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घातक कथाएं / निश्छल चेले और कुटिल साधक की नुकीली कथा



babaji and chele funny satire story
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babaji and chele funny satire story

Dainik Bhaskar

Oct 06, 2018, 11:22 AM IST

सड़क के बीचों-बीच एक नुकीला पत्थर उभरा हुआ था। लोग निकलते। ठोकर खाते। गाली देते हुए आगे निकल जाते। पास ही चबूतरे पर एक साधक बैठे हुए थे। ठोकर खाकर आगे जाते आदमी को वो रोकते। गालियां देने के लिए धिक्कारते। क्रोध करने के लिए फटकारते। पत्थर को दूसरों के लिए उखाड़कर नहीं फेंकने के स्वार्थीपने पर प्रताड़ते। कुल मिलाकर उसे पास बैठाकर काफी देर तक समझाते। व्यक्ति नई अनुभूति के साथ वहां से जाता। कुछ बरस बीते। पत्थर आज भी वहीं है। साधक ख्याति प्राप्त महात्मा हो चुके हैं। खाली क्षणों में अपने स्वर्ग जैसे तीन मंजिला भवन की खिड़की से जमीन पर गड़े उस पत्थर को बड़े गौर से देखते हैं। इन पलों में उनके शिष्य गुरु के चेहरे के आध्यात्मिक भाव देख निहाल हो जाते हैं।

 

मॉरल ऑफ द स्टोरी - लोग ठोकर नहीं खाएंगे तो गुरु की शरण में कैसे आएंगे? रास्ते में पत्थर बिछाते रहें, चेलों की संख्या बढ़ती जाएगी। 

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