इंटरव्यू जरा हटके / रंग बदलने वाले नेताओं के साथ तुलना अपमानजनक



funny interview between reporter and girgit
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funny interview between reporter and girgit

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 04:04 PM IST

चुनावों की घोषणा के साथ ही कई नेताओं के पाला बदलने की खबरें आ रही हैं। यह खबर भी आ रही है कि सपा और बसपा अगला चुनाव एक ही रंग के झंडे 'लाल प्लस नीले' के बैनर तले चुनाव लड़ेगी। इस बीच माहौल पर होली का रंग भी चढ़ने लगा है तो हमें लगा कि इस बार इंटरव्यू के लिए गिरगिट से अच्छा और कोई नहीं हो सकता। तो हमने उन्हें ही ढूंढ निकाला। 


 
 
रिपोर्टर : जिस तरह से आप अपना रंग बदलते हैं, आपको देख-देखकर भारतीय नेता भी रंग बदलने लगे हैं। इस आरोप पर आप क्या कहेंगे? 
गिरगिट : ऐसा तो नहीं है। मैंने तो आज तक सभी नेताओं को सफेद झक्क कपड़ों में ही देखा है। हां, कोई-कोई भगवा दुपट्‌टा ओड़ लेता है तो कोई नेहरू टोपी या लाल टोपी लगा लेता है।

 

रिपोर्टर : मैं नेताओं के कपड़ों की बात नहीं कर रहा हूं, उनके चाल-चरित्र की बात कर रहा हूं। 
गिरगिट: चलिए, चरित्र भी देख लीजिए। हर चरित्र पर काले धब्बे ही तो हैं। कहां रंग बदला? जैसे धब्बे पहले थे, वैसे धब्बे आज हैं। एकदम काले-काले।

 

रिपोर्टर : आप बहस को दूसरी दिशा में मोड़ रहे हैं। नेता चाहे किसी भी पार्टी के हों, सत्ता मिलते ही बदल जाते हैं या सत्ता के लालच में पाला बदल लेते हैं, जैसे आप रंग बदल लेते हों। 
गिरगिट : रिपोर्टरजी, यह तो आप हमारे साथ ज्यादती कर रहे हैं।

 

रिपोर्टर : लेकिन उन्हें रंग बदलना आपने ही तो सिखाया ना? ये बात मानते क्यों नहीं?
गिरगिट (उत्तेजित होते हुए) : खामोश...! हम रंग बदलते हैं क्योंकि प्रकृति ने हमें इसकी अनुमति दी है। आपके नेता रंग बदलते हैं अपने स्वार्थ के कारण। इसलिए कहे देते हैं, अपने नेताओं की तुलना हमारे साथ तो भूलकर भी न कीजिए। 

 

रिपोर्टर : फिर भी लोग कहने से कहां चूकते हैं कि नेताओं ने गिरगिट की तरह रंग बदल लिया। 
गिरगिट (दुखी स्वर में) : हां, हम कहने वालों का मुंह तो बंद नहीं कर सकते। पर, सच बताए तो जब हम यह सुनते हैं तो हमारे आत्मसम्मान को गहरा धक्का पहुंचता है।... और हां, आपने भी हमें और अपने नेताओं को एक साथ रखकर हमारा दिल दुखा दिया है। इसलिए आप तो फूट ही लीजिए। 

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