कटाक्ष / इस स्पीड से 2025 तक सिर्फ देशद्रोही बचेंगे

देशद्रोहियों के बढ़ने की वजह क्या है? वही वजह जो पंचर की दुकानों के पास ज्यादा पंचर होने वाली गाड़ियों के पीछे होती है।

Hindi satire on Anti Nationalism
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Hindi satire on Anti Nationalism

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2018, 03:50 PM IST

समय बहुत देशभक्ति वाला चल रहा है। हमें लगता है कि फलां सिम इस्तेमाल कर हम ज्यादा देशभक्त हो जाएंगे, बाइक से लेकर फिल्म तक देशभक्ति के कंधे पर सवार है। मोबाइल ऐप से लेकर सीमेंट की बोरी तक देशप्रेम के नाम पर बेची जा रही है। विज्ञापनों की भाषा देखिए, नमक भी देश का है, सीमेंट भी देश की मिट्टी से बन रहा है। सवाल उठता हैकि क्या दूसरे ब्रैंड वाला जिस मिट्टी से वही सामान बना रहा है वो पुर्तगालियों की है? देश की आवाज, देश का नमक, देश की बैट्री, देश का नींबूपानी, देश का मंजन, देश का टीवी, देश का नेता। सब कुछ देश का ही है, तो देशद्रोहियों की चिंता क्यों सताती है? ये तमाम चीजें मिलकर भी असर नहीं कर पाती क्या?


हमें ये तय करना चाहिए कि देश का हर आदमी देश के तमाम ब्रैंड इस्तेमाल करे ताकि देशद्रोह गलती से भी छू न जाए। समय बहुत ही देशभक्ति वाला चल रहा है। हर बहस का रास्ता देशभक्ति की गली से होकर भले न जाए, अंत में मंजिल उसे देशद्रोह या देशभक्ति वाली ही मिलती है। इस वक़्त देश में मात्र दो तरह के लोग हैं- पहले देशभक्त, दूसरे वो, जिन्हें पहलों ने खुद से अलग बता दिया है। मनुष्य की आंखें कितने रंग पहचान सकती हैं ये हमें नहीं पता लेकिन आजकल वो सिर्फ देशद्रोही या देशभक्त को पहचान पा रही हैं।


आपको नहीं लगता कि देश में आजकल देशद्रोही ज्यादा ही बढ़ गए हैं? मजेदार तो ये कि ये तब से बढ़ा है, जब से देशभक्ति बढ़ाने के प्रयास बढ़े हैं। इस मुल्क में बिना प्रयास के कुछ भी नहीं बढ़ सकता है। शेष जिस चीज के संवर्धन की कोशिश की जाती है, उसमें भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है। आप हिन्दी बचाने निकलिए, हिन्दी खतरे में पड़ जाएगी। गंगा बचाने निकलिए वो प्रदूषित हो जाएगी। हिन्दी बचाने और गंगा संवारने के लिए बाद में कुछ हो न हो, कई घर दुतल्लों और चारतल्लों में बदल जाते हैंं। देशभक्ति बचाने वाले भी आजकल तल्ले खड़े कर रहे हैं, डर लगता हैकिसी रोज़ किसी तल्ले से देशभक्ति के ही पैर न फिसल जाएं। तो देशद्रोहियों के बढ़ने की वजह क्या है? वही वजह जो पंचर की दुकानों के पास ज्यादा पंचर होने वाली गाड़ियों के पीछे होती है।


अब कुछ बिगड़ेगा तभी न सुधारा जाएगा? न बिगड़ेगा तो उसे बिगाड़ दिया जाएगा। दुकान सबकी चलनी चाहिए। पर कुछ लड़ाई विचारों की भी होती है। कुछ लोगों का मानना हैकि समय देशद्रोह का चल रहा है। उनका ऐसा मानना इसलिए क्योंकि दूसरा वो नहीं मानता जो वो मानते हैं।


हर कोई जो हमसे मतांतर रखता है, वो देशद्रोही हो जाता है। वो कहना तो ये चाहते हैं कि ये मेरी बोली नहीं बोलता लेकिन उनके मुंह से निकल ये जाता हैकि ये देश के खिलाफ बोल रहा है। देशभक्ति के नाम पर वो ये तक भूल जाता हैकि उसमें और देश में फर्क है। ये यहीं जाकर नहीं रुकेगा, यूनिवर्सिटीज से ये स्कूल तक पहुंचेगा।


बच्चा किताबके ऊपर किस ब्रैंड का नेमचिट लगा रहा है, ये तक उसे देशभक्त या देशद्रोही बनाएगा। मां के पेट में भी उसने कोई बात कही हो, तो वो भी वायरल होकर उसके खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है। यही स्पीड रही तो 2025 तक देश में सिर्फ देशद्रोही ही बचेंगे। क्योंकि आधे लोग बाकी के आधे लोगों की बात से इत्तेफाक नहीं रखते। और अपनी बात से इत्तेफाक न रखने वाले को क्या ठहराना है आपको पता है।

 

 

 

 

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