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ह्यूमर इन रूमर / सरकार ने की फेक नेताओं की पहचान, अब बैन की तैयारी



government has to ban fake neta here is some symptoms of fake neta
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government has to ban fake neta here is some symptoms of fake neta

Dainik Bhaskar

Oct 06, 2018, 12:42 PM IST

सरकार ने फेक नेताओं की पहचान कर उन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है। ऐसे नेताओं की पहचान करने के लिए हाल ही में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। समिति ने ऐसे फेक नेताओं पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करते हुए लिखा - ‘जैसे एक गंदी मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है, उसी तरह फेक नेता भी राजनीति के पवित्र सागर को गंदा कर देंगे। इसलिए इन पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें राजनीति से बाहर फेंक देना चाहिए।’ समिति ने अपनी रिपोर्ट में फेक नेताओं के 5 कु-लक्षण गिनाए हैं :

 

जैसी कथनी, वैसी करनी: ये वे होते हैं, जो जैसा बोलते हैं, वैसा ही करते हैं। इनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होता। ये ईमानदारी पर दूसरों को केवल ज्ञान नहीं देते, बल्कि खुद भी ईमानदार होते हैं। 

 

धर्म और जाति का सहारा नहीं लेते : ये वोट लेने के लिए न धर्म का सहारा लेते हैं और न जाति का। वैसे तो इन्हें चुनाव का टिकट ही नहीं मिलता। गलती से मिल भी जाए तो जीतते नहीं। मौजूदा राजनीति के लिए ये सबसे घातक हैं।

 

भाई-भतीजावाद पर भरोसा नहीं: ये न अपने बेटे-बेटियों को आगे बढ़ाते हैं, न अपने किसी रिश्तेदार को। ये अपने उत्तराधिकारी का चयन केवल मेरिट के आधार पर करते हैं। समाज-सेवा का कीड़ा इन्हें हर वक्त काटता रहता है।

 

कमीशनखोरी से परहेज : ये कमीशनखोरी से परहेज कर नेतागिरी के पावन उद्देश्य को ही डिफिट कर देते हैं। ऐसे नेता पूरी भारतीय राजनीति पर कलंक और देश के विकास में बाधक हैं। 

 

संस्कार पैदाइशी इनबिल्ट : ऐसे फेक नेताओं के मुंह पर अपने विरोधियों के लिए भी सम्मान का भाव रहता है। ये कभी कोई गाली-गलौज नहीं करते। 

 

विपक्ष ने उठाए सवाल : इस बीच विपक्ष ने समिति की पूरी रिपोर्ट को ही फेक करार दिया है। विपक्ष ने पूछा-ऐसे नेता हैं कहां? न इधर हैं, न उधर। विपक्ष ने कहा कि रिपोर्ट तैयार करना पैसों की बर्बादी से ज्यादा कुछ नहीं है। सरकार इस मुद्दे को उठाकर असली मुद्दों से बचना चाहती है।

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