्वितीय गुलाम हैदर ने नर्रा में पुलिस पर हमला करने के मामले में 19 लोगों को सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सजा पानेवालों में पिंटू कोइरी महतो, सूरज वर्णवाल, नेमचंद साव, पवन सिंह, भुवनेश्वर रविदास, डहरू महतो, जितेंद्र महतो, बबलू रजक, भोला महतो, चंदन दसौंधी, भीम नायक, हरि वर्णवाल, मोची ठाकुर उर्फ लालचंद ठाकुर, दीपू पंडित, केवल तुरी, महेंद्र महतो, सागर तुरी, मनोज तुरी एवं राजकुमार कोइरी शामिल हैं। सभी को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से सजा सुनाई गई। सभी को जेल भेज दिया गया।

चंद्रपुुरा के तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारिका राम ने 4 अप्रैल 2017 को मामला दर्ज कराया था कि नर्रा में बच्चा चोर कहकर एक युवक को पकड़ कर मारपीट करने की सूचना मिली। पुलिस बल के साथ नर्रा तुरी टोला पहुंचे तो देखा कि तीन-चार सौ महिला पुरूष एक युवक को घेरकर बच्चा चोर कहकर पीट रहे हैं। पूछने पर उसने अपना नाम शमसुद्दीन अंसारी बताया। युवक को पीट रहे लोगों से बचाकर उसे इलाज के लिए ले जाना चाहे तो भीड़ ने पुलिस को घेरकर धक्का-मुक्की देते हुए जख्मी को ले जाने से रोक दिया। पुलिस गाड़ी में भी तोड़फोड़ की।

भीड़ को बार-बार समझाया गया, लेकिन अनुरोध के बावजूद लोगों ने बात नहीं सुनी और उत्तेजित होकर हमलोगों पर जान मारने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की नियत से पत्थरबाजी करने लगे। थानाप्रभारी के सिर एवं हाथ में पत्थर लगे। साथ ही पुलिस जवान उमाशंकर सिंह को पीठ पर, कर्ण कुमार को पैर में चोट लगी। सूचना मिलने पर बेरमो, नावाडीह, दुग्दा से सशस्त्र बल यहां पहुंचा और भीड़ को खदेड़ दिया। इसके बाद जख्मी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पूछताछ के क्रम में स्थानीय ग्रामीणों ने अभियुक्तों के नाम बताए। साथ ही अन्य 300-400 ग्रामीणों के बारे में बताया।

इस तरह मिली है सजा

अदालत ने अभियुक्तों के खिलाफ धारा 147 में 2 वर्ष सश्रम कारावास एवं 500 रुपाए जुर्माना, धारा 323 में एक वर्ष की सजा एवं 500 रुपए जुर्माना, धारा 325 में तीन साल की सजा एवं 1000 रुपए जुर्माना, 332 में तीन साल की सजा एवं 1000 रुपए का जुर्माना, 333 में सात साल सश्रम कारावास सजा एवं 2000 रुपए जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त कारावास, 353 में दो साल की सजा एवं 1000 रुपए की जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा, 427 में दो वर्ष सश्रम कारावास एवं 1000 रुपए की जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा, 3(2) में तीन साल की सजा एवं 1500 रुपए जुर्माना, नहीं देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा दी गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी। इस तरह सात साल की सजा हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक संजय सिंह ने बहस की।

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